“हिंदू होने पर गर्व, लेकिन उससे बड़ा गर्व भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र पर” — विधानसभा में रविन्द्र सिंह भाटी का संदेश...
रविन्द्र सिंह भाटी ने राजस्थान विधानसभा में राजस्थान विक्षुब्ध क्षेत्रों में स्थावर संपत्ति के अंतरण का प्रतिषेध विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि उन्हें हिंदू होने पर गर्व है, लेकिन उससे भी बड़ा गर्व भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र पर है। उन्होंने संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लेख करते हुए समाज को बांटने वाली राजनीति पर चिंता जताई और कहा कि राज्य के विकास के लिए भाईचारा, एकता और असली मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी है।
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को राजस्थान विक्षुब्ध क्षेत्रों में स्थावर संपत्ति के अंतरण का प्रतिषेध और परिसरों से किरायेदारों को बेदखली से संरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने अपने विचार रखते हुए सामाजिक सौहार्द, संविधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए, न कि धर्म या जाति के आधार पर लोगों को बांटना।
धर्मनिरपेक्ष भारत पर जताया गर्व
सदन में बोलते हुए भाटी ने कहा कि उन्हें अपने हिंदू होने पर गर्व है, लेकिन उससे भी अधिक गर्व इस बात का है कि वे भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक देश के नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की पहचान सदियों से भाईचारे, आपसी सम्मान और अपनायत की रही है और इस परंपरा को बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
संविधान के अधिकारों का किया उल्लेख
अपने संबोधन में विधायक भाटी ने भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों का जिक्र करते हुए कहा कि हर नागरिक को समानता और स्वतंत्रता का अधिकार मिला हुआ है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी कानून को बनाते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इन अधिकारों की मूल भावना प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को समानता, भेदभाव से मुक्ति, देश में कहीं भी रहने की स्वतंत्रता और सम्मानजनक जीवन का अधिकार देता है।
कानून की जरूरत पर उठाया सवाल
भाटी ने कहा कि राजस्थान लंबे समय से सामाजिक सौहार्द और शांति के लिए जाना जाता है। पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में वर्षों से आपसी समझदारी और सद्भाव का वातावरण रहा है। ऐसे में इस प्रकार के कानून की आवश्यकता क्यों पड़ी, इस पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
सत्ता और विपक्ष दोनों को दी नसीहत
विधायक ने अपने भाषण में यह भी कहा कि समाज में विभाजन की राजनीति किसी एक पक्ष तक सीमित नहीं है। कभी सत्ता पक्ष तो कभी विपक्ष, दोनों ही परिस्थितियों के अनुसार ऐसे मुद्दों को बढ़ावा देते हैं जिनका असर अंततः आम जनता पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे समाज को जोड़ने वाली राजनीति करें।
विकास के असली मुद्दों पर चर्चा की जरूरत
भाटी ने कहा कि प्रदेश में जब विकसित राजस्थान 2047 की बात हो रही है, तब महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, चिकित्सा और बुनियादी विकास जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि कई बार ऐसे विषय पीछे रह जाते हैं और समाज को बांटने वाले मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ जाते हैं।
देश विरोधी गतिविधियों पर सख्ती की मांग
भाटी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति देश विरोधी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि कानून का पालन करते हुए हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
साझा सांस्कृतिक विरासत की दिलाई याद
अपने संबोधन में उन्होंने भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी इसी मिट्टी के लोग हैं और देश की प्रगति में सभी समुदायों का समान योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई से लेकर युद्धों और संकट के समय तक हर समुदाय ने मिलकर देश की रक्षा और विकास में भूमिका निभाई है।
समाज को जोड़ने का दिया संदेश
अपने भाषण के अंत में विधायक भाटी ने कहा कि समाज में नफरत का माहौल बनने से आने वाली पीढ़ियों पर भी उसका असर पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि समाज में प्रेम, विश्वास और भाईचारे का वातावरण मजबूत किया जाए।
उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे मिलकर राजस्थान को आगे बढ़ाने के लिए काम करें और प्रदेश की एकता और सद्भाव की परंपरा को कायम रखें।