राजस्थान हाईकोर्ट ने एसीबी की मनमानी पर लगाई रोक: बिना वारंट तलाशी और नियम विरुद्ध फोन टैपिंग के आधार पर दर्ज FIR रद्द, निगम के पूर्व वित्तीय सलाहकार अचलेश्वर मीणा को बड़ी राहत

राजस्थान हाईकोर्ट ने एसीबी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए जयपुर नगर निगम ग्रेटर के पूर्व वित्तीय सलाहकार अचलेश्वर मीणा के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार का एफआईआर और सभी आपराधिक कार्रवाई रद्द कर दी। कोर्ट ने बिना पुख्ता सबूत और वारंट के घर तलाशी, पहले गिरफ्तारी फिर एफआईआर दर्ज करने तथा भारतीय टेलीग्राफ नियमों का पालन न करते हुए फोन टैपिंग को अवैध और निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया।

Mar 20, 2026 - 09:44
राजस्थान हाईकोर्ट ने एसीबी की मनमानी पर लगाई रोक: बिना वारंट तलाशी और नियम विरुद्ध फोन टैपिंग के आधार पर दर्ज FIR रद्द, निगम के पूर्व वित्तीय सलाहकार अचलेश्वर मीणा को बड़ी राहत

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की जांच प्रक्रिया और कार्यशैली पर गंभीर टिप्पणियां की हैं। कोर्ट ने जयपुर नगर निगम ग्रेटर के तत्कालीन वित्तीय सलाहकार अचलेश्वर मीणा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में दर्ज एफआईआर को पूरी तरह रद्द कर दिया है। साथ ही सभी आपराधिक कार्रवाइयों को खारिज कर दिया गया है। यह फैसला जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने अचलेश्वर मीणा की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बिना पुख्ता सबूतों और विश्वसनीय सूचना के आधार पर बिना सर्च वारंट के किसी व्यक्ति के घर में तलाशी लेना कानून के खिलाफ है। इसके अलावा एसीबी द्वारा की गई फोन टैपिंग की प्रक्रिया को भी नियमों का उल्लंघन बताते हुए अवैध करार दिया गया। कोर्ट ने इसे संवैधानिक निजता के अधिकार (Right to Privacy) का गंभीर उल्लंघन माना।

क्या था पूरा मामला?

एसीबी को सूचना मिली थी कि अचलेश्वर मीणा और उनके सहयोगी धनकुमार ठेकेदारों से एकत्रित रिश्वत की राशि लेकर मीणा के घर पहुंचे हैं। इस आधार पर एसीबी ने 7 जनवरी 2022 को मीणा के घर में बिना वारंट के जबरन घुसकर तलाशी ली और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।तलाशी के दौरान रिश्वत की कोई राशि बरामद नहीं हुई। एसीबी ने दावा किया कि आरोपी ने राशि को "खुर्द-बुर्द" (नष्ट या छिपा) कर दिया, लेकिन इसके लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए।

अचलेश्वर मीणा के वकील सुधीर गुप्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि:7 जनवरी 2022 को बिना एफआईआर दर्ज किए घर में तलाशी ली गई और गिरफ्तारी की गई।अगले दिन यानी 8 जनवरी को शाम 5 बजे आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और 3 दिन का रिमांड लिया गया।शाम 5:15 बजे एफआईआर दर्ज की गई, जिसके आधार पर तलाशी का दावा किया गया, लेकिन यह क्रम गलत और अवैध था।राशि खुर्द-बुर्द होने का कोई प्रमाण नहीं दिया गया।

फोन टैपिंग में बड़े नियम उल्लंघन

कोर्ट ने फोन टैपिंग की प्रक्रिया पर विशेष टिप्पणी की। एसीबी के डीजी ने गृह सचिव से "लोक सुरक्षा" के आधार पर फोन टैपिंग की अनुमति मांगी। लेकिन:विशेष गृह सचिव ने बिना उचित अधिकार के 60 दिनों की अनुमति दे दी।बाद में गृह सचिव ने इसे और 60 दिनों के लिए बढ़ा दिया।

भारतीय टेलीग्राफ एक्ट, 1885 और टेलीग्राफ नियम 1951 के प्रावधानों की पालना नहीं की गई। नियमों के अनुसार अनुमति मिलने के 7 दिनों के अंदर रिव्यू कमेटी के सामने मामला रखना अनिवार्य है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।फोन टैपिंग का आधार स्पष्ट नहीं था – आरोपी के किन कृत्यों से लोक सुरक्षा को खतरा था? कौन सी आपात स्थिति थी? इन सवालों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।कोर्ट ने कहा कि ऐसी प्रक्रिया न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि व्यक्ति की निजता के मौलिक अधिकार का भी हनन है।

फैसले का महत्व

यह फैसला एसीबी जैसी जांच एजेंसियों के लिए चेतावनी है कि जांच में प्रक्रियागत नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए। बिना पर्याप्त आधार, वारंट या वैध अनुमति के कार्रवाई नहीं की जा सकती। अचलेश्वर मीणा को इस फैसले से बड़ी कानूनी राहत मिली है, क्योंकि उनके खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई हैं।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.