भारत-चीन संबंधों के बीच बड़ी नियुक्ति: अनुभवी राजनयिक विक्रम दोराईस्वामी होंगे चीन में भारत के नए राजदूत
"1992 बैच के अनुभवी आईएफएस अधिकारी विक्रम दोराईस्वामी को चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। वर्तमान में ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त रहे दोराईस्वामी चीनी भाषा के विशेषज्ञ हैं और प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। जानें उनके 30 साल के कूटनीतिक सफर और इस नई जिम्मेदारी के बारे में।"
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए 1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी विक्रम दोराईस्वामी को चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया है। दोराईस्वामी वर्तमान में ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त (High Commissioner) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस पद पर उनकी नियुक्ति को भारत-चीन के वर्तमान संबंधों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोराईस्वामी जल्द ही बीजिंग में अपना पदभार संभाल लेंगे।
पत्रकारिता से राजदूत तक का सफर
विक्रम दोराईस्वामी का करियर बहुआयामी रहा है। 1992 में भारतीय विदेश सेवा में आने से पहले उन्होंने करीब एक साल तक पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम किया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में मास्टर डिग्री हासिल की है। उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में है जो जटिल कूटनीतिक स्थितियों को सुलझाने में माहिर माने जाते हैं।
चीन से पुराना नाता और भाषाओं पर पकड़
दोराईस्वामी के पास चीन में काम करने का लंबा अनुभव है। उनके करियर की कुछ खास बातें:
-
चीनी भाषा में डिप्लोमा: उन्होंने हांगकांग के चीनी विश्वविद्यालय (New Asia Yale-in-Asia) से चीनी भाषा में डिप्लोमा किया है।
-
बीजिंग में अनुभव: सितंबर 1996 से लेकर लगभग चार साल तक उन्होंने बीजिंग में भारतीय दूतावास में अपनी सेवाएं दीं।
-
बहुभाषी: वे चीनी भाषा के अलावा फ्रेंच और कोरियन भाषा बोलने में भी पूरी तरह सहज हैं, जो उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक प्रभावी वार्ताकार बनाता है।
प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक की सेवाएं
दोराईस्वामी ने अपने 30 साल से अधिक के करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाई है:
-
प्रधानमंत्री के निजी सचिव: उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के निजी सचिव के तौर पर कार्य कर देश की आंतरिक और बाह्य नीतियों को करीब से समझा है।
-
अंतरराष्ट्रीय मिशन: न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में राजनीतिक सलाहकार और जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) में भारत के महावाणिज्य दूत रहे।
-
पड़ोसी देशों के विशेषज्ञ: ब्रिटेन जाने से पहले वे बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त थे और विदेश मंत्रालय में बांग्लादेश व म्यांमार विभाग के प्रमुख भी रह चुके हैं।
-
महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन: 2012 में नई दिल्ली में हुए चौथे ब्रिक्स (BRICS) समिट के कोऑर्डिनेटर के रूप में उन्होंने अपनी संगठनात्मक क्षमता का परिचय दिया था।
नई जिम्मेदारी और चुनौतियां
चीन में भारत के राजदूत के रूप में दोराईस्वामी के सामने सीमा विवाद और व्यापारिक संतुलन जैसे कई बड़े मुद्दे होंगे। उज्बेकिस्तान और दक्षिण कोरिया में राजदूत रह चुके दोराईस्वामी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। ज्ञात हो कि 2019 में उन्हें विदेश मंत्रालय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए विशेष नया विभाग बनाने का जिम्मा भी सौंपा गया था।