परिवार के तीन मासूमों का सड़क पर खौफनाक अंत स्कूल जाते वक्त पिकअप ने कुचला, दो की मौके पर मौत, तीसरा जिंदगी-मौत से जूझ रहा.

राजस्थान के जोधपुर जिले के देचू क्षेत्र में फलोदी-पचपदरा हाईवे पर मंगलवार सुबह एक पिकअप ने स्कूल जा रहे एक ही परिवार के तीन छात्रों—सुनील (15), नागेश (17) और भोमेश (17)—को कुचल दिया। सुनील और नागेश की मौके पर मौत हो गई, जबकि भोमेश गंभीर रूप से घायल है और जोधपुर अस्पताल में भर्ती है। तीनों चचेरे भाई-चाचा थे, गरीब मजदूर परिवार से। ड्राइवर गिरफ्तार, परिजनों ने मुआवजा व कार्रवाई की मांग की।

Oct 28, 2025 - 18:34
परिवार के तीन मासूमों का सड़क पर खौफनाक अंत स्कूल जाते वक्त पिकअप ने कुचला, दो की मौके पर मौत, तीसरा जिंदगी-मौत से जूझ रहा.

जोधपुर, 28 अक्टूबर 2025: राजस्थान के जोधपुर जिले के देचू क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली सड़क दुर्घटना ने एक ही परिवार के तीन मासूम भाइयों की जिंदगी छीन ली। फलोदी-पचपदरा स्टेट हाईवे पर मंगलवार सुबह स्कूल रवाना होने वाले तीनों छात्रों को तेज रफ्तार पिकअप ने अपनी चपेट में ले लिया। दो छात्रों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीसरा गंभीर रूप से जख्मी है और जोधपुर के अस्पताल में इलाजरत है। हादसे की तस्वीरें रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं—सड़क पर बिखरे बैग, चप्पलें और खून से सनी मिट्टी, जो इस विपत्ति की भयावहता बयां कर रही हैं। यह घटना न केवल एक परिवार को शोक में डुबो रही है, बल्कि सवाल भी खड़े कर रही है कि ग्रामीण इलाकों में सड़क सुरक्षा के दावे कितने खोखले हैं।

हादसे का मंजर: सुबह की शांति में मौत का तांडव

दुर्घटना देचू तहसील के खेतनगर गांव के पास फलोदी-पचपदरा स्टेट हाईवे पर सुबह करीब 9:30 बजे हुई। सेतरावा उपखंड के विरमदेवगढ़ गांव के निवासी तीनों छात्र—सुनील मेघवाल (15 वर्ष), नागेश मेघवाल (17 वर्ष) और भोमेश उर्फ भोमाराम मेघवाल (17 वर्ष)—घर से निकलकर राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल सेतरावा जा रहे थे। सुबह 9:15 बजे वे पैदल ही निकले थे, क्योंकि घर से स्कूल की दूरी महज दो किलोमीटर थी। लेकिन स्कूल से महज एक किलोमीटर पहले ही सोलंकियातला की ओर से आ रही एक पिकअप ने इन मासूमों को अपनी चपेट में ले लिया।टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों छात्र सड़क पर दूर तक उछलकर गिर पड़े। उनके स्कूल बैग और चप्पलें सड़क पर इधर-उधर बिखर गए, मानो उनकी अधूरी पढ़ाई का सपना भी यहीं खत्म हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण दौड़े चले आए। भीड़ में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने फौरन एम्बुलेंस और पुलिस को खबर की, साथ ही बच्चों के परिजनों को बुलाया। लोहावट डीएसपी संग्राम सिंह के मुताबिक, "ग्रामीणों की तत्परता से बच्चों को तुरंत सेतरावा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।"

अस्पताल में काली सुबह: दो मौतें, एक जिंदगी की आस

सेतरावा अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने सुनील और नागेश को मृत घोषित कर दिया। दोनों की मौके पर ही सांसें थम चुकी थीं। सुनील 9वीं कक्षा का होनहार छात्र था, जबकि नागेश 11वीं कक्षा में पढ़ता था। वहीं, भोमेश को गंभीर चोटें आईं—उसके सिर और छाती में गहरी चोटें हैं। डॉक्टरों ने उसे प्राथमिक उपचार के बाद जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल रेफर कर दिया, जहां वह वेंटिलेटर पर दवाओं पर है। डीएसपी संग्राम सिंह ने बताया कि घायल भोमेश की हालत नाजुक बनी हुई है, लेकिन डॉक्टरों की पूरी टीम उसे बचाने में जुटी है। दोनों शवों को अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है, जहां पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा।

एक परिवार, तीन जख्म: चचेरे भाई और चाचा का रिश्ता, दर्द का साथी

इस हृदयविदारक हादसे में सबसे ज्यादा मार एक ही परिवार पर पड़ी है। सुनील, नागेश और भोमेश रक्त संबंधों से जुड़े थे—सुनील और भोमेश चचेरे भाई हैं, जबकि नागेश दोनों का चाचा लगता है। विरमदेवगढ़ गांव में मेघवाल परिवार का यह रिश्ता अब शोक में बदल गया है। सुनील के पिता खीयाराम पत्थर की खान में मजदूरी करते हैं। उनके तीन बेटे और एक बेटी हैं, लेकिन दर्द यह है कि सुनील का एक छोटा भाई 2017 में जोधपुर में एक सड़क हादसे में ही जान गंवा चुका था। परिवार पर यह दूसरी ऐसी मार है, जो सदमे को और गहरा कर रही है।नागेश के घर में तो जैसे आसमान टूट पड़ा है। उसकी मां की पहले ही मौत हो चुकी थी, और वह अपने पिता चैनाराम का इकलौता बेटा था। मां के निधन के बाद पिता ने दूसरी शादी की, जिससे दो बेटे और एक बेटी हैं। चैनाराम भी खान में मजदूर हैं। नागेश 11वीं कक्षा का मेधावी छात्र था, जो परिवार की उम्मीदों का केंद्र था। वहीं, भोमेश के पिता चूनाराम भी उसी खान में काम करते हैं। भोमेश के दो भाई थे, लेकिन एक भाई की पांच साल पहले ब्लड कैंसर से मौत हो चुकी थी। परिवार पहले ही आर्थिक तंगी और बीमारी की मार झेल चुका था, अब यह हादसा उन्हें पूरी तरह तोड़ चुका है।परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सुनील की मां ने बताया, "बच्चे सुबह ही निकले थे, स्कूल का होमवर्क पूरा करके। कौन सोचता कि ये आखिरी विदाई होगी।" नागेश के सौतेले भाई-बहनों का रोना देखकर पूरा गांव गमगीन है। 

ड्राइवर गिरफ्तार, लेकिन सवाल बाकी: दूध की डिलीवरी में मौत का सफर

पुलिस ने हादसे के तुरंत बाद कार्रवाई की। सेतरावा के पास लोड़ता गांव का निवासी पिकअप ड्राइवर सुनील राम को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। डीएसपी के अनुसार, सुनील आसपास के गांवों से दूध इकट्ठा करके देचू और सेतरावा के दुकानदारों को बेचता है। वह दूध लादकर दुकानों पर डिलीवरी देने जा रहा था, तभी स्पीड में कंट्रोल खो बैठा। पिकअप सोलंकियातला से आ रही थी और हाईवे पर ओवरटेकिंग के चक्कर में बच्चों से टकराई। ड्राइवर के खिलाफ आईपीसी की धारा 304ए (लापरवाही से मौत) और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। वाहन जब्त कर लिया गया है।हादसे के बाद डीएसपी संग्राम सिंह, देचू एसडीएम भंवरलाल, सेतरावा और देचू थाने की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। उन्होंने परिजनों को सांत्वना दी और जांच शुरू की। 

परिजनों का गुस्सा फूटा: मुआवजा और सख्त कार्रवाई की मांग

हादसे की खबर फैलते ही परिजन और ग्रामीण भड़क उठे। अस्पताल के बाहर धरना शुरू हो गया। उन्होंने पिकअप ड्राइवर के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने, मुआवजे की मांग की और सड़क पर सुरक्षा के इंतजामों की कमी पर सवाल उठाए। करीब 15 मिनट तक बातचीत चली। डीएसपी और एसडीएम ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया—परिजनों को सरकारी सहायता, मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी का वादा किया। इसके बाद धरना समाप्त हुआ। ग्रामीणों ने कहा, "ये हाईवे है, लेकिन बच्चों की जान की कीमत क्या? स्पीड ब्रेकर, साइन बोर्ड कहां हैं?" 

व्यापक संकट: ग्रामीण राजस्थान में सड़क हादसों का काला साया

यह हादसा राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में बढ़ते सड़क हादसों की पोल खोलता है। राज्य में प्रतिदिन दर्जनों दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें ज्यादातर ओवरस्पीडिंग और लापरवाही जिम्मेदार है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हाईवे पर पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ और जागरूकता अभियान की कमी घातक साबित हो रही है। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मासूमों की हंसी को बचाने के लिए क्या कदम उठाए जाएं।