मुफ्त योजनाओं से नहीं, रोजगार से होगा विकास — विधानसभा में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने उठाई आवाज़ !

राजस्थान विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, युवाओं के रोजगार, सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याओं और नीति आधारित विकास का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने बजट को जनता की उम्मीदों से जुड़ा बताया, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार पर जोर दिया तथा मुफ्त योजनाओं की बजाय स्थायी विकास मॉडल अपनाने की बात कही। साथ ही पश्चिमी राजस्थान में सोलर-विंड परियोजनाओं, बॉर्डर टूरिज्म, सीमांत गांवों से पलायन और ओरण-गोचर भूमि संरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
February 27, 2026 • 7:58 PM  21
र
राजनीति
NEWS CARD
Logo
मुफ्त योजनाओं से नहीं, रोजगार से होगा विकास — विधानसभा में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने उठाई आवाज़ !
“मुफ्त योजनाओं से नहीं, रोजगार से होगा विकास — विधानसभा में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने उठाई आवाज़ !”
Favicon
Read more on thekhatak.com
27 Feb 2026
https://www.thekhatak.com/muft-yojnaon-se-nahi-rojgar-se-hoga-vikas-vidhansabha-mein-shiv-vidhayak-ravindra-singh-bhati-ne-uthai-aawaz
Google News
Copied
मुफ्त योजनाओं से नहीं, रोजगार से होगा विकास — विधानसभा में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने उठाई आवाज़ !

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में बजट से जुड़े विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान शिव क्षेत्र के विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने प्रदेश के समग्र विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, युवाओं के भविष्य और सीमावर्ती इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से नीति आधारित और संतुलित विकास मॉडल अपनाने की मांग की। अपने विस्तृत संबोधन में उन्होंने बजट को केवल राजनीतिक दस्तावेज नहीं बल्कि प्रदेश की करोड़ों जनता की उम्मीदों से जुड़ा निर्णय बताया।

बजट को बताया जनता की उम्मीदों का दस्तावेज

विधानसभा में बोलते हुए भाटी ने कहा कि राज्य का बजट किसी एक दल या सरकार का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की जनता का है। उन्होंने कहा कि जनता ने जनप्रतिनिधियों को पांच वर्षों के लिए जिम्मेदारी सौंपी है और अब यह देखना जरूरी है कि सरकार उनकी अपेक्षाओं पर कितनी खरी उतर रही है।

उन्होंने सरकार द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग प्रोत्साहन और ग्रीन कॉरिडोर जैसी योजनाओं के लिए किए गए प्रावधानों की सराहना भी की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि राजस्थान की असली ताकत गांवों में बसती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किए बिना विकास अधूरा रहेगा।

युवाओं के भविष्य और कौशल विकास पर जोर

एक युवा विधायक के रूप में भाटी ने रोजगार और शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित राजस्थान का लक्ष्य तभी संभव है जब युवाओं को केवल डिग्री नहीं बल्कि रोजगारपरक कौशल दिया जाए।

उन्होंने सवाल उठाया कि नई तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स की चर्चा तो हो रही है, लेकिन क्या राज्य का शिक्षा और प्रशिक्षण ढांचा उस स्तर तक तैयार है। उनके अनुसार स्टार्टअप, तकनीकी शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट को बजट की प्राथमिकता बनाना जरूरी है ताकि बेरोजगारी कम हो सके।

मुफ्त योजनाओं की राजनीति पर टिप्पणी

भाटी ने बिना नाम लिए मुफ्त वितरण आधारित राजनीति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि लोगों को सीधे आर्थिक सहायता देने के बजाय उन्हें मजबूत आधारभूत सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने रोजगार आधारित सशक्तिकरण को स्थायी विकास का रास्ता बताया।

पश्चिमी राजस्थान में ऊर्जा परियोजनाओं पर नीति की मांग

पश्चिमी राजस्थान में तेजी से विकसित हो रहे सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा जरूरी है, लेकिन इसका विस्तार स्पष्ट नीति और पर्यावरणीय संतुलन के साथ होना चाहिए। अनियोजित विकास से भविष्य में तापमान वृद्धि और पर्यावरणीय चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

बॉर्डर टूरिज्म और उद्योगों की स्थापना का प्रस्ताव

उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में बॉर्डर टूरिज्म को बढ़ावा देने की वकालत की और कहा कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। साथ ही उन्होंने पेट्रोकेमिकल उद्योग, आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय और स्किल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों की स्थापना की मांग रखी, ताकि पश्चिमी राजस्थान आर्थिक रूप से मजबूत बन सके।

सीमावर्ती गांवों से पलायन का मुद्दा सदन में गूंजा

नियम 295 के तहत बोलते हुए भाटी ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे गांवों में कथित अनियमित भूमि आवंटन और मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण बढ़ते पलायन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जो लोग 1965 और 1971 के युद्धों के समय भी अपने गांवों में डटे रहे, आज वही लोग अपनी जमीन और आजीविका बचाने के लिए पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सीमांत क्षेत्र खाली होते गए तो यह सामाजिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से गंभीर स्थिति होगी।

ओरण-गोचर भूमि और सीमांत हितों की मांग

विधायक भाटी ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें—

ओरण और गोचर भूमि का संरक्षण

सीमावर्ती युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता

सीमा क्षेत्र के किसानों और व्यापारियों को बिजली राहत

खेजड़ी संरक्षण व्यवस्था स्पष्ट करना

बॉर्डर होमगार्ड और स्वयंसेवकों का लंबित भत्ता जारी करना

जैसे मुद्दे शामिल रहे।

प्रदेशहित में सहयोग का भरोसा

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर वे राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर सहयोग के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि यदि 2047 तक मजबूत और विकसित राजस्थान बनाना है तो युवाओं, गांवों और सीमावर्ती इलाकों को विकास की मुख्य धारा में लाना अनिवार्य होगा।

विधानसभा में दिया गया यह भाषण बजट चर्चा से आगे बढ़कर ग्रामीण विकास, रोजगार, पर्यावरण संतुलन और सीमांत सुरक्षा जैसे मुद्दों पर व्यापक नीति विमर्श की मांग के रूप में देखा जा रहा है।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Digital Archives

home Home amp_stories Web Stories local_fire_department Trending play_circle Videos mark_email_unread Newsletter