कोमा में पति, फिर भी मां बनने का रास्ता साफ—दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक IVF फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने कोमा में मौजूद सैनिक की पत्नी को IVF के जरिए मां बनने की अनुमति दी। कोर्ट ने इसे महिला के अधिकार और मानवीय पहलू से जुड़ा अहम फैसला बताया।

Apr 15, 2026 - 22:02
कोमा में पति, फिर भी मां बनने का रास्ता साफ—दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक IVF फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में सुनवाई करते हुए कोमा में पड़े सैनिक की पत्नी को इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) के जरिए मां बनने की अनुमति दे दी है।

मामला एक ऐसे सैनिक से जुड़ा है, जो गंभीर दुर्घटना के बाद “पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट” में चला गया था और डॉक्टरों के अनुसार उसके ठीक होने की संभावना लगभग न के बराबर है।

याचिकाकर्ता पत्नी ने कोर्ट में बताया कि उन्होंने और उनके पति ने साल 2023 में आपसी सहमति से संतान प्राप्ति के लिए IVF प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया था। लेकिन बाद में पति के गंभीर रूप से बीमार हो जाने के कारण प्रक्रिया रोक दी गई थी।

कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए कहा कि ऐसे हालात में केवल तकनीकी या कानूनी बाधाओं के आधार पर महिला के मातृत्व के अधिकार को रोका नहीं जा सकता।

न्यायालय ने यह भी माना कि पति द्वारा कोमा में जाने से पहले दी गई सहमति को ही वर्तमान परिस्थितियों में वैध माना जाएगा। साथ ही पत्नी की सहमति को भी कानूनी रूप से प्रभावी मानते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई।

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संतान सुख केवल इंसान के नियंत्रण में नहीं होता, यह कई बार परिस्थितियों और भाग्य पर निर्भर करता है।

इस फैसले को एक प्रगतिशील कदम माना जा रहा है, जो न केवल महिला के प्रजनन अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि ऐसे जटिल मामलों में मानवीय दृष्टिकोण को भी प्राथमिकता देता है।

अब इस आदेश के बाद IVF प्रक्रिया दोबारा शुरू की जा सकेगी, जिससे याचिकाकर्ता को मातृत्व का अवसर मिल सकता है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground