“RAS अधिकारी बनता तो राज्य को बेच देता”: पेपर लीक केस में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, हनुमाना राम की जमानत खारिज
पेपर लीक केस में सुप्रीम कोर्ट ने आरएएस चयनित हनुमाना राम की जमानत याचिका खारिज कर दी। राजस्थान सरकार की सख्त दलीलों को मानते हुए कोर्ट ने मामले को गंभीर करार दिया।
राजस्थान के चर्चित पेपर लीक और भर्ती घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरएएस चयनित हनुमाना राम की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को किसी भी प्रकार की राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने आरोपी के खिलाफ मजबूत दलीलें पेश कीं। सरकार ने कहा कि हनुमाना राम का आचरण अत्यंत गंभीर है और यदि ऐसे व्यक्ति को जमानत दी जाती है तो यह सिस्टम की विश्वसनीयता के लिए बड़ा खतरा होगा।
डमी अभ्यर्थी बनकर दी थीं कई परीक्षाएं
जांच में सामने आया है कि हनुमाना राम ने कई परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट और प्रॉक्सी के रूप में काम किया। उसने कथित रूप से तीन लोगों की जगह परीक्षा दी। इनमें पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती 2021 और पटवार भर्ती 2021 जैसी परीक्षाएं शामिल हैं।
टॉपर होने के बावजूद गंभीर आरोप
चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी पढ़ाई में काफी होशियार माना जाता था। उसने आरएएस 2018 में 22वीं रैंक हासिल की थी और एक अन्य परीक्षा में दूसरी रैंक भी प्राप्त की थी। इसके बावजूद उस पर संगठित पेपर लीक गिरोह से जुड़े होने के गंभीर आरोप लगे हैं।
जांच में खुली बड़ी साजिश
शुरुआती एफआईआर में उसका नाम नहीं था, लेकिन जांच के दौरान उसकी भूमिका सामने आई। इससे संकेत मिलता है कि वह किसी बड़े परीक्षा रैकेट का हिस्सा रहा और लगातार इस तरह की गतिविधियों में शामिल था।
सरकार की सख्त दलील
राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि ऐसे कृत्य से भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सीधा असर पड़ता है। यदि कोई चयनित अधिकारी ही इस तरह के अपराध में शामिल हो, तो यह पूरे सिस्टम के लिए गंभीर खतरा है। सरकार ने यहां तक कहा कि यदि याचिकाकर्ता को आरएएस अधिकारी बनाया गया होता तो वह राज्य को बेच देता।
अदालत ने सभी तथ्यों को गंभीर मानते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।