महंगाई की नई आग! पेट्रोल ₹18 और डीजल ₹35 महंगा होने की आशंका, जनता पर बढ़ेगा बोझ
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल करीब ₹18 और डीजल ₹35 प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा है, लेकिन भारत में दाम स्थिर रखे गए हैं, जिससे तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 1600 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो रहा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में थोड़ी भी बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव खत्म होने के बाद कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है। इससे न सिर्फ ईंधन महंगा होगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ेगा।
देश में एक बार फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बड़ा झटका लग सकता है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों के कारण पेट्रोल ₹18 प्रति लीटर और डीजल ₹35 प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी (Macquarie) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल स्थिर रखे गए हैं, जिससे तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 46 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 27 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 27 फरवरी को जहां क्रूड ऑयल 73 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं 19 मार्च को यह 120 डॉलर तक पहुंच गया और अब यह लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। इस तेज उछाल ने तेल कंपनियों की लागत और मुनाफे के बीच बड़ा असंतुलन पैदा कर दिया है।
तेल कंपनियां हर दिन करीब 1600 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। पहले यह नुकसान 2400 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया था, लेकिन एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती के बाद इसमें थोड़ी राहत मिली है। बावजूद इसके, प्रति लीटर पेट्रोल पर लगभग 18 रुपये और डीजल पर 35 रुपये का घाटा अभी भी बना हुआ है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट और रूस से आता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में मामूली बदलाव भी भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे देश के चालू खाता घाटे (CAD) पर भी दबाव बढ़ सकता है, जो 2026 की पहली तिमाही तक 20 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि बंगाल सहित 5 राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद सरकार और तेल कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला ले सकती हैं। हालांकि यह निर्णय पूरी तरह बाजार और सरकारी नीति पर निर्भर करेगा।
वहीं दूसरी ओर, सरकार की कमाई में भी तेल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी की हिस्सेदारी लगातार घट रही है, जिससे राजस्व पर दबाव बढ़ रहा है। वैश्विक स्तर पर भी कई देशों जैसे अमेरिका, पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ चुके हैं।