“अचानक बदला कोर्ट का फैसला… जानिए कौन हैं वो नेता जिन्हें मिली बड़ी राहत”

सालों पुराने मामले में आया ऐसा फैसला जिसने सबको चौंका दिया… सजा पाए नेताओं को अब कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। आखिर क्या था पूरा मामला और कैसे बदला फैसला?

Apr 10, 2026 - 09:27
“अचानक बदला कोर्ट का फैसला… जानिए कौन हैं वो नेता जिन्हें मिली बड़ी राहत”

राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा मोड़ तब आया जब करीब 12 साल पुराने मामले में कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कांग्रेस के दो विधायकों को बड़ी राहत दे दी।

कोर्ट ने सजा रद्द कर किया बरी

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने मुकेश भाकर और मनीष यादव सहित 9 लोगों को दोषमुक्त कर दिया।

कोर्ट ने इससे पहले ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई एक-एक साल की सजा को रद्द करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला साल 2014 का है, जब आरोप लगाया गया था कि:

राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य गेट के बाहर

जेएलएन मार्ग पर

करीब 20 मिनट तक रास्ता जाम किया गया था।

इस मामले में 2016 में चालान पेश हुआ और बाद में ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी।

कोर्ट ने क्यों पलटा फैसला?

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक राज बाजवा ने कोर्ट में तर्क दिया कि:

आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं

घटना के समय वे केवल विश्वविद्यालय गेट पर मौजूद थे

जांच अधिकारी (IO) के बयान तक दर्ज नहीं किए गए

सिर्फ पुलिसकर्मियों के बयान के आधार पर सजा दी गई

इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया।

किन-किन को मिली राहत?

इस मामले में मुकेश भाकर और मनीष यादव के अलावा:

अभिषेक चौधरी

राजेश मीणा

रवि किराड़

वसीम खान

द्रोण यादव

भानूप्रताप सिंह

विद्याधर मील

सहित कुल 9 लोगों को दोषमुक्त किया गया।

मुकेश भाकर क्यों रहे चर्चा में?

मुकेश भाकर हाल ही में अपने विवाह समारोह को लेकर भी सुर्खियों में रहे थे, जहां वीआईपी मूवमेंट के कारण ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ गई थी।

36 वर्षीय भाकर:

छात्र राजनीति से उभरे नेता हैं

राजस्थान यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं

2018 में पहली बार विधायक बने

2023 में लाडनूं सीट से बड़ी जीत हासिल की

क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले के बाद:

कांग्रेस को राजनीतिक तौर पर राहत मिली है

लंबे समय से चल रहे मामले का अंत हो गया

न्यायिक प्रक्रिया और जांच प्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए हैं

Kashish Sain Bringing truth from the ground