13 वर्षीय जिया सिंघवी ने अमेरिका के TEDx मंच पर चमक बिखेरी: न्याय प्रणाली में AI और न्यूरोसाइंस से क्रांति का सुझाव, पादरू (बालोतरा) की बेटी ने राजस्थान का नाम रोशन किया
राजस्थान के बालोतरा जिले के पादरू गांव की 13 वर्षीय जिया सिंघवी ने अमेरिका के TEDxUpper Belmont Pl Youth मंच पर मुख्य वक्ता बनकर देश-राजस्थान का नाम रोशन किया। अपनी टॉक "Cyborgs for Justice? It's All in Your Head!" में उन्होंने न्यूरोसाइंस, AI और मशीन लर्निंग के जरिए गवाहों के पूर्वाग्रह व याददाश्त की कमियों को दूर कर निष्पक्ष न्याय व्यवस्था की क्रांतिकारी कल्पना प्रस्तुत की। मात्र 11 साल में SAT में परफेक्ट स्कोर हासिल करने वाली जिया वर्तमान में क्रिमिनल जस्टिस का अध्ययन कर रही हैं। यह उपलब्धि पादरू जैन समाज और प्रवासी राजस्थानियों के लिए गर्व का विषय है।
बालोतरा/पादरू (राजस्थान), 7 फरवरी 2026 — राजस्थान के बालोतरा जिले के छोटे से गांव पादरू की 13 वर्षीय मेधावी छात्रा जिया सिंघवी ने सात समंदर पार अमेरिका में अपनी असाधारण प्रतिभा से सबका दिल जीत लिया है। पादरू की माटी से निकली इस नन्ही प्रतिभा ने वर्जीनिया राज्य के लीजबर्ग शहर में आयोजित प्रतिष्ठित TEDxUpper Belmont Pl Youth मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में अपनी बात रखी और वैश्विक स्तर पर राजस्थान तथा भारत का नाम रौशन किया।
जिया सिंघवी, जो पादरू निवासी हैं, हैदराबाद प्रवासी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वे श्रीमती अमरावती देवी एवं स्वर्गीय श्री सांकलचंदजी कटारिया संघवी की पौत्री तथा श्री नितिन-अनुपमा कटारिया संघवी की सुपुत्री हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे पादरू जैन समाज और राजस्थान के प्रवासी समुदाय के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई है।
TEDx टॉक: "Cyborgs for Justice? It's All in Your Head!"
जिया ने अपनी TEDx टॉक "Cyborgs for Justice? It's All in Your Head!" में न्याय प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव का अनूठा और विचारोत्तेजक सुझाव दिया। उन्होंने न्यूरोसाइंस (मस्तिष्क विज्ञान), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग के उपयोग पर जोर देते हुए बताया कि कैसे मानवीय गवाहों में मौजूद पूर्वाग्रह (bias) और याददाश्त की कमजोरियां न्याय की राह में सबसे बड़ी बाधा बनती हैं।
जिया का मुख्य विचार यह था कि मानव मस्तिष्क की सीमाओं के कारण निर्दोष लोगों को सजा मिल सकती है या अपराधी बच सकते हैं। उन्होंने साइबोर्ग जैसी तकनीक (मानव और मशीन का संयोजन) के माध्यम से एक निष्पक्ष, सटीक और पूर्वाग्रह-मुक्त न्याय व्यवस्था की कल्पना प्रस्तुत की। उनकी यह बात इतनी गहन और भविष्योन्मुखी थी कि इसने दर्शकों को गहरे चिंतन में डाल दिया। टॉक का मूल संदेश था: "न्याय का सबसे बड़ा खतरा मानव मस्तिष्क ही हो सकता है, लेकिन वही तकनीक से इसे ठीक भी किया जा सकता है।"
असाधारण शैक्षणिक उपलब्धियां
जिया की प्रतिभा कोई नई नहीं है। मात्र 11 वर्ष की उम्र में उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित Scholastic Assessment Test (SAT) में 1600 में से 1600 का परफेक्ट स्कोर हासिल किया था, जो दुनिया भर में दुर्लभ उपलब्धि है। वर्तमान में वे Criminal Justice (आपराधिक न्याय) विषय का गहन अध्ययन कर रही हैं, जो उनकी TEDx टॉक के विषय से पूरी तरह मेल खाता है।
परिवार और समाज में उत्साह की लहर
श्री पादरू जैन संघ के महामंत्री तथा नाकोड़ा ट्रस्टी गौतम बालड़ ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए बताया कि जिया की यह सफलता पादरू की माटी के संस्कारों और परिवार के मार्गदर्शन का नतीजा है। हैदराबाद के प्रचार-प्रसार मंत्री भरत कटारिया (संघवी परिवार) ने कहा, "मेरी भतीजी जिया ने इतनी कम उम्र में भविष्य की न्याय प्रणाली पर इतने बेबाक और शोधपरक विचार रखे हैं कि ये आने वाले समय में विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण साबित होंगे।"
TEDx एक ऐसा वैश्विक मंच है जहां दुनिया के सबसे प्रभावशाली विचार साझा किए जाते हैं। इसी मंच से ग्रेटा थनबर्ग जैसी पर्यावरण कार्यकर्ता और भारत के अमन गुप्ता जैसी हस्तियों ने अपनी पहचान बनाई है। जिया का यहां चयन उन्हें भविष्य की वैश्विक लीडर बनाने की ओर एक बड़ा कदम है।