मोबाइल गेम की लत ने छीनी मासूम की जान: पिता के डांटने से नाराज होकर फंदे पर लटका आठवीं का छात्र
धौलपुर में आठवीं क्लास के छात्र विष्णु ने फ्री फायर गेम की लत के कारण पिता के डांटने पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली, कंचनपुर थाना क्षेत्र के कुर्रेदा गांव की घटना, पुलिस जांच जारी,
धौलपुर, 6 नवंबर 2025:
राजस्थान के धौलपुर जिले के कुर्रेदा गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। आठवीं कक्षा के एक मासूम छात्र ने मोबाइल गेम 'फ्री फायर' खेलने को लेकर पिता के डांटने से नाराज होकर आत्महत्या कर ली। बुधवार शाम करीब 6 बजे हुई इस घटना ने न सिर्फ परिवार को बल्कि समाज को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि डिजिटल दुनिया की लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर कितना गहरा असर डाल रही है।
घटना का पूरा विवरण; मामला धौलपुर जिले के कंचनपुर थाना क्षेत्र के कुर्रेदा गांव का है। मृतक छात्र का नाम विष्णु (उम्र लगभग 13-14 वर्ष) था, जिनके पिता का नाम राजवीर गुर्जर है। परिवार के अनुसार, विष्णु एक सामान्य ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखता था, जहां पिता खेती-बाड़ी और मजदूरी का काम करते हैं। विष्णु स्थानीय सरकारी स्कूल में आठवीं कक्षा का छात्र था और पढ़ाई में औसत था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से वह मोबाइल फोन पर 'फ्री फायर' गेम का शौकीन हो गया था।परिवार वालों ने बताया कि विष्णु दिन-रात एक करके गेम खेलने में लीन रहता था। स्कूल से लौटते ही वह फोन हाथ में ले लेता और घंटों तक गेम में डूबा रहता। पिता राजवीर ने कई बार उसे समझाया और गेम खेलने से रोका, लेकिन विष्णु की लत इतनी गहरी हो चुकी थी कि वह बार-बार उसी की जिद करता। बुधवार दोपहर को भी विष्णु घर पर फोन पर फ्री फायर खेल रहा था। तभी पिता ने उसे देख लिया और सख्ती से डांट दिया। उन्होंने फोन छीन लिया और कहा कि पढ़ाई पर ध्यान दो, वरना फोन हमेशा के लिए छीन लेंगे।इस डांट से विष्णु बेहद नाराज हो गया। वह चुपचाप कमरे में चला गया और किसी ने ध्यान न दिया। शाम करीब 6 बजे जब परिवार वाले उसे ढूंढने लगे, तो कमरे में बंद दरवाजा मिला। दरवाजा तोड़कर अंदर घुसने पर भयानक दृश्य देखकर सब स्तब्ध रह गए। विष्णु ने कमरे की छत के पंखे से दुपट्टा लटका रखा था और उसी फंदे पर लटका हुआ था। परिवार ने तुरंत शोर मचाया और ग्रामीणों की मदद से उसे नीचे उतारा, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। स्थानीय डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस जांच और प्रारंभिक निष्कर्ष; कंचनपुर थाना पुलिस को सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची।प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है, जिसमें कोई बाहरी संलिप्तता नहीं दिख रही। मृतक के पिता राजवीर के बयान पर सुसाइड नोट के अभाव में धारा 174 CrPC के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मोबाइल फोन को जब्त कर लिया। फोन में गेम ऐप्स और चैट हिस्ट्री की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या विष्णु ऑनलाइन दोस्तों या गेम कम्युनिटी से प्रभावित था।पुलिस ने परिवार से विस्तृत पूछताछ की, जिसमें पता चला कि विष्णु को गेम में 'रैंक' बढ़ाने के चक्कर में कभी-कभी पैसे भी खर्च करने की आदत पड़ गई थी। परिवार गरीब होने के कारण यह खर्च वह खुद ही जुटाता था। एसएचओ ने कहा, "हम गांव में जागरूकता अभियान चलाएंगे ताकि अभिभावक बच्चों की मोबाइल उपयोग पर नजर रखें। ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए समय रहते काउंसलिंग जरूरी है।
परिवार का दर्द और समाज का आईना; विष्णु के पिता राजवीर टूट चुके हैं। आंसुओं से भरी आंखों से उन्होंने कहा, "मैंने तो बस उसकी भलाई के लिए डांटा था। सोचा भी न था कि मेरा बेटा इतना संवेदनशील है। फ्री फायर ने उसे इतना बर्बाद कर दिया कि वह असल जिंदगी से कट गया। अब पछतावा ही बचा है।" मां और छोटे भाई-बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव वाले भी सदमे में हैं और विष्णु के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।यह घटना मोबाइल गेम्स की लत के खतरों को उजागर करती है। 'फ्री फायर' जैसे बैटल रॉयल गेम्स बच्चों में एड्रेनालिन रश पैदा करते हैं, जो धीरे-धीरे लत बन जाती है। भारत में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जहां स्कूल-कॉलेज के छात्र गेम्स या सोशल मीडिया के कारण डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। मनोचिकित्सक डॉ. अजय मेहता कहते हैं, "बच्चों को डांटने से पहले उनकी भावनाओं को समझना जरूरी है। डिजिटल डिटॉक्स और ओपन कम्युनिकेशन ही समाधान है।"क्या करें अभिभावक?बच्चों के मोबाइल उपयोग पर समय सीमा लगाएं।
गेम ऐप्स पर पैरेंटल कंट्रोल एक्टिव करें।
अगर लत के लक्षण दिखें, तो काउंसलर से सलाह लें।
परिवार में बातचीत को प्राथमिकता दें, न कि सजा को।