चित्तौड़गढ़ एसिड अटैक केस: मां-बेटी पर तेजाब फेंकने वाले को उम्रकैद, कोर्ट बोली—यह हमला सपनों को भी जला देता है

चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन पर मां-बेटी पर तेजाब फेंकने के मामले में अजमेर कोर्ट ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। हमले में 12 साल की बच्ची की एक आंख की रोशनी चली गई। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि तेजाब हमला सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि पीड़ित के सपनों और भविष्य को भी जला देता है।

Mar 25, 2026 - 18:55
चित्तौड़गढ़ एसिड अटैक केस: मां-बेटी पर तेजाब फेंकने वाले को उम्रकैद, कोर्ट बोली—यह हमला सपनों को भी जला देता है

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन पर मां-बेटी पर तेजाब फेंकने के सनसनीखेज मामले में अजमेर की महिला उत्पीड़न कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस हमले में 12 साल की बच्ची की एक आंख की रोशनी चली गई, जबकि दूसरी आंख से भी उसे कम दिखाई देता है। कोर्ट ने आरोपी पर 2 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

मामला 25-26 अप्रैल 2025 का है, जब मध्य प्रदेश की एक महिला अपनी 12 साल की बेटी और परिवार के साथ धार्मिक यात्रा पर आई थी। अजमेर से चित्तौड़गढ़ पहुंचने के बाद परिवार रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर रुका हुआ था। अगले दिन सुबह मां-बेटी टॉयलेट के लिए प्लेटफॉर्म से आगे करीब 200 मीटर दूर पटरी के पास झाड़ियों में गई थीं।

इसी दौरान आरोपी मोहम्मद इस्माइल वहां पहुंचा। बच्ची ने उसे अपनी ओर बढ़ते देख रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने बोतल में रखा तेजाब निकालकर सीधे उसके चेहरे पर फेंक दिया। बच्ची की मां जब उसे पकड़ने के लिए दौड़ी, तो आरोपी ने उस पर भी तेजाब फेंक दिया और मौके से फरार हो गया।घटना के बाद दोनों को तुरंत चित्तौड़गढ़ के अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस हमले ने बच्ची की जिंदगी पर गहरा असर डाला—उसकी एक आंख की रोशनी चली गई और दूसरी भी कमजोर हो गई।

मामले की जांच जीआरपी थाना पुलिस ने की। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान की गई और उसे मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया, जिसके बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई।सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 17 गवाह और 57 दस्तावेज पेश किए। साथ ही घटना की डिजिटल रिकॉर्डिंग और एफएसएल रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत की गई, जिसमें घटनास्थल से मिली बोतल और पीड़िता के कपड़ों पर हाइड्रोक्लोरिक एसिड की पुष्टि हुई।

बुधवार को फैसला सुनाते हुए जज उत्तमा माथुर ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चित्तौड़गढ़ को पीड़ित मां-बेटी को एक-एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की अनुशंसा भी की।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लक्ष्मी बनाम भारत संघ (2014) केस का हवाला देते हुए कहा कि तेजाब हमला केवल शरीर को नहीं, बल्कि पीड़ित के भविष्य, सपनों और पूरे परिवार को भी झुलसा देता है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि ऐसे अपराधियों को सख्त सजा देना जरूरी है, ताकि समाज में भय बना रहे और महिलाओं व बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.