बाड़मेर: टांके में पानी भरते समय फिसला पैर, 64 वर्षीय विवाहित महिला की डूबने से दर्दनाक मौत

बाड़मेर के जूना लखारा गांव में 64 वर्षीय गवरी देवी पशुओं के लिए टांके से पानी निकालते समय फिसलकर गहरे पानी में गिर गईं और डूबने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों ने निकाला लेकिन तब तक जान जा चुकी थी।

Nov 24, 2025 - 15:39
बाड़मेर: टांके में पानी भरते समय फिसला पैर, 64 वर्षीय विवाहित महिला की डूबने से दर्दनाक मौत

बाड़मेर, 24 नवंबर 2025 : राजस्थान के बाड़मेर जिले के चौहटन थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना ने ग्रामीण इलाकों में पानी के संकट और सुरक्षा की कमी को एक बार फिर उजागर कर दिया है। जूना लखारा गांव में रविवार की शाम एक 64 वर्षीय विवाहित महिला टांके से पानी निकालते समय फिसल गई और गहरे पानी में डूब गई। परिजनों ने उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। यह हादसा न केवल परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि स्थानीय स्तर पर टैंकों और कुओं की सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर रहा है।

घटना का विवरण: एक साधारण काम का दुखद अंत जानकारी के अनुसार, मृतका गवरी पत्नी प्रभु राम (उम्र 64 वर्ष) लखारा गांव की निवासी थीं। वे एक साधारण ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखती थीं, जहां कृषि और पशुपालन मुख्य आजीविका के स्रोत हैं। रविवार की दोपहर लगभग 4 बजे, गवरी अपने खेत में बने पारंपरिक टांके (एक गहरा जल संग्रहण स्थल) पर पहुंचीं। सूखे के कारण भूजल स्तर नीचे होने से टांके ही गांववासियों का प्रमुख जल स्रोत बने हुए हैं। गवरी अपने घर के खींचकर (एक प्रकार की धातु की बाल्टी या कंटेनर) से टांके का पानी निकाल रही थीं, ताकि अपने पशुओं को पिला सकें।आंखों देखा हाल बताने वाले ग्रामीणों के मुताबिक, टांके का किनारा कीचड़ भरा और फिसलन भरा था। संभवतः मानसून के बाद बची हुई नमी और धूल-मिट्टी के मिश्रण ने सतह को जटिल बना दिया था। गवरी ने जैसे ही खींचकर को पानी से भरा और ऊपर खींचने की कोशिश की, उनका पैर फिसल गया। वे सीधे टांके के गहरे पानी में जा गिरीं। टांके की गहराई करीब 10-12 फीट बताई जा रही है, और पानी का स्तर भी पर्याप्त था। चीख-पुकार सुनकर आसपास के परिजन और ग्रामीण दौड़े, लेकिन डूबने की प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो चुकी थी।परिजनों ने किसी तरह रस्सी और लाठियों की मदद से गवरी को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। स्थानीय चिकित्सकों ने मौके पर पहुंचकर उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में इसे पूरी तरह दुर्घटना ही बताया जा रहा है, कोई संदिग्ध परिस्थिति नहीं पाई गई।

परिवार का शोक: जीवन भर की साथी का अंतिम सफर गवरी के पति प्रभु राम (उम्र 68 वर्ष) का रो-रोकर बुरा हाल है। वे एक बुजुर्ग किसान हैं, जो अब अकेले पड़ चुके हैं। परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं, जो नजदीकी गांवों में रहते हैं। बेटे ने बताया, "मां रोजाना पशुओं का ध्यान रखती थीं। आज शाम वे थोड़ी देर के लिए खेत गईं, लेकिन लौटीं ही नहीं। जब हम पहुंचे, तो सब कुछ खत्म हो चुका था।" परिवार ने मांग की है कि टांकों पर रेलिंग या सुरक्षा उपाय किए जाएं, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।गांव के सरपंच ने कहा, "यह गांव सूखाग्रस्त क्षेत्र में है। टांके हमारी लाइफलाइन हैं, लेकिन रखरखाव की कमी से खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन से मांग है कि जल संरक्षण के साथ-साथ सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाए।" स्थानीय एनजीओ 'जल जिंदगी' के कार्यकर्ता ने भी इस घटना को जल संकट से जोड़ते हुए जागरूकता अभियान चलाने की बात कही।

व्यापक संदर्भ: राजस्थान में बढ़ते जल दुर्घटनाएं यह घटना राजस्थान के पश्चिमी इलाकों में बढ़ती जल संबंधी दुर्घटनाओं की एक कड़ी है। बाड़मेर जैसे जिले, जहां औसत वार्षिक वर्षा मात्र 200-300 मिमी है, वहां टांके, कुएं और बावड़ियां जीवन रेखा हैं। लेकिन फिसलन, अंधेरा या बच्चों की लापरवाही से होने वाली ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में बाड़मेर-जालौर संभाग में जल दुर्घटनाओं में 20 से अधिक मौतें दर्ज हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी योजनाओं जैसे 'मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान' के तहत टैंकों पर सुरक्षा जाल, सीढ़ियां और चेतावनी संकेत लगाए जाने चाहिए।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.