बाड़मेर कोर्ट ने रेप प्रयास के आरोपी को 7 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई: 36 हजार रुपये का अर्थदंड, 7 साल बाद पीड़िता को मिला न्याय
बाड़मेर जिला एवं सत्र न्यायालय ने 22 अगस्त 2018 की रात घर में जबरन घुसकर एक महिला के साथ मारपीट कर बलात्कार का प्रयास करने वाले आरोपी पीराराम को 7 वर्ष के कठोर कारावास तथा 36,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। पीड़िता के पति सूरत में मजदूरी कर रहे थे, विरोध पर आरोपी ने गला दबाया; देवर के पहुंचने पर आरोपी भाग गया। लगभग 7 साल बाद न्यायाधीश अजिताभ आचार्य ने फैसला सुनाया, जिससे महिलाओं की सुरक्षा पर सख्त संदेश गया।
बाड़मेर, राजस्थान: जिला एवं सत्र न्यायालय, बाड़मेर ने एक गंभीर मामले में आरोपी को सख्त सजा सुनाते हुए न्याय की मिसाल पेश की है। कोर्ट ने घर में जबरन घुसकर एक महिला के साथ मारपीट करने और बलात्कार (रेप) का प्रयास करने के आरोपी पीराराम को 7 वर्ष का कठोर कारावास तथा 36,000 रुपये का अर्थदंड सुनाया है। यह फैसला न्यायाधीश अजिताभ आचार्य ने बुधवार को सुनाया, जिसमें दोनों पक्षों के वकीलों के तर्क सुनने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया गया।
घटना का विवरण
घटना 22 अगस्त 2018 की रात की है। पीड़िता महिला ने बाड़मेर महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उस समय उसका पति मजदूरी के सिलसिले में सूरत (गुजरात) गया हुआ था। रात में आरोपी पीराराम ने जबरदस्ती महिला के घर में घुसपैठ की और उसके साथ बलात्कार करने का प्रयास किया।
जब महिला ने विरोध किया तो आरोपी ने उसका गला दबाया और मारपीट की। महिला के चिल्लाने पर उसका देवर मौके पर पहुंच गया। देवर के आने पर आरोपी डरकर मौके से फरार हो गया।पीड़िता ने तुरंत महिला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इनमें रेप का प्रयास, मारपीट, घर में घुसपैठ और अन्य संबंधित धाराएं शामिल थीं। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी पीराराम को गिरफ्तार कर लिया था।
कोर्ट की कार्यवाही और फैसला
मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय में लंबे समय तक चली। लोक अभियोजक दामोदर कुमार चौधरी ने अभियोजन पक्ष की ओर से मजबूत दलीलें पेश कीं। दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश अजिताभ आचार्य ने आरोपी को दोषी ठहराया।कोर्ट ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए कुल 7 वर्ष का कठोर कारावास (rigorous imprisonment) सुनाया। साथ ही 36,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यदि आरोपी अर्थदंड नहीं चुकाता, तो अतिरिक्त सजा का प्रावधान भी है (हालांकि विवरण में स्पष्ट नहीं)।
पीड़िता को 7 साल बाद न्याय
यह मामला 2018 का है और फैसला 2025 या उसके आसपास (खबर के संदर्भ में हालिया) आया है, यानी पीड़िता को लगभग 7 साल बाद न्याय मिला है। ऐसे मामलों में न्याय मिलने में देरी आम बात है, लेकिन इस फैसले से महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सख्ती का संदेश जाता है।