बंगाल में ‘सियासी’ रामनवमी: BJP-हिंदू संगठन 5 दिन निकालेंगे जुलूस, TMC भी एक्टिव—बोली ‘राम सबके’

आसनसोल में रामनवमी को लेकर BJP और TMC आमने-सामने हैं। जहां BJP अत्याचार का मुद्दा उठाएगी, वहीं TMC अस्त्रहीन रैली निकालेगी।

Mar 26, 2026 - 14:27
बंगाल में ‘सियासी’ रामनवमी: BJP-हिंदू संगठन 5 दिन निकालेंगे जुलूस, TMC भी एक्टिव—बोली ‘राम सबके’
बंगाल में ‘सियासी’ रामनवमी: BJP-हिंदू संगठन 5 दिन निकालेंगे जुलूस, TMC भी एक्टिव—बोली ‘राम सबके’

पश्चिम बंगाल के Asansol में रामनवमी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन इस बार धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सियासत भी चरम पर नजर आ रही है। 27 मार्च को होने वाले Ram Navami के मौके पर यहां 5 दिनों तक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

Bharatiya Janata Party (BJP) ने इस दौरान हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचार का मुद्दा उठाने की योजना बनाई है। पार्टी बांग्लादेश में दीपू दास और मुर्शिदाबाद में हरिगोबिंद दास व उनके बेटे चंदन की हत्या जैसे मामलों को प्रमुखता से उठाएगी।

वहीं, All India Trinamool Congress (TMC) भी पीछे नहीं है। पार्टी हुगली में ‘अस्त्रहीन संकीर्तन रैली’ निकालने जा रही है। TMC का कहना है कि “जय श्री राम” का नारा किसी एक पार्टी का नहीं हो सकता।

आसनसोल का जिक्र इसलिए अहम है क्योंकि यहां 2018 में रामनवमी के दौरान हिंसा भड़क गई थी। रानीगंज और आसनसोल में 100 से ज्यादा दुकानें और घर जला दिए गए थे, तीन लोगों की मौत हुई थी और हालात काबू में लाने के लिए कर्फ्यू लगाना पड़ा था।

इस बार भी राज्य में करीब 20 हजार शोभायात्राएं और जुलूस निकलने का अनुमान है, जिससे प्रशासन के लिए सुरक्षा व्यवस्था बड़ी चुनौती बनी हुई है।

पश्चिम बंगाल में पिछले 12 वर्षों से RSS, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन रामनवमी पर रैलियां निकालते आ रहे हैं। अब इन आयोजनों में राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी भी बढ़ गई है, हालांकि रैलियों में पार्टी के झंडे नहीं होते।

आसनसोल साउथ की विधायक और BJP की वाइस प्रेसिडेंट Agnimitra Paul के अनुसार, इस बार बर्नपुर, चित्रा मोड़, राधानगर, बल्लावपुर, मोशिला, काली पहाड़ी और एगरा जैसे इलाकों में रैलियां निकाली जाएंगी, जिनमें 10 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन चुनाव से ज्यादा लोगों पर हो रहे अत्याचार के मुद्दे को उठाने के लिए किया जा रहा है।

रामनवमी के मौके पर बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों और आगामी चुनावों को देखते हुए यह साफ है कि पश्चिम बंगाल में यह त्योहार इस बार सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक परीक्षा भी बन गया है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground