अलवर-भिवाड़ी: 1 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले में आरोपी को आजीवन कारावास
राजस्थान के अलवर-भिवाड़ी में 13 सितंबर 2025 को 1 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा- ऐसे अपराधी को समाज में जीने का कोई अधिकार नहीं।
घटना का विवरण: 13 सितंबर 2025 को राजस्थान के अलवर जिले के भिवाड़ी क्षेत्र में फूल बाग थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। एक 1 साल की मासूम बच्ची के साथ उसके परिचित एक व्यक्ति ने दुष्कर्म किया। आरोपी ने बच्ची को अकेला पाकर उसका शोषण किया, जिससे बच्ची की हालत गंभीर हो गई। बच्ची को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके चोटों की पुष्टि की। यह मामला स्थानीय समुदाय में आक्रोश का विषय बन गया, और पुलिस ने तुरंत आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी का पृष्ठभूमि: आरोपी की पहचान अभी गोपनीय रखी गई है, लेकिन खबरों के अनुसार वह बच्ची के परिवार का परिचित था। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है, हालांकि यह पहला ऐसा मामला है जो दर्ज हुआ। आरोपी ने पूछताछ के दौरान अपना अपराध कबूल कर लिया।
कोर्ट कार्यवाही: मामले की सुनवाई अलवर जिला एवं सत्र न्यायालय में हुई। विशेष अदालत (पॉक्सो कोर्ट) ने 2 दिसंबर 2025 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(3) (बच्चों के साथ दुष्कर्म) और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत सजा का फैसला किया। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि आरोपी को 50,000 रुपये का जुर्माना भी भरना होगा, जो पीड़ित बच्ची के इलाज और पुनर्वास के लिए उपयोग किया जाएगा।
न्यायाधीश की टिप्पणी: कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कड़ी टिप्पणी की। न्यायाधीश ने कहा, "ऐसे व्यक्ति को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। यह अपराध न केवल पीड़ित बच्ची का जीवन बर्बाद करने वाला है, बल्कि पूरे समाज के लिए खतरा है। ऐसे अपराधियों को कठोरतम सजा देकर ही निवारण संभव है।" अदालत ने मामले को तेजी से निपटाने के लिए पुलिस और अभियोजन पक्ष की सराहना की, जो POCSO मामलों में समयबद्ध सुनवाई का उदाहरण है।
पीड़ित बच्ची की स्थिति: घटना के बाद बच्ची को अलवर के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। चिकित्सकों के अनुसार, बच्ची को गंभीर चोटें आई थीं, लेकिन समय पर इलाज से वह अब खतरे से बाहर है। परिवार ने बताया कि बच्ची धीरे-धीरे ठीक हो रही है, लेकिन मानसिक आघात गहरा है। राज्य बाल आयोग ने परिवार को सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।