MP राज्यसभा चुनाव में 'महा-संग्राम': भोपाल में दिग्गजों का उपवास, चुनाव दफ्तर पर टांगी RSS की ड्रेस; दिल्ली दरबार पहुंचे राहुल के 10 सूरमा!
मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद बवाल चरम पर है। भोपाल में दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं, तो वहीं यूथ कांग्रेस ने चुनाव दफ्तर के बाहर RSS की ड्रेस टांगकर नया विवाद खड़ा कर दिया है।
मध्य प्रदेश की राज्यसभा राजनीति में शुरू हुआ विवाद अब एक बेहद आक्रामक और नाटकीय मोड़ ले चुका है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन (नॉमिनेशन) रद्द होने के बाद से पूरी कांग्रेस सड़क पर उतर आई है। इसे कांग्रेस ने सीधे-सीधे "लोकतंत्र की हत्या" और "सीट चोरी" करार दिया है।
बुधवार सुबह इस विवाद ने उस वक्त एक नया मोड़ ले लिया, जब भोपाल में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) दफ्तर के बाहर पहुंचे यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने गेट बंद मिलने पर वहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गणवेश (ड्रेस) टांग दी और वापस लौट गए।
10 पॉइंट में समझिए: आखिर क्या है मीनाक्षी नटराजन का यह पूरा विवाद?
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नहीं है कोई FIR: भाजपा ने जिस मामले का हवाला देकर पर्चा रद्द करवाया है, उसमें मीनाक्षी नटराजन किसी एफआईआर (FIR) में आरोपी नहीं हैं।
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2022 का पुराना मामला: यह पूरा विवाद साल 2022 के एक मामले से जुड़ा है, जिसमें एक महिला ने कांग्रेस नेता कुंभम शिवा कुमार रेड्डी पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था।
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लापरवाही का आरोप: महिला का आरोप था कि शिकायत के बावजूद कांग्रेस आलाकमान ने शिवा कुमार रेड्डी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
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मीनाक्षी का नाम कैसे आया?: महिला के अनुसार, उसने तत्कालीन तेलंगाना प्रभारी होने के नाते मीनाक्षी नटराजन से भी इसकी शिकायत की थी।
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पार्टी संविधान का हवाला: आरोप लगाया गया कि पार्टी संविधान में नियम होने के बावजूद नटराजन ने आरोपी नेता पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की।
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भाजपा की आपत्ति: भाजपा का दावा था कि अदालत में लंबित इस निजी याचिका (परिवाद) में मीनाक्षी का नाम है, इसलिए चुनावी हलफनामे (फॉर्म 26) में इसकी जानकारी देना जरूरी था।
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कांग्रेस का पलटवार: कांग्रेस का कहना है कि यह कोई आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि एक निजी शिकायत है। कोर्ट से केवल एक नोटिस/समन मिला था, जिसका जवाब दिया जा चुका था, इसलिए इसे घोषित करना अनिवार्य नहीं था।
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RO का बड़ा फैसला: रिटर्निंग ऑफिसर (RO) अर्पित शर्मा ने माना कि 17 सितंबर 2025 को कोर्ट से समन जारी होने के कारण मामला 'सक्रिय' था। इसे छिपाने के कारण हलफनामा अधूरा माना गया और नामांकन खारिज कर दिया गया।
भोपाल में दिग्विजय-जीतू का उपवास, दिल्ली में वेणुगोपाल-पायलट का मोर्चा
इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने चौतरफा मोर्चा खोल दिया है:
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भोपाल में सामूहिक उपवास: भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और अरुण यादव जैसे तमाम बड़े दिग्गज हाथों में संविधान की प्रति लेकर और काली पट्टी बांधकर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।
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दिल्ली में चुनाव आयोग का घेराव: दिल्ली में केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश के नेतृत्व में कांग्रेस का 10 सदस्यीय हाई-प्रोफाइल प्रतिनिधिमंडल भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के दफ्तर पहुंच चुका है। इस डेलिगेशन में सचिन पायलट, रणदीप सुरजेवाला, भूपेश बघेल और विवेक तन्खा जैसे दिग्गज वकील और नेता शामिल हैं।
"हम इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे। यह पूरी तरह से राजनीतिक दुर्भावना और भाजपा के दबाव में लिया गया पक्षपाती फैसला है।" > — जीतू पटवारी, प्रदेशाध्यक्ष, एमपी कांग्रेस
रनवे से लौट आया था विधायकों का विमान: मंगलवार का हाई-वोल्टेज ड्रामा
इस विवाद के पीछे मंगलवार को जो ड्रामा हुआ, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं था:
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दोपहर 11 से 2 बजे: क्रॉस वोटिंग के डर से कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को 75 सीटर चार्टर्ड प्लेन से बेंगलुरु शिफ्ट करने का फैसला किया। इसी बीच बीजेपी नेता विधानसभा पहुंचे और मीनाक्षी के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी।
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शाम 4:30 से 6:30 बजे: कड़ी मशक्कत के बाद जैसे ही कांग्रेस के 38 विधायकों को लेकर विमान रनवे पर दौड़ा और उड़ने ही वाला था, ठीक उसी वक्त (शाम 6:30 बजे) रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी का नामांकन रद्द करने का आदेश जारी कर दिया।
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विमान यू-टर्न: आदेश आते ही विधायकों का विमान रनवे से वापस लौट आया और बेंगलुरु जाने का प्लान फेल हो गया। इसके बाद बीजेपी दफ्तर में जश्न शुरू हो गया।
बीजेपी का तंज: "क्रॉस वोटिंग के डर से खुद फॉर्म गलत भरा"
इधर, मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा है कि कांग्रेस के 20 से 25 विधायक क्रॉस-वोटिंग करने वाले थे। अपनी साख बचाने के लिए कांग्रेस ने जानबूझकर अपने वकीलों और लीगल सेल के होते हुए भी हलफनामे में गड़बड़ी की, ताकि फॉर्म खुद-ब-खुद रिजेक्ट हो जाए और उन्हें चुनाव न लड़ना पड़े।
फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली से भोपाल तक कानूनी और राजनीतिक जंग छिड़ चुकी है। कांग्रेस अब इस मामले को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।