कोटा के बाद अब बीकानेर में फूटा 'ऑक्सीटोसिन' का बम; डिलीवरी के बाद 6 माताओं की किडनी फेल, ICU में चल रहा डायलिसिस!
राजस्थान के बीकानेर स्थित पीबीएम अस्पताल में प्रसव के बाद 6 प्रसूताओं की किडनी फेल होने से हड़कंप मच गया है। कोटा के बाद बीकानेर में भी इस महा-लापरवाही के पीछे उसी 'ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन' का नाम आ रहा है।
राजस्थान के कोटा में नकली इंजेक्शन से 5 प्रसूताओं की मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब बीकानेर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल (PBM) से ऐसा ही एक खौफनाक मामला सामने आया है। यहां सिजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन) के बाद एक-एक कर 6 प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई। सभी पीड़ित महिलाएं इस वक्त अस्पताल के आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं और उनका लगातार डायलिसिस किया जा रहा है।
इस भयंकर मामले के सामने आते ही मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने संज्ञान लेते हुए मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल से तुरंत विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
क्या फिर 'ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन' ने बिगाड़ा खेल?
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने स्वीकार किया है कि डिलीवरी के बाद इन प्रसूताओं को बाजार से आपातकालीन खरीद के तहत मंगवाए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाए गए थे, जिसके बाद ही महिलाओं की तबीयत बिगड़ने लगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इंजेक्शन में ही खराबी थी, लेकिन इसकी संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता।
इंजेक्शन के बाद क्या हुआ?: तीमारदारों और डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे के जन्म के करीब 2 घंटे बाद तक सब सामान्य था, लेकिन अचानक महिलाओं को अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) शुरू हो गया। इसके बाद उनकी किडनी पर सीधा असर पड़ा। भर्ती मरीजों में से प्रीति नाम की प्रसूता का अब तक 13 बार डायलिसिस हो चुका है और उसके बच्चे की भी मौत हो चुकी है। वहीं तारा देवी, शारदा, राहिला और इमरती का 3-3 बार डायलिसिस किया जा चुका है।
OT और ICU में मिला भयंकर इन्फेक्शन, प्रशासन की थ्योरी पर सवाल
जांच में एक और डरावना सच सामने आया है। जिन ऑपरेशन थिएटर (OT) और आईसीयू में इन महिलाओं की डिलीवरी और इलाज हुआ, वहां गंभीर संक्रमण (Infection) पाया गया है। मामला बढ़ने पर अस्पताल ने आनन-फानन में ओटी को बंद कर वहां फॉगिंग और सफाई करवाई है।
अस्पताल का दावा है कि उन्हें 2 जून को ही अंदेशा हो गया था और उन्होंने 3 जून से उस बैच के इंजेक्शन का इस्तेमाल बंद कर दिया था। लेकिन मरीजों के परिजनों की गवाही इस दावे की पोल खोलती है। एक प्रसूता शारदा की जेठानी माया देवी का कहना है कि उनकी मरीज का ऑपरेशन 4 जून को हुआ था, यानी अस्पताल के दावे के बाद भी वह इंजेक्शन या संक्रमित ओटी इस्तेमाल की जा रही थी।
7 दिन तक सोता रहा अस्पताल प्रशासन, अब बनीं कमेटियां
अस्पताल को 2 जून को ही इस खतरे के संकेत मिल चुके थे, लेकिन इसके बावजूद जांच कमेटी बनाने में 7 दिन की देरी की गई। तब तक 6 महिलाएं डायलिसिस पर पहुंच चुकी थीं। अब चौतरफा दबाव के बाद प्रशासन ने 2 अलग-अलग कमेटियां गठित की हैं, जिसमें गाइनेकोलॉजिस्ट, फिजिशियन और ड्रग कंट्रोलर शामिल हैं। ड्रग विभाग की टीम ने इंजेक्शन के सैंपल ले लिए हैं।
कोटा और बीकानेर की कड़ियां आपस में जुड़ीं
यह मामला हूबहू कोटा मेडिकल कॉलेज जैसा ही है, जहां ऑक्सीटोसिन के चलते प्रसूताओं की मौत हुई थी। हालांकि बीकानेर में दूसरी कंपनी का इंजेक्शन इस्तेमाल हुआ था, लेकिन दोनों जगह मरीजों में एक जैसे लक्षण (ब्लीडिंग और किडनी फेलियर) मिलने से पूरी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में हड़कंप मच गया है। अस्पताल अधीक्षक ने साफ किया है कि यदि जांच में किसी भी डॉक्टर या स्टाफ की लापरवाही मिलती है, तो उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।