हवाई यात्रियों के लिए सरकार का बड़ा फैसला; अब अचानक सस्ता होगा सफर या जेब पर गिरेगी बिजली?

जेट फ्यूल को लेकर सरकार एक ऐसी नई स्कीम लाई है जिसने एयरलाइंस कंपनियों के होश उड़ा दिए हैं। जानिए क्या अब आपकी फ्लाइट टिकट आधी कीमत पर मिलेगी या सफर करना सपना हो जाएगा?

Jun 10, 2026 - 10:55
हवाई यात्रियों के लिए सरकार का बड़ा फैसला; अब अचानक सस्ता होगा सफर या जेब पर गिरेगी बिजली?

नई दिल्ली: देश में हवाई सफर करने वाले यात्रियों और घाटे से जूझ रही घरेलू एयरलाइंस कंपनियों के लिए केंद्र सरकार एक नई राहत भरी योजना लेकर आई है। सरकार ने 'प्राइस स्टेबलाइजेशन स्कीम' (मूल्य स्थिरीकरण योजना) की शुरुआत की है। इस नई व्यवस्था के तहत अब घरेलू एयरलाइंस कंपनियां अगले तीन साल तक के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF यानी जेट ईंधन) की कीमतें फिक्स (तय) कर सकती हैं।

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर एयरलाइंस कंपनियों पर नहीं पड़ेगा।

फिक्स रेट चुनने पर कितना देना होगा दाम?

सरकारी फ्यूल रिटेलर्स ने हाल ही में जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। नई व्यवस्था के तहत जो भी एयरलाइंस कंपनी इस स्वैच्छिक (ऑप्शनल) योजना को चुनेगी, उसे 3 साल के लॉक-इन पीरियड के दौरान 115 रुपये प्रति लीटर की तय कीमत चुकानी होगी। आपको बता दें कि इससे पहले यह तय कीमत 104.927 रुपये प्रति लीटर थी।

स्कीम से बाहर रहने पर क्या होगा नुकसान और फायदा?

सूत्रों के मुताबिक, सरकार की यह स्कीम पूरी तरह से वैकल्पिक है। यानी कोई भी एयरलाइंस कंपनी अपनी मर्जी से इसमें शामिल होने या बाहर रहने का फैसला कर सकती है।

  • बाहर रहने पर मौजूदा रेट: जो एयरलाइंस इस फ्रेमवर्क से बाहर रहेंगी, उन्हें बाजार की मौजूदा दरों (Market Linked Rates) पर ही ईंधन खरीदना होगा। फिलहाल बाजार में जेट फ्यूल का रेट लगभग 142 रुपये प्रति लीटर है, जो इंटरनेशनल एयरलाइंस द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों के बराबर है।

  • जोखिम और फायदा: इस स्कीम से बाहर रहने वाली कंपनियों को फायदा तब होगा जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें घटेंगी। लेकिन अगर इंटरनेशनल मार्केट में दाम बढ़ते हैं, तो बढ़ी हुई कीमतों का पूरा बोझ सीधे एयरलाइंस पर आएगा, जिससे हवाई टिकटें भी महंगी हो सकती हैं।

कंपनियों के पास बड़ा मौका

इस नई नीति से जो एयरलाइंस 115 रुपये प्रति लीटर का फिक्स रेट चुनेंगी, वे बाजार के मौजूदा 142 रुपये के रेट के मुकाबले प्रति लीटर भारी बचत कर पाएंगी। इससे कंपनियों को अपना बजट और टिकटों के दाम तय करने में काफी स्थिरता मिलेगी। अब देखना यह है कि देश की बड़ी एयरलाइंस कंपनियां इस योजना को अपनाती हैं या बाजार के भरोसे ही आगे बढ़ती हैं।

Kashish Sain Bringing truth from the ground राजस्थान और देश-दुनिया की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें सरल और प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत करना, ताकि हर पाठक तक सही जानकारी समय पर पहुँच सके।