मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर ने HOD पर लगाए मानसिक प्रताड़ना के आरोप, जांच शुरू

पाली के सरकारी मेडिकल कॉलेज में कार्यरत एक महिला डॉक्टर ने अपने विभागाध्यक्ष (HOD) पर मानसिक प्रताड़ना और लगातार परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉक्टर का कहना है कि लगातार दबाव और नोटिसों के कारण वह डिप्रेशन का शिकार हो गईं और उन्हें छुट्टी तक लेनी पड़ी। मामले की शिकायत कॉलेज प्रबंधन ने राजमेस को भेज दी है और जांच जारी है।

Jun 9, 2026 - 12:55
मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर ने HOD पर लगाए मानसिक प्रताड़ना के आरोप, जांच शुरू

राजस्थान के पाली स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर द्वारा अपने ही विभागाध्यक्ष (HOD) के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना की शिकायत किए जाने के बाद चिकित्सा जगत में चर्चा का माहौल बन गया है। महिला डॉक्टर ने आरोप लगाया है कि विभागाध्यक्ष पिछले करीब एक वर्ष से लगातार उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर रहे हैं, जिसके चलते उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हुई और वह डिप्रेशन का शिकार हो गईं।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज प्रशासन ने शिकायत की रिपोर्ट राजस्थान चिकित्सा शिक्षा सोसायटी (राजमेस) को भेज दी है। वहीं शिकायत की जांच के लिए आंतरिक समिति का गठन कर दिया गया है।

एक साल से प्रताड़ना का आरोप

महिला डॉक्टर ने अपनी लिखित शिकायत में कहा है कि विभागाध्यक्ष पिछले लगभग एक साल से उन्हें विभिन्न तरीकों से परेशान कर रहे हैं। उनके अनुसार बीते छह महीनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो गई, जब उन्हें बार-बार नोटिस जारी किए जाने लगे और कार्य से संबंधित मामलों में लगातार दबाव बनाया जाने लगा।

डॉक्टर का आरोप है कि लगातार मानसिक तनाव और कार्यस्थल पर उत्पन्न दबाव के कारण उनकी मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ा और वे अवसाद (डिप्रेशन) की शिकार हो गईं।

नौकरी छोड़ने तक का बना मन

शिकायत में महिला डॉक्टर ने उल्लेख किया है कि मानसिक प्रताड़ना का स्तर इतना बढ़ गया था कि एक समय उन्होंने नौकरी छोड़ने तक का विचार बना लिया था। लगातार तनाव और मानसिक दबाव के चलते उन्हें कुछ समय के लिए अवकाश पर भी जाना पड़ा।

डॉक्टर का कहना है कि कार्यस्थल पर अनुकूल वातावरण नहीं मिलने और वरिष्ठ अधिकारी के व्यवहार से उनके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन दोनों प्रभावित हुए हैं।

मेडिकल स्टूडेंट्स को भी परेशान करने का आरोप

महिला डॉक्टर ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि विभागाध्यक्ष केवल उन्हें ही नहीं बल्कि उनके अधीन रिसर्च कार्य कर रहे मेडिकल विद्यार्थियों को भी परेशान करते हैं।

शिकायत के अनुसार रिसर्च गतिविधियों में शामिल छात्रों को भी अनावश्यक दबाव और प्रतिकूल व्यवहार का सामना करना पड़ता है। इससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक माहौल पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

कॉलेज प्रबंधन ने बनाई जांच समिति

मामले की जांच कर रहे अधिकारी ने बताया कि यह शिकायत कॉलेज की हैरेसमेंट कमेटी की बैठक के दौरान सामने आई थी। शिकायत मिलने के बाद संस्थान स्तर पर एक आंतरिक जांच समिति का गठन किया गया, जिसने पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट तैयार की है।

यह रिपोर्ट राजस्थान चिकित्सा शिक्षा सोसायटी (राजमेस) के निदेशक को भेज दी गई है। अब राजमेस स्तर पर रिपोर्ट का परीक्षण किया जाएगा और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

जांच रिपोर्ट के बाद होगा फैसला

फिलहाल मामले में किसी भी पक्ष को दोषी नहीं ठहराया गया है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी निष्पक्षता के साथ की जा रही है। जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक प्रशासनिक और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने सरकारी चिकित्सा संस्थानों में कार्यस्थल के माहौल, महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Web Desk Web Desk The Khatak