दवा के नाम पर मौत का इंजेक्शन! कोटा अस्पताल मामले की जांच रिपोर्ट में हुआ ऐसा खौफनाक खुलासा, जिसे छिपा रही थी सरकार!

राजस्थान के कोटा से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। न्यू मेडिकल अस्पताल में डिलीवरी के बाद जिन 5 महिलाओं की मौत हुई थी, उसकी जांच रिपोर्ट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। जानिए जीवन रक्षक दवा के नाम पर अस्पताल में क्या खेल चल रहा था...

Jun 10, 2026 - 14:38
दवा के नाम पर मौत का इंजेक्शन! कोटा अस्पताल मामले की जांच रिपोर्ट में हुआ ऐसा खौफनाक खुलासा, जिसे छिपा रही थी सरकार!

राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन) के बाद पांच प्रसूताओं (माताओं) की अचानक हुई मौत के मामले में एक ऐसा चौंकाने वाला और खौफनाक खुलासा हुआ है, जिसने पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस मामले की आई अंतिम जांच रिपोर्ट में यह साफ हो गया है कि महिलाओं की मौत किसी बीमारी से नहीं, बल्कि अस्पताल में लगाए गए नकली ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन की वजह से हुई थी।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, जो इंजेक्शन महिलाओं को जीवन बचाने के लिए लगाया गया था, उसमें दवा की जगह सिर्फ पानी भरा हुआ था। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद 'आजतक' की उस शुरुआती खबर पर भी मुहर लग गई है, जिसमें नकली इंजेक्शन को ही इन मौतों के लिए जिम्मेदार बताया गया था।

दवा की जगह पानी होने से नहीं रुक पाया ब्लीडिंग

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ऑक्सीटॉसिन (Oxytocin) एक बेहद महत्वपूर्ण और जीवन रक्षक दवा है। इसका उपयोग प्रसव (डिलीवरी) के दौरान और उसके तुरंत बाद होने वाले भारी रक्तस्राव (ब्लीडिंग) को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि संबंधित बैच के जो इंजेक्शन अस्पताल में सप्लाई किए गए थे, वे मानकों पर पूरी तरह फेल रहे। उनमें दवा का नामोनिशान नहीं था और सिर्फ पानी भरा था। इसके चलते डिलीवरी के बाद महिलाओं का ब्लड लॉस (रक्तस्राव) नियंत्रित नहीं हो सका। दवा का कोई असर न होने के कारण प्रसूताओं की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः पांच महिलाओं ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।

पहले सरकार ने झाड़ लिया था पल्ला

जब यह मामला पहली बार सुर्खियों में आया था, तब स्वास्थ्य विभाग और सरकार की ओर से एक प्रेस नोट जारी कर इस बात को दबाने की कोशिश की गई थी। उस समय प्रशासन ने कहा था कि जांच रिपोर्ट आने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और केवल नकली इंजेक्शन के दावे के आधार पर मौतों की बात नहीं की जा सकती। लेकिन अब जब लैब टेस्टिंग और जांच की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आ चुकी है, तो सरकारी दावों की पूरी तरह हवा निकल गई है।

दवा आपूर्ति व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस खौफनाक खुलासे के बाद अब राजस्थान की दवा आपूर्ति श्रृंखला (Drug Supply Chain) और सरकारी अस्पतालों में आने वाली दवाओं की गुणवत्ता जांच प्रणाली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आम जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर सरकारी अस्पताल के स्टोर तक जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर पानी से भरे नकली इंजेक्शन कैसे पहुंच गए? इस मामले के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों और दवा सप्लायरों पर कानूनी गाज गिरनी तय मानी जा रही है।

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