मजबूर माता-पिता, मासूम बेटियां और 3 करोड़ का बंगला... राजस्थान की इस 'लेडी डॉन' का खौफनाक धंधा देख पुलिस भी रह गई दंग!
राजस्थान के झालावाड़ में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है जो पिछले 15 सालों से गरीब और मजबूर परिवारों की नाबालिग बच्चियों को फुसलाकर खरीदता था
राजस्थान के झालावाड़ में पुलिस ने मानव तस्करी (Human Trafficking) के एक ऐसे खौफनाक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो पिछले डेढ़ दशक से मासूम बच्चियों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा था। इस गिरोह की मुख्य सरगना रामकन्याबाई नाम की महिला है, जो पिछले 15 साल से इस अवैध कारोबार को चला रही थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस घिनौने काम में उसका पति और बेटा भी बराबर के साझेदार थे। पुलिस ने रामकन्याबाई के साथ उसके पति और बेटे सहित गिरोह के 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जब पुलिस ने आरोपी महिला के ठिकाने पर दबिश दी, तो वहां का आलीशान रहन-सहन और ठाठ-बाठ देखकर अधिकारी भी दंग रह गए।
कमजोरी और मजबूरी का फायदा उठाती थी रामकन्याबाई
पुलिस जांच में सामने आया है कि रामकन्याबाई का नेटवर्क राजस्थान के कई जिलों जैसे बूंदी, झालावाड़, टोंक, भीलवाड़ा और सवाई माधोपुर के इलाकों में फैला हुआ था। वह इन जिलों में अपने समाज के डेरों और बस्तियों में घूमकर ऐसे गरीब परिवारों की तलाश करती थी जो भारी कर्ज में डूबे हों।
उसका निशाना मुख्य रूप से वे परिवार होते थे जहां:
माता या पिता में से कोई गंभीर रूप से बीमार या दिव्यांग (अपाहिज) हो।
परिवार का मुखिया या कमाने वाला सदस्य किसी मामले में जेल में बंद हो।
ऐसे लाचार परिवारों के पास जाकर रामकन्याबाई उनका ब्रेनवॉश (मानसिक रूप से प्रभावित) करती थी। वह उन्हें पैसों का लालच देती और बच्चियों को अच्छा काम दिलाने व बेहतर जिंदगी का झांसा देकर अपने साथ ले आती थी।
4-5 साल तक दी जाती थी 'मॉर्डन' बनने की ट्रेनिंग
यह गिरोह बेहद शातिराना और संगठित तरीके से काम करता था। बच्चियों को सीधे नहीं बेचा जाता था, बल्कि इसके पीछे तीन स्तर (Levels) पर दलाल काम करते थे:
पहला स्तर (मजबूरी का फायदा): रामकन्याबाई गरीब परिवारों से बच्चियों को फुसलाकर लाती थी।
दूसरा स्तर (ग्रूमिंग और ट्रेनिंग): इसके बाद दूसरे स्तर के दलाल इन मासूम बच्चियों को अपने कब्जे में लेते थे। यहाँ बच्चियों को 4 से 5 साल तक बाकायदा 'ट्रेनिंग' दी जाती थी। उन्हें आधुनिक (मॉर्डन) लड़कियों की तरह रहना और बोलना सिखाया जाता था। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए उनके शरीर पर टैटू गुदवाए जाते थे, उन्हें महंगे आईफोन और कीमती कपड़े दिए जाते थे ताकि वे दिखने में अमीर और आधुनिक लगें।
तीसरा स्तर (मुंबई के बाजारों में सौदा): जैसे ही बच्ची की उम्र 13 या 14 वर्ष होती थी, उसे मुंबई ले जाया जाता था। वहाँ तीसरे स्तर के बड़े दलालों को इन लड़कियों को बेच दिया जाता था, जो इन्हें जबरन देह व्यापार (Prostitution) के दलदल में धकेल देते थे।
काले धंधे से बनाई 3 करोड़ की प्रॉपर्टी, आईफोन और लग्जरी कारें बरामद
मासूमों की जिंदगी का सौदा करके रामकन्याबाई ने करोड़ों रुपए की काली कमाई की। पुलिस के शुरुआती आकलन के मुताबिक, उसके पास बूंदी के दबलाना में एक आलीशान मकान और शंकरपुरा में सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस एक पक्का बंगला मिला है। इसके अलावा उसके पास से महंगी लग्जरी कारें भी बरामद हुई हैं। इस पूरी अचल संपत्ति की अनुमानित कीमत 2 से 3 करोड़ रुपए आंकी गई है। फिलहाल पुलिस उसके बैंक खातों की डिटेल और रेवेन्यू (जमीन-जायदाद) के रिकॉर्ड खंगाल रही है।
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरोह हर एक बच्ची को बेचकर 5 से 10 लाख रुपए तक कमाता था। लड़कियों की उम्र और दिखावट के हिसाब से सौदे की रकम तय होती थी।
पुलिस की कार्रवाई जारी, 4 और लड़कियां दस्तयाब
झालावाड़ पुलिस इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है। गिरफ्तारी के बाद शनिवार और रविवार को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस गिरोह के चंगुल से चार और नाबालिग लड़कियों को सकुशल दस्तयाब (रेस्क्यू) किया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े मुंबई के दलालों और राजस्थान के अन्य सहयोगियों की तलाश में जगह-जगह छापेमारी कर रही है। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
यह मामला समाज के उस काले सच को उजागर करता है जहां गरीबी का फायदा उठाकर मासूमों के बचपन को बेचा जा रहा था। पुलिस की मुस्तैदी से एक बड़े रैकेट का अंत हुआ है।