9590 लीटर दूध घोटाला: भरतपुर दूध उत्पादक सहकारी लिमिटेड के एमडी डॉ. राजेश नारायण जाट पर गंभीर आरोप, जांच में साबित हुई अनियमितता

भरतपुर दूध सहकारी के एमडी डॉ. राजेश जाट ने 9590 लीटर दूध अवैध रूप से व्हाइट गंगा कंपनी को बेचा, फैट चोरी भी साबित; जांच में रिकॉर्ड गायब, एमडी निलंबित।

Nov 8, 2025 - 11:38
9590 लीटर दूध घोटाला: भरतपुर दूध उत्पादक सहकारी लिमिटेड के एमडी डॉ. राजेश नारायण जाट पर गंभीर आरोप, जांच में साबित हुई अनियमितता

भरतपुर, राजस्थान

: राजस्थान के भरतपुर जिले में दूध उत्पादक सहकारी समिति को हिलाने वाला एक बड़ा घोटाला सामने आया है। भरतपुर दूध उत्पादक सहकारी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) डॉ. राजेश नारायण जाट पर अवैध तरीके से निजी कंपनी व्हाइट गंगा फ्रूट प्राइवेट लिमिटेड को 9,590 लीटर दूध बेचने का आरोप लगा है। सहकारी समिति के निरीक्षक और जांच अधिकारी पवन कुमार की विस्तृत रिपोर्ट में यह अनियमितता पूरी तरह साबित हो चुकी है। इस मामले में न केवल दूध की चोरी का खुलासा हुआ है, बल्कि दूध के वसा (फैट) की चोरी का भी पर्दाफाश हो गया है, जिससे समिति को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

घटना का पूरा विवरण: कैसे हुआ खुलासा?  यह मामला नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान की घटनाओं से जुड़ा है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. राजेश नारायण जाट ने समिति के संसाधनों का दुरुपयोग करते हुए निजी कंपनी व्हाइट गंगा फ्रूट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक को बिना किसी आधिकारिक अनुमति के बड़ी मात्रा में दूध की आपूर्ति की। खास तौर पर 7 दिसंबर 2024 को बेचे गए दूध के नमूने और रिकॉर्ड की जांच के दौरान यह घोटाला पकड़ा गया।सहकारी समिति के प्रयोगशाला रिकॉर्ड में 7 दिसंबर को व्हाइट गंगा फ्रूट को बेचे गए दूध का कोई नमूना या दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिला। यह दूध बिना किसी गुणवत्ता जांच के सीधे कंपनी को डिस्पैच कर दिया गया, जो समिति के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। पवन कुमार की रिपोर्ट में साफ लिखा है कि "दूध के नमूनों की जांच नहीं की गई और न ही कोई रिकॉर्ड रखा गया, जिससे गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर सवाल खड़े हो गए।"

डिस्पैच रिकॉर्ड में गड़बड़ी: 9,590 लीटर दूध का कोई सुराग नहीं जांच के दौरान डिस्पैच रजिस्टर की बारीकी से छानबीन की गई। रिपोर्ट से पता चला कि 27 नवंबर 2024 से 13 दिसंबर 2024 तक के डिस्पैच नंबर 2101 से 2117 के बीच कुल 9,590 लीटर दूध की बिक्री का कोई उल्लेख ही नहीं है। यह दूध आधिकारिक तौर पर समिति के खातों में दर्ज ही नहीं किया गया, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि यह पूरी बिक्री अवैध और गुप्त तरीके से की गई। समिति के अधिकारियों का कहना है कि यह दूध किसानों से एकत्रित किया गया था, जो सीधे सरकारी योजनाओं के तहत उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए था। लेकिन एमडी के इशारे पर इसे निजी कंपनी को सस्ते दामों में बेच दिया गया। अनुमानित नुकसान की गणना करने पर यह सामने आया कि इस घोटाले से समिति को कम से कम 5-7 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है, जिसमें दूध की कीमत के अलावा वसा चोरी का हिस्सा भी शामिल है।

वसा चोरी का अतिरिक्त कोण: गुणवत्ता पर सवाल घोटाले का एक और चौंकाने वाला पहलू दूध की वसा (फैट) की चोरी है। सामान्यतः दूध में 3-4% वसा होती है, जो इसकी कीमत निर्धारित करती है। जांच में पाया गया कि बेचे गए दूध में वसा की मात्रा जानबूझकर कम कर दी गई थी। व्हाइट गंगा फ्रूट को जो दूध दिया गया, वह कम वसा वाला था, जिसे स्वीट मिल्क के रूप में बेचा गया। इससे निजी कंपनी को फायदा तो हुआ, लेकिन समिति को मूल्य का नुकसान सहना पड़ा। पवन कुमार की रिपोर्ट में लिखा है, "वसा की चोरी से न केवल आर्थिक हानि हुई, बल्कि उपभोक्ताओं को निम्न गुणवत्ता का उत्पाद मिला।" यह चोरी कैसे की गई, इसकी विस्तृत जांच चल रही है, लेकिन प्रारंभिक निष्कर्षों से एमडी की संलिप्तता साफ झलक रही है।एमडी पर कार्रवाई: निलंबन और आगे की जांचइस रिपोर्ट के आधार पर डॉ. राजेश नारायण जाट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सहकारी समिति के उच्च अधिकारियों ने राजस्थान सहकारी विभाग को मामले की जानकारी दे दी है, और अब उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जा रही है।  दोष साबित हुआ तो एमडी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है, जिसमें धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग जैसे धाराएं लागू हो सकती हैं।व्हाइट गंगा फ्रूट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक से भी पूछताछ की जा रही है। कंपनी पर आरोप है कि वह जानबूझकर कम वसा वाले दूध को स्वीट मिल्क के रूप में बाजार में बेच रही थी, जो उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन है।

प्रभाव: किसानों और उपभोक्ताओं पर असर यह घोटाला न केवल समिति की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि स्थानीय किसानों को भी प्रभावित करता है। भरतपुर क्षेत्र के हजारों दूध उत्पादक किसान अपनी मेहनत से एकत्रित दूध पर निर्भर हैं। इस तरह की अनियमितताओं से उनके भुगतान में देरी और मूल्य में कमी आ सकती है। वहीं, उपभोक्ता कम गुणवत्ता वाले उत्पादों के शिकार हो रहे हैं।सहकारी समिति के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "यह पहला मामला नहीं है। पहले भी एमडी पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे, लेकिन इस बार ठोस सबूत हैं। हम किसानों के हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाएंगे।"

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.