5 साल के मासूम की ब्रेन डेथ के बाद परिवार ने नोबल फैसला लिया: लिवर और किडनी डोनेट कर दो जिंदगियां बचाईं

राजस्थान के बालोतरा जिले के गिड़ा गांव के 5 साल के मासूम भोमाराम की ब्रेन डेथ होने के बाद परिवार ने लिवर और किडनी डोनेट करने का नेक फैसला लिया। लिवर दिल्ली और किडनी जोधपुर में ट्रांसप्लांट कर दो जिंदगियां बचाई गईं। ऑर्गन्स को ग्रीन कॉरिडोर से एयरपोर्ट भेजा गया।

Dec 22, 2025 - 13:05
5 साल के मासूम की ब्रेन डेथ के बाद परिवार ने नोबल फैसला लिया: लिवर और किडनी डोनेट कर दो जिंदगियां बचाईं

जोधपुर। राजस्थान के बालोतरा जिले के गिड़ा तहसील के एक छोटे से गांव के 5 साल के मासूम बच्चे भोमाराम पुत्र भैराराम की अचानक तबीयत बिगड़ने से पूरा परिवार सदमे में आ गया। लेकिन दुख की इस घड़ी में परिवार ने एक ऐसा फैसला लिया जो इंसानियत की मिसाल बन गया। ब्रेन डेथ घोषित होने के बाद परिवार ने बच्चे के लिवर और किडनी डोनेट करने की सहमति दी, जिससे दो मरीजों को नई जिंदगी मिली।

यह घटना 14 दिसंबर की है, जब भोमाराम की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिवार उसे पहले स्थानीय गिड़ा अस्पताल ले गया, जहां से डॉक्टरों ने गंभीर हालत देखते हुए जोधपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में रेफर कर दिया। एम्स में भर्ती करने के बाद इलाज के बावजूद बच्चे की हालत नहीं सुधरी और वह ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।

एम्स के डॉक्टरों ने परिजनों से ऑर्गन डोनेशन के बारे में बात की। बच्चे के पिता भैराराम और परिवार के अन्य सदस्यों ने विचार-विमर्श के बाद इस नेक काम के लिए हामी भर दी। मासूम के दादा किशनाराम सेन ने बताया, "एम्स के डॉक्टरों ने हमें ब्रेन डेड की जानकारी दी और ऑर्गन डोनेट करने की सलाह दी। हमने पूरे परिवार से चर्चा की और रविवार को सहमति दे दी। सोमवार को ऑर्गन निकालकर डॉक्टरों ने शव हमें सौंप दिया। अब हम शव को गांव गिड़ा लेकर जा रहे हैं।"

ऑर्गन रिट्रीवल की प्रक्रिया सोमवार को पूरी की गई। एम्स की टीम ने बच्चे का लिवर और किडनी सुरक्षित निकाले। लिवर को दिल्ली के एक अस्पताल में ट्रांसप्लांट के लिए फ्लाइट से भेजा गया, जबकि एक किडनी जोधपुर एम्स में ही किसी जरूरतमंद मरीज को ट्रांसप्लांट की गई।

ऑर्गन को समय पर पहुंचाने के लिए जोधपुर में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। एम्स से एयरपोर्ट तक ट्रैफिक को रोका गया ताकि एम्बुलेंस बिना रुकावट के पहुंच सके। इसके बाद लिवर को फ्लाइट से दिल्ली भेजा गया। यह प्रक्रिया ऑर्गन डोनेशन की संवेदनशीलता को दर्शाती है, क्योंकि ऑर्गन ज्यादा देर तक बाहर नहीं रह सकते।

एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे के ऑर्गन से दो मरीजों की जिंदगी बचाई गई। एक मरीज को जोधपुर में ही किडनी ट्रांसप्लांट हुई, जबकि लिवर दिल्ली में किसी गंभीर मरीज को लगाया गया। डॉक्टरों ने परिवार के इस फैसले की सराहना की और कहा कि ऐसे मामलों में परिजनों का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण होता है।

यह घटना ऑर्गन डोनेशन की जागरूकता बढ़ाने का संदेश देती है। राजस्थान में एम्स जोधपुर ऑर्गन ट्रांसप्लांट का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां पिछले कुछ वर्षों में कई सफल ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। लेकिन बच्चों के केस में यह फैसला लेना परिवार के लिए बेहद भावुक और मुश्किल होता है। भोमाराम के परिवार ने दुख को ताकत बनाकर दो परिवारों को खुशी दी।

परिवार अब बच्चे के शव को गांव लेकर अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा है। इस हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है, लेकिन परिवार का नोबल फैसला लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है। ऑर्गन डोनेशन से न केवल जिंदगियां बचती हैं, बल्कि मृत्यु के बाद भी कोई व्यक्ति दूसरों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.