पिता के निधन के वक्त गर्भ में था 'बेटा': अनुकंपा नियुक्ति पर विवाद, राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर 3 हफ्ते में जवाब मांगा। याचिकाकर्ता समीर खान के पिता 2003 में निधन के समय वह मां के गर्भ में थे। बालिग होने पर अनुकंपा नियुक्ति आवेदन देरी के आधार पर खारिज। मां बीमार, भाई निशक्त। अगली सुनवाई 27 नवंबर।

Nov 11, 2025 - 10:52
पिता के निधन के वक्त गर्भ में था 'बेटा': अनुकंपा नियुक्ति पर विवाद, राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

जोधपुर, 11 नवंबर 2025: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। मामला एक अनोखे और भावुक अनुकंपा नियुक्ति (कंपैशनेट अपॉइंटमेंट) से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता समीर खान के पिता का निधन उस समय हुआ था जब वह अपनी मां के गर्भ में था। राज्य सरकार ने बालिग होने के बाद दिए गए आवेदन को 'देरी' के आधार पर खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद यह नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को निर्धारित की गई है।

याचिकाकर्ता की पीड़ा भरी कहानी;  यह मामला राजस्थान के नागौर जिले के डीडवाना तहसील के बेरी गांव के निवासी समीर खान से जुड़ा है। समीर के पिता सुलेमान खान शिक्षा विभाग में सरकारी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। वर्ष 2003 में सुलेमान खान का आकस्मिक निधन हो गया। उस समय समीर खान अपनी मां के गर्भ में था। पिता की मृत्यु के कारण परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। मां लंबे समय तक बीमार रहीं, जिससे परिवार की जिम्मेदारियां और बढ़ गईं।समीर के बड़े भाई निशक्त हैं, जिसके कारण वे परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं। परिवार में कोई अन्य कमाने वाला सदस्य नहीं होने के कारण समीर ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, बालिग होते ही अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान सरकारी कर्मचारियों की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को नौकरी प्रदान करने का एक कल्याणकारी उपबंध है, ताकि परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से समीर के आवेदन को 'देरी से दाखिल' होने के आधार पर अस्वीकार कर दिया गया।

कानूनी लड़ाई का आरंभ;  समीर खान की ओर से वकील रजाक खान हैदर ने राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर में याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया कि पिता की मृत्यु के समय समीर गर्भ में था, इसलिए वह तत्काल आवेदन दाखिल करने की स्थिति में नहीं था। मां की बीमारी और भाई की निशक्तता के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय रही। बालिग होने पर ही समीर सक्षम हुआ, तब उसने आवेदन किया। याचिकाकर्ता का कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य ही परिवार को संकट से उबारना है, न कि तकनीकी आधारों पर आवेदन को खारिज करना।याचिका में शिक्षा विभाग के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया कि देरी का आधार असंगत है, क्योंकि समीर की स्थिति असाधारण थी। यदि ऐसी परिस्थितियों में भी आवेदन खारिज हो जाते हैं, तो अनुकंपा नीति का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अपील की है कि विभाग को निर्देश दिए जाएं कि आवेदन पर पुनर्विचार कर नियुक्ति प्रदान की जाए।

कोर्ट का रुख और नोटिस;   हाईकोर्ट ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई की, जिसमें जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण ने मामले की गंभीरता को समझा। कोर्ट ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव, निदेशक और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के अंदर शपथ-पत्र के माध्यम से जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 27 नवंबर 2025 को होगी, जिसमें विभाग को अपनी सफाई पेश करनी होगी।यह मामला अनुकंपा नियुक्ति नीति की व्याख्या और मानवीय पहलुओं पर प्रकाश डालता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कोर्ट अक्सर सरकार को तकनीकी बाधाओं से ऊपर उठकर फैसला लेने का निर्देश देता है। राजस्थान में अनुकंपा नियुक्ति के कई मामले लंबित हैं, और यह फैसला अन्य समान याचिकाओं के लिए मिसाल कायम कर सकता है।

अनुकंपा नियुक्ति नीति का संक्षिप्त अवलोकन;  राजस्थान सरकार की अनुकंपा नियुक्ति नीति के तहत, यदि कोई सरकारी कर्मचारी सेवा के दौरान मृत्यु को प्राप्त होता है, तो उसके आश्रित (पति/पत्नी, पुत्र/पुत्री आदि) को ग्रुप-सी या ग्रुप-डी के पद पर नियुक्ति दी जा सकती है। नीति में देरी के मामलों में छूट का प्रावधान है, लेकिन व्यावहारिक रूप से कई आवेदन तकनीकी आधारों पर खारिज हो जाते हैं। समीर के मामले में यही विवाद का केंद्र बिंदु है।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.