सीकर में अवैध महिला आश्रम पर बड़ी कार्रवाई: 22 महिलाओं और 2 बच्चों को रेस्क्यू कर मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह में शिफ्ट किया
सीकर जिले के पिपराली गांव में बिना किसी सरकारी मान्यता या अनुमति के संचालित 'नीडी ब्रिज महिला अनाथ आश्रम' पर प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। जांच में 22 महिलाएं (जिनमें कुछ मानसिक रूप से कमजोर) और 2 छोटे बच्चे पाए गए। सभी को सुरक्षित रेस्क्यू कर मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह में शिफ्ट किया गया, जहां उनकी मेडिकल जांच और पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है। यह कार्रवाई अवैध आश्रमों पर लगाम कसने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सीकर जिले के पिपराली गांव में संचालित एक अवैध महिला आश्रम पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, महिला एवं बाल विकास विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा जिला बाल संरक्षण इकाई की संयुक्त टीम ने 'नीडी ब्रिज महिला अनाथ आश्रम' (जिसे नीडी ब्रिज महिला आश्रम या निडी ब्रिज महिला अनाथ आश्रम भी कहा जा रहा है) पर छापेमारी की। इस दौरान आश्रम में बिना किसी वैधानिक अनुमति या मान्यता के रह रही 22 महिलाओं और 2 छोटे बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू (मुक्त) किया गया।
जांच और कार्रवाई का विवरण
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शालिनी गोयल के नेतृत्व में हुई इस जांच में पाया गया कि आश्रम बिना किसी सरकारी मान्यता, आवश्यक दस्तावेजों या लाइसेंस के संचालित हो रहा था। निरीक्षण दल में शामिल अन्य प्रमुख अधिकारी निम्नलिखित थे:महिला अधिकारिता विभाग की डिप्टी डायरेक्टर राजेंद्र चौधरी,सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की डिप्टी डायरेक्टर प्रियंका पारीक,जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग की असिस्टेंट डायरेक्टर गार्गी शर्मा,बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अंकुर बहड़। टीम ने आश्रम का गहन निरीक्षण किया और वहां मौजूद सभी व्यक्तियों से पूछताछ की। आश्रम संचालक ने बताया कि कई महिलाओं और बच्चों को पुलिस विभाग ने यहां सुपुर्द किया था या रेस्क्यू करके लाया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ महिलाएं मानसिक रूप से विमंदित (मानसिक रूप से कमजोर या विशेष आवश्यकता वाली) श्रेणी की थीं, जिससे उनकी सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
रेस्क्यू के बाद की कार्रवाई
रेस्क्यू अभियान के तहत सभी 22 महिलाओं और 2 बच्चों को तत्काल मुक्त कराया गया। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह (Chief Minister Rehabilitation Home) में शिफ्ट कर दिया गया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निर्देश पर सभी का मेडिकल जांच करवाया जा रहा है ताकि उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति का आकलन हो सके और उचित देखभाल, परामर्श तथा पुनर्वास की व्यवस्था की जा सके।
महत्वपूर्ण पहलू
यह कार्रवाई अवैध आश्रमों और अनाथालयों पर लगाम कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे आश्रम अक्सर बिना रजिस्ट्रेशन के चलते हैं, जहां रहने वालों के साथ शोषण, उपेक्षा या अनुचित व्यवहार की आशंका रहती है। प्रशासन का यह संयुक्त प्रयास महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सराहनीय है।