शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी पर केस दर्ज, लेकिन पुलिस बेबस—कानूनी प्रक्रिया ने रोका

शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और लोकगायक छोटू सिंह रावणा के बीच सोशल मीडिया विवाद के बाद FIR दर्ज हुई है। हालांकि, विधायक होने के कारण मामले की जांच स्थानीय पुलिस नहीं बल्कि CID-CB करेगी, इसलिए तुरंत गिरफ्तारी संभव नहीं है। ऑडियो सबूत और विरोध प्रदर्शन के चलते मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है।

Apr 2, 2026 - 15:30
शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी पर केस दर्ज, लेकिन पुलिस बेबस—कानूनी प्रक्रिया ने रोका

बाड़मेर 2 अप्रैल 2026 :- राजस्थान की राजनीति में चर्चित शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और लोकगायक छोटू सिंह रावणा के बीच शुरू हुआ विवाद अब कानूनी स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है। बाड़मेर जिले के शिव थाने में विधायक भाटी और उनके कुछ सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, लेकिन FIR दर्ज होने के बावजूद स्थानीय पुलिस की ओर से तुरंत गिरफ्तारी या सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही। यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा नया मोड़ बनकर सामने आया है।

क्यों नहीं कर सकती स्थानीय पुलिस तुरंत कार्रवाई?

कानूनी प्रावधानों के अनुसार, किसी वर्तमान विधायक (Sitting MLA) के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जांच सीधे स्थानीय थाना पुलिस के अधिकार क्षेत्र में नहीं रहती। ऐसे मामलों को जांच के लिए राज्य की विशेष एजेंसी CID-CB (Crime Investigation Department–Crime Branch) को सौंपा जाता है।

इसी प्रक्रिया के चलते इस मामले में भी स्थानीय पुलिस फिलहाल सीमित भूमिका में है और आगे की जांच CID-CB द्वारा ही की जाएगी। जब तक जांच एजेंसी आवश्यक साक्ष्य इकट्ठा कर उचित कार्रवाई का निर्णय नहीं लेती, तब तक गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई संभव नहीं होती।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

इस विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक वीडियो को लेकर हुई। बताया जा रहा है कि एक बच्चे के वीडियो पर छोटू सिंह रावणा द्वारा की गई टिप्पणी से विवाद खड़ा हुआ। रावणा का आरोप है कि इस टिप्पणी के बाद उन्हें फोन पर धमकी दी गई।

मामला यहीं नहीं रुका—इस विवाद ने सामाजिक और राजनीतिक रंग ले लिया, जिसके बाद रावणा समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक बहिष्कार तक की चेतावनी दी गई, जिससे मामला और गरमा गया।

सबूत और आरोप-प्रत्यारोप

छोटू सिंह रावणा ने पुलिस को एक पेन ड्राइव सौंपी है, जिसमें कथित तौर पर धमकी भरी ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा किया गया है।

वहीं दूसरी ओर, विधायक भाटी के समर्थक इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह विवाद जानबूझकर बढ़ाया जा रहा है ताकि राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।

राजस्थान में दागी विधायकों की स्थिति

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राजस्थान में विधायकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को लेकर पहले से ही चर्चा है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार:

राज्य के लगभग 35-40% विधायकों पर किसी न किसी प्रकार के केस दर्ज हैं

करीब 28 विधायकों पर गंभीर आरोप (जैसे हत्या का प्रयास, अपहरण, भ्रष्टाचार) लंबित हैं

कई मामलों की जांच CID-CB या विशेष MP-MLA कोर्ट में चल रही है

अब इस पूरे मामले की दिशा CID-CB की जांच पर निर्भर करेगी। एजेंसी ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित सभी सबूतों की जांच करेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

इस विवाद ने सिर्फ कानूनी ही नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी असर डाला है, खासकर मारवाड़ क्षेत्र में जातीय समीकरणों को लेकर माहौल गरमाता दिख रहा है।

FIR दर्ज होना इस मामले का पहला कदम है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच एजेंसी की भूमिका महत्वपूर्ण है। जब तक CID-CB अपनी जांच पूरी नहीं करती, तब तक किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई संभव नहीं है। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।