मकराना दौरे पर हनुमान बेनीवाल का डबल अटैक: 1.15 करोड़ के विकास कार्यों की घोषणा, मंच से नरेंद्र मोदी पर साधा निशाना
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने मकराना दौरे में 1.15 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणा की। साथ ही नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला कर सियासी माहौल गरमा दिया।
राजस्थान की सियासत में अपने बेबाक अंदाज़ के लिए पहचाने जाने वाले नागौर सांसद और आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल का मकराना दौरा इस बार विकास और बयानबाज़ी—दोनों वजहों से सुर्खियों में रहा।
शनिवार को मकराना विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान बेनीवाल ने स्थानीय विधायक जाकिर हुसैन गैसावत के साथ कई ग्रामीण इलाकों का निरीक्षण किया और जनता को बड़ी सौगात देते हुए करीब 1 करोड़ 15 लाख रुपये के विकास कार्यों की घोषणा की।
इन घोषणाओं में 65 लाख रुपये ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए तय किए गए, जबकि मकराना शहर के कब्रिस्तान के विकास हेतु अलग से 50 लाख रुपये देने का ऐलान किया गया।
दौरे के दौरान रात करीब साढ़े आठ बजे अंजुमन कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में सांसद और विधायक का जोरदार स्वागत किया गया। स्थानीय लोगों ने साफा और मालाओं से उनका अभिनंदन किया।
हालांकि, यह दौरा केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रवासियों ने सांसद के सामने कई अहम मांगें भी रखीं। इनमें मकराना से मुंबई के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने, मकराना-मंगलाना आरओबी की मरम्मत और रेलवे प्लेटफॉर्म पर ब्रिज को उचित स्थान पर बनाने की मांग प्रमुख रही।
इन मांगों पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए सांसद बेनीवाल ने मौके पर ही रेलवे अधिकारियों से फोन पर बातचीत की और समस्याओं के जल्द समाधान का भरोसा दिलाया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मकराना रेलवे प्लेटफॉर्म को जल्द ही ‘अमृत योजना’ में शामिल किया जाएगा।
लेकिन इस दौरे की सबसे ज्यादा चर्चा उनके सियासी बयान को लेकर हुई। अंजुमन कॉलेज के मंच से हनुमान बेनीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका किसी का सगा नहीं है और भारत को ईरान का साथ देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने देश की वर्तमान स्थिति को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए खुद तैयार रहना चाहिए।
इस तरह मकराना का यह दौरा विकास की घोषणाओं और सियासी बयानबाज़ी का मिश्रण बनकर सामने आया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि घोषित परियोजनाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरती हैं और बेनीवाल के बयानों का राजनीतिक असर आगे क्या होता है।