सांचौर के मौलवी का अफगानिस्तानी आतंकी संगठन टीटीपी से 4 साल पुराना कनेक्शन: इंटरनेट कॉलिंग से टॉप कमांडरों से रखता था संपर्क, ATS ने गिरफ्तार किया
राजस्थान ATS ने सांचौर के मौलवी को TTP से 4 साल पुराने संपर्क के लिए गिरफ्तार किया; इंटरनेट कॉल से टॉप कमांडरों से बातचीत, 31 अक्टूबर को 5 संदिग्ध पकड़े जिसमें 2 सगे भाई और मदरसा स्टूडेंट्स शामिल।
बाड़मेर, 6 नवंबर 2025: राजस्थान एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने एक बड़े खुलासे में सांचौर के एक मदरसे के मौलवी को अफगानिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। यह मौलवी पिछले चार वर्षों से इस संगठन से सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था और इंटरनेट कॉलिंग एप्स के माध्यम से TTP के शीर्ष कमांडरों से संपर्क बनाए रखता था। यह कार्रवाई 31 अक्टूबर को शुरू हुए एक व्यापक ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसमें ATS ने चार जिलों में छापेमारी कर पांच संदिग्धों को हिरासत में लिया था। इनमें से तीन संदिग्ध बाड़मेर जिले के सीमावर्ती इलाकों से जुड़े हैं, जिनमें दो सगे भाई शामिल हैं।
ऑपरेशन का विवरण: चार जिलों में छापेमारी, पांच संदिग्ध गिरफ्तार 31 अक्टूबर को ATS ने राजस्थान के विभिन्न जिलों में समवर्ती छापेमारी की कार्रवाई की। इस अभियान में बाड़मेर, जोधपुर, करौली और जयपुर जैसे जिलों को निशाना बनाया गया। संदेह के आधार पर आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता की जांच के तहत कुल पांच संदिग्धों को डिटेन किया गया। इनमें से तीन बाड़मेर जिले के बॉर्डर इलाकों के निवासी हैं, जो पाकिस्तान सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्र हैं।गिरफ्तार संदिग्धों के नाम और उनके निवास स्थान निम्नलिखित हैं:उसामा उमर: पार, बाड़मेर का निवासी।
मसूद पाधी: पार, बाड़मेर का निवासी (सगे भाइयों में से एक)।
मोहम्मद अयूब: पीपाड़, जोधपुर का निवासी।
मोहम्मद जुनेद: बागोर मोहल्ला, करौली का निवासी।
बसीर: रामसर, बाड़मेर का निवासी।
इन संदिग्धों को डिटेन करने के बाद ATS ने गहन पूछताछ की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि ये व्यक्ति TTP जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा थे।
सगे भाइयों का भूमिका: मदरसों से लिंक, हाल ही में बाड़मेर पहुंचे सबसे महत्वपूर्ण खुलासा बाड़मेर के पार इलाके के दो सगे भाइयों—उसामा उमर और मसूद पाधी—के संबंध में सामने आया। इनके पिता सांचौर के एक प्रमुख मदरसे में मौलवी हैं, जिन्हें अब ATS ने भी गिरफ्तार कर लिया है। दोनों भाई मदरसों से जुड़े होने के बावजूद संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए गए।मसूद पाधी: जोधपुर के पीपाड़ स्थित मदरसे में पढ़ाई करता था। ATS ने उसे इसी मदरसे से डिटेन किया। वह TTP के प्रचार और भर्ती गतिविधियों में शामिल होने का संदेह है। उसामा उमर: सांचौर के मदरसे में पढ़ता था, जहां उसके पिता मौलवी हैं। उसे सांचौर से ही पकड़ा गया।
दोनों भाई लगभग 15 दिन पहले बाड़मेर के सीमावर्ती इलाके में पहुंचे थे, जहां वे कथित तौर पर आतंकी संगठन के लिए जासूसी और लॉजिस्टिक सपोर्ट की भूमिका निभा रहे थे। तीसरा संदिग्ध बसीर, जो रामसर (बाड़मेर) का निवासी है, उसे जयपुर से डिटेन किया गया। वह भी बॉर्डर इलाके से जुड़ा होने के कारण निगरानी में था।
मौलवी का TTP कनेक्शन: 4 साल से सक्रिय, इंटरनेट कॉलिंग से कमांडरों से बातचीत ATS की पूछताछ में सबसे बड़ा खुलासा सांचौर के मौलवी के बारे में हुआ। वह पिछले चार वर्षों से TTP से जुड़ा हुआ था और संगठन के अफगानिस्तान-आधारित टॉप कमांडरों से नियमित संपर्क में था। संपर्क का माध्यम मुख्य रूप से इंटरनेट कॉलिंग एप्लिकेशन्स जैसे वॉट्सएप, सिग्नल या टेलीग्राम थे, जो एन्क्रिप्टेड होने के कारण ट्रैकिंग में कठिनाई पैदा करते हैं।मौलवी पर आरोप है कि वह मदरसे को कवर के रूप में इस्तेमाल कर युवाओं को कट्टर बनाता था और TTP के लिए संभावित भर्ती का काम करता था। उसके फोन और डिवाइसेस से रिकवर की गई सामग्री में TTP के प्रोपेगैंडा वीडियो, मैसेजेस और कमांडरों के साथ चैट हिस्ट्री मिली है। ATS ने उसके खिलाफ आतंकी संगठन से जुड़ाव, राजद्रोह और यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) की धाराओं में मामला दर्ज कर गिरफ्तारी दर्ज की है।
ATS की कार्रवाई का व्यापक संदर्भ: बॉर्डर सिक्योरिटी पर खतरा यह ऑपरेशन राजस्थान के पश्चिमी बॉर्डर पर बढ़ती आतंकी घुसपैठ की आशंकाओं के बीच आया है। बाड़मेर जैसे सीमावर्ती जिले पाकिस्तान और अफगानिस्तान से जुड़े रूट्स के कारण हमेशा संवेदनशील रहे हैं। TTP, जो अफगान तालिबान से अलग है, पाकिस्तान में सक्रिय है लेकिन अफगानिस्तान में अपने ठिकाने रखता है। यह संगठन आईएसआईएस-के और अल-कायदा जैसे ग्रुप्स से भी लिंक्ड है।ATS के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह गिरोह बॉर्डर पार ड्रोन हमलों, हथियार तस्करी और जासूसी के लिए इस्तेमाल हो रहा था। पूछताछ जारी है, और संदिग्धों के अन्य सहयोगियों की तलाश की जा रही है। राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय एजेंसियों—जैसे NIA और IB—के साथ समन्वय बढ़ाने का निर्देश दिया है।
प्रभाव और आगे की जांच; इस गिरफ्तारी से न केवल स्थानीय स्तर पर कट्टरता के नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के राजस्थान में फैलते जाल को भी उजागर किया है। मदरसों की भूमिका पर अब सवाल उठ रहे हैं, हालांकि अधिकारी स्पष्ट करते हैं कि यह विशिष्ट मामला है और सभी संस्थानों पर सामान्यीकरण नहीं किया जा सकता।ATS ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें। जांच में शामिल विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरोह बड़े हमलों की योजना बना रहा था, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया। मामले की आगे की सुनवाई कोर्ट में होगी, और संदिग्धों को रिमांड पर लिया जा सकता है।