आधुनिक तकनीक से लैस होगी राजस्थान पुलिस : अपराधियों की अब कुंडली निकालना होगा आसान
राजस्थान पुलिस को एनसीआरबी ने नवीनतम डिजिटल टूल्स और ऐप्स का गहन ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया। अब अपराधियों का पूरा क्रिमिनल रिकॉर्ड, पुराने केस और ट्रैकिंग कुछ ही सेकंड में उपलब्ध हो जाएगी। यह कदम राज्य में स्मार्ट पुलिसिंग और तेज़-पारदर्शी जांच की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
जयपुर, 15 नवंबर। राजस्थान पुलिस अपराध जांच और अपराधी ट्रैकिंग के क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी छलांग लगाने जा रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के सहयोग से राज्य की सभी फील्ड यूनिट्स को नवीनतम डिजिटल टूल्स और ऐप्स का गहन प्रशिक्षण दिया गया है। इस कवायद से न केवल जांच की गति बढ़ेगी, बल्कि अपराधियों की पूरी क्रिमिनल हिस्ट्री (कुंडली) कुछ ही क्लिक में सामने आ जाएगी।
एनसीआरबी ने दिया विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध) श्री हवा सिंह घूमरिया के निर्देशन में यह दो दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। प्रशिक्षण का संचालन एनसीआरबी, नई दिल्ली के डिप्टी डायरेक्टर एवं आईजी श्री जनमेजय खंडूरी ने स्वयं किया। उनके साथ एनसीआरबी की विशेषज्ञ टीम ने भी विभिन्न सत्रों को संबोधित किया।इस प्रशिक्षण में राज्य के सभी जिला पुलिस अधीक्षक, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, सर्किल ऑफिसर, थानाधिकारी, सीसीटीएनएस (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) ऑपरेटर तथा पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। कुल मिलाकर 500 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों ने इस प्रशिक्षण में हिस्सा लिया।
नए ऐप्स और डैशबोर्ड से बदलेगा जांच का तरीका आईजी श्री जनमेजय खंडूरी ने अधिकारियों को एनसीआरबी के कई नए पोर्टल, मोबाइल ऐप्स और डैशबोर्ड की बारीकियां समझाईं। इनमें प्रमुख हैं:वांछित एवं फरार अपराधियों की रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम, महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अपराधों की त्वरित मॉनिटरिंग डैशबोर्ड,अंतर-राज्यीय अपराधियों की साझा डेटाबेस तक तुरंत पहुंच,पुराने केसों की ऑटोमैटिक लिंकेज सुविधा,सीसीटीएनएस 2.0 के नए फीचर्स
इन टूल्स की मदद से अब थाना स्तर पर ही अपराधी का पूरा क्रिमिनल रिकॉर्ड, पिछले केस, साथी अपराधी, इस्तेमाल किए गए वाहन, मोबाइल नंबर, पता इतिहास आदि कुछ ही सेकंड में स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगा।
स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में मील का पत्थर महानिरीक्षक, राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) श्री अजयपाल लाम्बा ने बताया कि यह प्रशिक्षण राजस्थान पुलिस को पूरी तरह डिजिटल और डेटा-ड्रिवेन पुलिसिंग की ओर ले जाएगा। उन्होंने कहा, “अब जांच अधिकारी को फाइलें खंगालने या दूसरे राज्यों से जानकारी मांगने में सप्ताह नहीं लगेंगे। सब कुछ एक क्लिक पर उपलब्ध होगा।”श्री लाम्बा ने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में सभी थानों में हाई-स्पीड इंटरनेट, नए कंप्यूटर और टैबलेट दिए जाएंगे ताकि इन टूल्स का अधिकतम उपयोग हो सके।
अपराधियों के लिए बुरी खबर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ये नई तकनीकें विशेष रूप से हार्डकोर अपराधियों, शातिर गैंग्स और अंतर-राज्यीय गिरोहों पर नकेल कसने में कारगर साबित होंगी। अब कोई अपराधी फर्जी नाम-पते से बच नहीं पाएगा क्योंकि उसकी पूरी डिजिटल कुंडली पुलिस के पास होगी।राजस्थान पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “पहले एक अपराधी का पुराना रिकॉर्ड निकालने में 10-15 दिन लग जाते थे। अब यह काम मिनटों में हो जाएगा। इसका सीधा असर रिकवरी रेट और चार्जशीट की गुणवत्ता पर पड़ेगा।”
आगे की योजना पुलिस मुख्यालय ने फैसला लिया है कि दिसंबर महीने में सभी जिलों में फॉलो-अप प्रशिक्षण और हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस सेशन आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, हर जिले में एक “डिजिटल क्राइम ट्रैकिंग सेल” बनाने की योजना है।राजस्थान पुलिस की इस तकनीकी छलांग से आम जनता को भी उम्मीद है कि अपराधों पर अंकुश लगेगा और न्याय प्रक्रिया तेज एवं पारदर्शी होगी। यह कदम निश्चित रूप से राज्य को “स्मार्ट पुलिसिंग” के मामले में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में ला खड़ा करेगा।