बाड़मेर में सम्राट पृथ्वीराज चौहान जयंती समारोह... वीरता और राष्ट्रभक्ति की गूंज
बाड़मेर के मलीनाथ छात्रावास में सम्राट पृथ्वीराज चौहान जयंती का भव्य आयोजन हुआ।
राजस्थान के बाड़मेर शहर में रविवार को मलीनाथ छात्रावास परिसर में सम्राट पृथ्वीराज चौहान जयंती का भव्य और गरिमामय आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और युवा शामिल हुए।
सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ यह आयोजन दोपहर 2 बजे तक चला, जिसमें सम्राट पृथ्वीराज चौहान के जीवन, उनकी वीरता, शौर्य और राष्ट्र के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को याद किया गया।
वीरता और इतिहास पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में वक्ताओं ने सम्राट पृथ्वीराज चौहान को भारतीय इतिहास का महान योद्धा बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने साहस और स्वाभिमान से इतिहास में अमिट पहचान बनाई।
वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे अपने गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को समझें और वीर पुरुषों के संघर्षों से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कई बड़े अतिथियों की मौजूदगी
इस अवसर पर राजस्थान सरकार के मंत्री के.के. विश्नोई, पोखरण विधायक महंत प्रतापपुरी, इतिहासकार राजवीर सिंह चक्लोई, गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
इसके अलावा शिव के पूर्व विधायक रवींद्र सिंह भाटी, समाजसेवी संग्रामराम जांगिड़, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
युवाओं को दिया गया संदेश
मुख्य अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि आज की युवा पीढ़ी आधुनिकता की दौड़ में अपने इतिहास और विरासत से दूर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ने और उनमें राष्ट्रभक्ति, साहस और सामाजिक एकता के मूल्य विकसित करने का कार्य करते हैं।
प्रतिभाओं का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान समाज के प्रतिभावान युवाओं, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया। इस पूरे आयोजन में देशभक्ति और वीरता से ओत-प्रोत माहौल देखने को मिला।
संकल्प के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम
समारोह के अंत में बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने सम्राट पृथ्वीराज चौहान के आदर्शों पर चलने और उनके बताए मार्ग को अपनाने का संकल्प लिया। कुल मिलाकर यह आयोजन बाड़मेर में इतिहास, संस्कृति और युवा जागरूकता का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ, जिसने समाज को अपनी विरासत पर गर्व करने का संदेश दिया।