जोधपुर में प्रॉपर्टी निवेश के नाम पर 25 लाख की ठगी: परिचितों ने धोखा दिया, तीन साल बाद पीड़ित ने दर्ज कराया मामला
जोधपुर में परिचित डॉ. बबीता सिंह गुर्जर और बलदेव बेनीवाल ने प्रॉपर्टी के नाम पर रोहित कुमार से 25 लाख 31 हजार रुपये ठग लिए; तीन साल बाद कोर्ट के आदेश पर रातानाडा पुलिस ने मामला दर्ज किया।
शहर के सर्किट हाउस रोड इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति को प्रॉपर्टी निवेश के नाम पर करीब 25 लाख 31 हजार रुपये की बड़ी ठगी का शिकार बनाया गया। आरोपी, जो पीड़ित के पुराने परिचित थे, ने पैसे हड़पने के बाद संपर्क तोड़ लिया। पीड़ित ने तीन साल तक इंतजार करने के बाद आखिरकार मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में मुकदमा दर्ज करवाया है। कोर्ट ने रातानाडा पुलिस थाने को मामला दर्ज करने के सख्त आदेश जारी किए हैं। यह घटना निवेश के नाम पर बढ़ते साइबर ठगी के मामलों की एक कड़ी जोड़ती है, जहां परिचितों का भरोसा ही धोखे का हथियार बन जाता है।
पीड़ित का दर्दनाक अनुभव: परिचितों पर भरोसा टूटा शिकायतकर्ता रोहित कुमार, जो जोधपुर के सर्किट हाउस रोड पर रहते हैं, ने अपनी शिकायत में विस्तार से घटना का जिक्र किया है। रोहित ने बताया कि उनकी जान-पहचान शिकारगढ़ के अशोक विहार इलाके में रहने वाली डॉ. बबीता सिंह गुर्जर और दईकड़ा रोड, जोधपुर निवासी बलदेव बेनीवाल से लंबे समय से थी। दोनों आरोपी प्रॉपर्टीज के कारोबार में सक्रिय थे और एक-दूसरे के साथ मिलकर संपत्ति खरीद-बिक्री का धंधा चला रहे थे। रोहित ने बताया कि साल 2022 में आरोपी दंपति ने उनसे संपर्क किया और शहर में एक आकर्षक प्रॉपर्टी निवेश का प्रस्ताव रखा। उन्होंने दावा किया कि यह निवेश उच्च रिटर्न वाला होगा और प्रॉपर्टी जल्द ही विकसित हो जाएगी। भरोसे के चलते रोहित ने बिना ज्यादा सोचे-समझे इस सौदे में निवेश करने का फैसला किया। लेकिन यह उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।
ठगी का तरीका: किस्तों में ऑनलाइन ट्रांसफर, फिर गायब आरोपियों ने ठगी को चालाकी से अंजाम दिया। उन्होंने रोहित से पैसे अलग-अलग किस्तों में मांगे, ताकि शक न हो। हर किस्त के नाम पर कोई न कोई बहाना बनाया गया—जैसे प्रॉपर्टी के दस्तावेज तैयार करने, रजिस्ट्री शुल्क चुकाने या निर्माण कार्य के लिए। रोहित ने कुल 25 लाख 31 हजार रुपये अपने बैंक खाते से आरोपी के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। यह राशि कई महीनों में धीरे-धीरे हस्तांतरित की गई, जिससे पीड़ित को धीरे-धीरे लूटा गया।पैसे मिलने के बाद आरोपी डॉ. बबीता सिंह गुर्जर और बलदेव बेनीवाल ने अपना असली चेहरा दिखा दिया। उन्होंने रोहित के फोन कॉल्स और मैसेज का जवाब देना बंद कर दिया। न तो प्रॉपर्टी के कागजात दिखाए गए, न ही कोई अपडेट दिया गया। रोहित ने कई बार मिलने की कोशिश की, लेकिन आरोपी गायब हो चुके थे। उनकी केशव प्रॉपर्टीज नाम की फर्म भी बंद पड़ी मिली। इस तरह, रोहित न सिर्फ आर्थिक रूप से बर्बाद हुए, बल्कि मानसिक रूप से भी टूट गए।
तीन साल का इंतजार: क्यों देरी से शिकायत? रोहित ने शिकायत में बताया कि शुरुआत में उन्होंने सोचा कि शायद कोई तकनीकी समस्या या देरी हो। आरोपी परिचित होने के कारण वे बार-बार संपर्क करते रहे, लेकिन कोई फायदा न हुआ। परिवार और दोस्तों से सलाह लेने पर भी वे चुप रहे, क्योंकि उन्हें डर था कि मामला तूल पकड़ लेगा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, वैसे-वैसे उनकी हताशा बढ़ती गई। आखिरकार, तीन साल की लंबी जद्दोजहद के बाद, नवंबर 2025 में उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तुरंत रातानाडा पुलिस थाने को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
पुलिस कार्रवाई: आरोपी फरार, जांच शुरू रातानाडा पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 406 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने रोहित के बयान, बैंक ट्रांसफर रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। आरोपी डॉ. बबीता सिंह गुर्जर और बलदेव बेनीवाल की तलाश में टीमें लगाई गई हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी प्रॉपर्टी डीलरों के बीच सक्रिय थे और कई अन्य लोगों को भी इसी तरह फंसाने की कोशिश कर चुके हैं। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और बैंक रिकॉर्ड से आरोपी का पता लगाया जाएगा।एसपी सिटी जोधपुर ने बताया, "यह मामला साइबर ठगी का रूप ले चुका है। हम आरोपी को जल्द गिरफ्तार करेंगे और पीड़ित को न्याय दिलाएंगे। निवेश से पहले हमेशा दस्तावेज सत्यापित करें।" पुलिस ने शहरवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है, खासकर प्रॉपर्टी डीलिंग में।
निवेश के नाम पर ठगी का बढ़ता सिलसिला: सबक क्या? यह घटना जोधपुर सहित राजस्थान में प्रॉपर्टी निवेश के नाम पर हो रही ठगियों का एक उदाहरण है। पिछले एक साल में ऐसे दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं, जहां परिचितों ने ही लोगों को लूटा। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन ट्रांसफर और डिजिटल दस्तावेजों के बहाने ठग आसानी से कामयाब हो जाते हैं। पीड़ित रोहित ने अपील की है कि कोई भी निवेश करने से पहले वकील या पुलिस सत्यापन जरूरी है।