जोधपुर में शाही अंदाज में मनाई जाएगी होली ठाकुरजी के लिए 21 हजार रुपए की खास चांदी की पिचकारी तैयार...

जोधपुर में होली के अवसर पर मंदिरों में ठाकुरजी के लिए विशेष रूप से 21 हजार रुपए की चांदी की पिचकारी तैयार करवाई गई है। यह पिचकारी कोलकाता के कारीगरों द्वारा खास ऑर्डर पर बनाई गई है। साथ ही चांदी की डिब्बियों से गुलाल उड़ाया जाएगा। होली को लेकर जोधपुर के बाजार रंग-बिरंगे सामान और भक्ति गीतों से सराबोर हैं, जिससे शहर में उत्सव का माहौल बना हुआ है।

Mar 2, 2026 - 11:32
जोधपुर में शाही अंदाज में मनाई जाएगी होली ठाकुरजी के लिए 21 हजार रुपए की खास चांदी की पिचकारी तैयार...

जोधपुर। रंगों के पर्व होली को लेकर शहर में उत्साह चरम पर है। बाजारों में जहां आम लोगों के लिए रंग-गुलाल और पिचकारियों की खरीदारी तेज हो गई है, वहीं इस बार धार्मिक परंपरा और शाही संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। शहर के सरदारपुरा क्षेत्र में मंदिरों में विराजित ठाकुरजी के लिए विशेष रूप से चांदी की पिचकारियां तैयार करवाई गई हैं, जिनकी कीमत करीब 21 हजार रुपए बताई जा रही है।

कोलकाता के कारीगरों ने तैयार की खास पिचकारी

जानकारी के अनुसार, इन पिचकारियों को विशेष ऑर्डर पर तैयार कराया गया है। बारीक नक्काशी और पारंपरिक डिजाइन वाली ये पिचकारियां कोलकाता के अनुभवी कारीगरों द्वारा बनाई गई हैं। धार्मिक उपयोग को ध्यान में रखते हुए इन्हें पूरी तरह चांदी से तैयार किया गया है ताकि होली के दौरान ठाकुरजी को गुलाल और रंग अर्पित किए जा सकें।

चांदी की डिब्बी से उड़ाया जाएगा गुलाल

सिर्फ पिचकारी ही नहीं, बल्कि गुलाल रखने और उड़ाने के लिए भी चांदी की आकर्षक डिब्बियां बनाई गई हैं। मंदिरों में होली उत्सव के दौरान इन्हीं डिब्बियों से ठाकुरजी को गुलाल अर्पित किया जाएगा। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान के साथ खेली जाने वाली यह होली शुभ और मंगलकारी मानी जाती है।

होली के रंग में रंगे जोधपुर के बाजार

होली से पहले ही शहर के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। रंग-बिरंगी पिचकारियां, प्राकृतिक गुलाल, पारंपरिक सजावट और होली से जुड़े सामान की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ देखने को मिल रही है। भक्ति गीतों और फागुन के लोकगीतों की धुनों से बाजारों का माहौल पूरी तरह उत्सवी हो चुका है।

परंपरा और आस्था का अनोखा मेल

जोधपुर में मंदिरों में ठाकुरजी के साथ होली खेलने की परंपरा वर्षों पुरानी है। विशेष रूप से तैयार की गई चांदी की पिचकारी इस परंपरा को और भव्य बना रही है। श्रद्धालु इसे केवल उत्सव नहीं बल्कि भक्ति और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानते हैं।

श्रद्धालुओं में खास उत्साह

मंदिर समितियों के अनुसार, होली के दिन विशेष पूजा-अर्चना, फाग उत्सव और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है, जिससे शहर में धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल और भी जीवंत हो जाएगा।

इस बार जोधपुर में होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं बल्कि शाही परंपरा, आस्था और कला का अद्भुत संगम बनकर सामने आ रही है।