500 करोड़ के विकास कार्यों का भव्य शुभारंभ स्वच्छता और सुविधाओं की नई उड़ान...

जोधपुर में 26 अक्टूबर 2025 को 500 करोड़ रुपये की लागत वाले विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास होगा। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में केरू में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, काजरी फूड जोन, अटल क्रीड़ा स्थल, बासनी बेदा एसटीपी और ट्रांसपोर्ट नगर के कार्य शुरू होंगे। ये परियोजनाएं कचरा प्रबंधन, बिजली उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और शहर की सुंदरता को बढ़ाएंगी।

Oct 26, 2025 - 12:55
500 करोड़ के विकास कार्यों का भव्य शुभारंभ  स्वच्छता और सुविधाओं की नई उड़ान...

जोधपुर, 26 अक्टूबर 2025: सूर्यनगरी जोधपुर में आज रविवार को करीब 500 करोड़ रुपये की लागत वाले विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास होने जा रहा है। इन परियोजनाओं में कचरे से बिजली उत्पादन करने वाला वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, आधुनिक फूड जोन, यंत्रीकृत कचरा ट्रांसफर स्टेशन, अटल क्रीड़ा स्थल और बासनी बेदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, महापौर दक्षिण वनिता सेठ, और विधायक देवेंद्र जोशी इस समारोह में मौजूद रहेंगे, जबकि राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत और विधायक अतुल भंसाली वीसी के जरिए शामिल होंगे।

दिनभर के कार्यक्रमों का शेड्यूल

दोपहर 2:30 बजे: बासनी बेदा में 40 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का लोकार्पण। 

दोपहर 3:45 बजे: केरू में अत्याधुनिक वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का शुभारंभ।

शाम 4:45 बजे: गोलासनी में अटल क्रीड़ा स्थल का भूमि पूजन।

शाम 5:15 बजे: काजरी में फूड वेंडिंग जोन का उद्घाटन और निर्माणाधीन यंत्रीकृत ट्रांसफर स्टेशन का अवलोकन।

शाम 6:00 बजे: अमृत योजना 2.0 के तहत ट्रांसपोर्ट नगर के विकास कार्यों का लोकार्पण। 

वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट: कचरे से बिजली, पर्यावरण की रक्षा

जोधपुर शहर में प्रतिदिन करीब 700 टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसे केरू वेस्ट मैनेजमेंट साइट पर भेजा जाता है। वर्तमान में 150 टन कचरे का प्रबंधन करने वाला एमआरएफ प्लांट कार्यरत है, लेकिन शेष कचरे के लिए अब 100 करोड़ रुपये की लागत से वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट शुरू किया जा रहा है। मैसर्स जिंदल अर्बन वेस्ट मैनेजमेंट द्वारा संचालित इस प्लांट में रोजाना 400 टन कचरे का वैज्ञानिक निपटान होगा, जिससे 6 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। यह बिजली जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) को 7.42 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेची जाएगी। इस परियोजना से न केवल राजस्व प्राप्त होगा, बल्कि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी कम होगा।

काजरी फूड वेंडिंग जोन: ठेलों की समस्या का समाधान

शहर में अनधिकृत ठेलों और अतिक्रमण की समस्या से निपटने के लिए काजरी के पास 100 लाख रुपये की लागत से फूड वेंडिंग जोन बनाया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत निर्मित इस जोन में 54 वेंडिंग स्थल हैं, जहां सीवरेज, पानी, जल गृह स्थल और 15 सीटों वाला सुलभ कॉम्प्लेक्स उपलब्ध है। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 40 सोलर लाइट्स और 2 सोलर ट्री भी लगाए गए हैं।

यंत्रीकृत अपशिष्ट ट्रांसफर स्टेशन: कचरा प्रबंधन में क्रांति

जोधपुर में कचरे के प्रबंधन को और व्यवस्थित करने के लिए 19.47 करोड़ रुपये की लागत से यंत्रीकृत ट्रांसफर स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। इसकी क्षमता 180 टन प्रतिदिन होगी। यह स्टेशन कचरे के संग्रहण और परिवहन को पारदर्शी बनाएगा, जिससे कचरे का बिखराव और जानवरों द्वारा फैलने वाली गंदगी की समस्या खत्म होगी। इसमें 5.99 करोड़ रुपये निर्माण और 13.64 करोड़ रुपये यांत्रिकी, वाहन और तीन साल के रखरखाव पर खर्च होंगे।

अटल क्रीड़ा स्थल: खेल प्रेमियों के लिए नया केंद्र

कायलाना के पास नगर निगम की 107 बीघा जमीन पर अटल क्रीड़ा स्थल का निर्माण शुरू हो रहा है। 2025-26 बजट में घोषित इस प्रोजेक्ट के तहत वर्तमान में 1 करोड़ रुपये की लागत से बाउंड्री वॉल और बैडमिंटन कोर्ट बनाए जा रहे हैं। भविष्य में क्रिकेट स्टेडियम, फुटबॉल मैदान और टेनिस कोर्ट जैसी सुविधाएं डीबीएफओटी मोड पर विकसित की जाएंगी।

बासनी बेदा एसटीपी: सीवरेज शोधन में नई पहल

2012-13 के बजट में घोषित बासनी बेदा में 40 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट 71.46 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। एसबीआर तकनीक पर आधारित इस प्लांट में 54.37 करोड़ रुपये निर्माण और 17.09 करोड़ रुपये 15 साल के रखरखाव के लिए हैं। यह प्लांट भीतरी शहर, बंबा मोहल्ला, ईदगाह, रातानाडा और आंशिक शिकारगढ़ क्षेत्र के सीवरेज को शोधित करेगा।

जोधपुर के लिए मील का पत्थर

ये परियोजनाएं जोधपुर को स्वच्छ, व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। कचरे से बिजली उत्पादन, आधुनिक फूड जोन, खेल सुविधाएं और बेहतर सीवरेज प्रबंधन से शहरवासियों को नई सुविधाएं मिलेंगी, साथ ही पर्यावरण संरक्षण और राजस्व सृजन में भी योगदान होगा।