ममता की मार्मिक कहानी: मां को जगाने की कोशिश करता रहा मासूम… 3 दिन तक नहीं छोड़ा साथ

रेगिस्तान में सामने आया एक ऐसा मंजर… जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। एक मासूम को अब भी यकीन नहीं था कि जो साथ था… वो अब लौटकर नहीं आएगा…

Apr 12, 2026 - 18:01
ममता की मार्मिक कहानी: मां को जगाने की कोशिश करता रहा मासूम… 3 दिन तक नहीं छोड़ा साथ

मां… यह शब्द अपने आप में एक ऐसा एहसास है, जिसका कोई विकल्प नहीं। इंसान हो या जानवर, मां की ममता हर जीव के जीवन की सबसे बड़ी ताकत होती है। राजस्थान के Jaisalmer जिले से सामने आई एक घटना ने इस सच्चाई को फिर से जीवंत कर दिया है।

यह मार्मिक घटना Lathi Village की है, जहां एक ऊंटनी की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। लेकिन इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू तब सामने आया, जब उसका मासूम बच्चा तीन दिनों तक अपनी मां के शव के पास बैठा रहा—उसे यह एहसास ही नहीं था कि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं रही।

ट्रेन हादसे में गई मां की जान

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले रेलवे ट्रैक के पास चर रही ऊंटनी अचानक ट्रेन की चपेट में आ गई। हादसा इतना गंभीर था कि मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

उसके साथ उसका छोटा बच्चा भी था, जो इस दुर्घटना में बच तो गया, लेकिन अपनी मां को खो बैठा।

तीन दिन तक मां को जगाने की कोशिश

सबसे भावुक करने वाला दृश्य तब सामने आया, जब लोगों ने देखा कि ऊंटनी का बच्चा लगातार तीन दिनों तक अपनी मां के शव के पास बैठा रहा।

वह कभी अपनी मां को सिर से उठाने की कोशिश करता, तो कभी जोर-जोर से आवाज लगाकर उसे जगाने की कोशिश करता।

भीषण गर्मी, भूख और प्यास के बावजूद वह अपनी मां का साथ छोड़ने को तैयार नहीं था—मानो उसे लग रहा हो कि उसकी मां अभी उठ जाएगी।

ग्रामीणों की भर आईं आंखें

जब वहां से गुजर रहे किसान जमालदीन और रमेश कुमार की नजर इस दृश्य पर पड़ी, तो वे भी भावुक हो उठे। दुर्गंध के कारण जब वे मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि मासूम बच्चा अपनी मृत मां के पास बैठा रो रहा है।

यह दृश्य इतना मार्मिक था कि देखने वालों की आंखें नम हो गईं।

रेस्क्यू कर बचाई गई मासूम की जान

ग्रामीणों ने तुरंत इस घटना की जानकारी स्थानीय लोगों और संस्था से जुड़े लोगों को दी। इसके बाद गौसेवकों की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद बच्चे को उसकी मां के शव से अलग किया गया।

ऊंटनी के शव को सम्मानपूर्वक दफनाया गया, जबकि बच्चे को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।

अब गौशाला में हो रही देखभाल

मासूम ऊंट के बच्चे को भादरिया गौशाला पहुंचाया गया है, जहां उसकी देखभाल की जा रही है। तीन दिनों तक भूखे-प्यासे रहने के कारण वह काफी कमजोर हो गया था।

फिलहाल उसे भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा दी जा रही है, ताकि वह जल्द स्वस्थ हो सके।

एक घटना… जो बहुत कुछ सिखा गई

यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि ममता और रिश्तों की गहराई को दर्शाने वाली कहानी है।

यह हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि मां का प्यार किसी भाषा या प्रजाति का मोहताज नहीं होता—वह हर जीव के दिल में बसता है।