पांच जिलों में तीन दिनों के लिए इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाएं बंद...जानिए आपके जिले में ऐसा क्या हुआ !
मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में आधी रात हुए बम हमले में दो मासूम बच्चों की मौत हो गई, जबकि उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गईं। संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा किए गए इस हमले के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है। हालात को देखते हुए सरकार ने पांच जिलों में तीन दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं।
पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। बिष्णुपुर जिला के मोइरांग ट्रोंग्लाओबी इलाके में आधी रात हुए एक बम धमाके में दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गईं।
सोते हुए परिवार पर हमला
घटना देर रात करीब एक बजे की है। घर के अंदर एक पांच साल का बच्चा, छह महीने की मासूम बच्ची और उनकी मां सो रहे थे। तभी अचानक एक बम घर पर आ गिरा और जोरदार धमाका हुआ। इस हमले में दोनों बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी मां बुरी तरह घायल हो गईं। यह सिर्फ एक हमला नहीं, यह उस भरोसे पर वार है, जहां घर सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है।
5 जिलों में इंटरनेट बंद
घटना के बाद हालात को देखते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मणिपुर सरकार ने इंफाल वेस्ट, इंफाल ईस्ट, थोउबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में तीन दिनों के लिए इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाएं बंद कर दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला एहतियातन लिया गया है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह और गलत जानकारी फैलने से रोका जा सके।
पहले भी तनाव का केंद्र रहा इलाका
जिस मोइरांग ट्रोंग्लाओबी इलाके में यह हमला हुआ, वह पहले भी जातीय हिंसा का केंद्र रह चुका है। 2023 और 2024 के दौरान यहां कई बार गोलीबारी और तनाव की घटनाएं सामने आई थीं।
नेताओं ने की कड़ी निंदा
इस घटना के बाद स्थानीय भाजपा विधायक टीएच शांति सिंह ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे बेहद क्रूर और अमानवीय बताते हुए कहा कि मासूम बच्चों की हत्या किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जा सकती। साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की।
सबसे बड़ा सवाल
लेकिन इस दर्दनाक घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—“आखिर कब तक मासूम इस हिंसा की कीमत चुकाते रहेंगे?” यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब इस तरह की हिंसा पर पूरी तरह रोक लगेगी और कब आम लोगों को सुरक्षित जीवन मिल पाएगा।