जयपुर में सरकारी कर्मचारियों का जोरदार प्रदर्शन: नाचते-गाते निकाली रैली, प्रमुख सड़कों पर लगा लंबा जाम
जयपुर में 12 जनवरी 2026 को अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासभा के बैनर तले हजारों सरकारी और संविदा कर्मचारी सड़कों पर उतरे। अल्बर्ट हॉल से सिविल लाइंस फाटक तक निकाली गई रैली में कर्मचारी नाचते-गाते और नारे लगाते हुए शामिल हुए, जिससे रामबाग सर्किल से अजमेरी गेट और स्टैच्यू सर्किल तक लंबा जाम लगा। प्रमुख मांगें: पुरानी पेंशन योजना बहाल करना, प्रमोशन, संविदा-ठेका कर्मियों का नियमितीकरण, ट्रांसफर नीति लागू करना और निजीकरण रोकना। प्रदेश अध्यक्ष महावीर शर्मा ने सरकार पर 2 साल से संवाद न करने का आरोप लगाया।
जयपुर, 12 जनवरी 2026: राजस्थान की राजधानी जयपुर आज सरकारी और संविदा कर्मचारियों के बड़े पैमाने पर प्रदर्शन का गवाह बनी। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासभा के बैनर तले हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए और अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन की शुरुआत अल्बर्ट हॉल के पास से हुई, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्रित हुए। यहां से वे रैली के रूप में सिविल लाइंस फाटक की ओर बढ़े। इस दौरान कर्मचारी नाचते-गाते, ढोल-नगाड़ों के साथ नारे लगाते हुए आगे बढ़े, जिससे माहौल उत्सव जैसा लग रहा था, लेकिन यह उनका विरोध प्रदर्शन था। रैली के कारण रामबाग सर्किल से अजमेरी गेट तक और स्टैच्यू सर्किल से राजमंदिर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया। कई जगहों पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी हुई।
प्रमुख मांगें क्या हैं? प्रदर्शनकारी कर्मचारी अपनी कई पुरानी और लंबित मांगों को लेकर आक्रोशित हैं। इनमें शामिल हैं:
पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली: कर्मचारी नई पेंशन स्कीम (NPS) के खिलाफ हैं और पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित और निश्चित पेंशन मिल सके।प्रमोशन में तेजी: लंबे समय से रुके प्रमोशन को लागू करने की मांग।संविदा और ठेका कर्मचारियों का नियमितीकरण: हजारों संविदा और ठेका कर्मियों को स्थायी करने की पुरजोर मांग।ट्रांसफर नीति का प्रभावी क्रियान्वयन: पारदर्शी और न्यायपूर्ण ट्रांसफर नीति लागू करने की मांग।निजीकरण रोकना: सरकारी विभागों में बढ़ते निजीकरण के खिलाफ विरोध।
अन्य मांगें: वेतन विसंगति दूर करना, महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी आदि।संगठन के प्रदेश अध्यक्ष महावीर शर्मा ने बताया कि पिछले 2 वर्षों से सरकार कर्मचारियों से संवाद करने में असफल रही है। बजट घोषणाओं के लिए हर वर्ग से सुझाव लिए जाते हैं, लेकिन कर्मचारियों की बात सुनने के लिए सरकार के पास महज 40 सेकंड हैं। उन्होंने कहा, "सरकार की इस उपेक्षा के कारण मजबूरन हमें सड़कों पर उतरना पड़ा। हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं, लेकिन अगर सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।"
यह प्रदर्शन राज्य के लगभग 8 लाख सरकारी कर्मचारियों की एकजुटता का प्रतीक है। पिछले कुछ महीनों में भी महासंघ ने संघर्ष चेतना यात्रा और अन्य कार्यक्रमों के जरिए अपनी मांगें उठाई हैं, लेकिन अब जयपुर की सड़कों पर यह बड़ा प्रदर्शन सरकार पर दबाव बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।