“एक फ्लैट में चल रहा था बड़ा खेल… विदेश नौकरी के नाम पर ठगी का ऐसा जाल, पुलिस रेड में हुआ चौंकाने वाला खुलासा”
विदेश में नौकरी का सपना दिखाकर एक संगठित गिरोह लोगों को ठगने का बड़ा खेल चला रहा था। सोशल मीडिया के जरिए भरोसा जीतकर लाखों रुपये वसूले जा रहे थे। लेकिन अचानक हुई पुलिस की कार्रवाई ने इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें खोल दीं और कई अहम राज सामने आ गए।
जयपुर से एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। डीएसटी (वेस्ट) पुलिस ने झोटवाड़ा इलाके में देर रात कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान पुलिस ने मौके से 50 पासपोर्ट, 32 मुहरें, मोबाइल फोन और कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं।
कैसे हुई कार्रवाई?
डीएसटी वेस्ट टीम को सूचना मिली थी कि झोटवाड़ा स्थित शिवशंकर टावर अपार्टमेंट के चौथे फ्लोर पर एक फ्लैट में कुछ संदिग्ध लोग छिपे हुए हैं और वहां फर्जीवाड़े की गतिविधियां चल रही हैं।
सूचना मिलते ही डीएसटी इंचार्ज गणेश सैनी के नेतृत्व में टीम ने देर रात फ्लैट पर दबिश दी। रेड के दौरान पुलिस ने चार लोगों को मौके से पकड़ लिया।
पकड़े गए आरोपी कौन हैं?
पुलिस ने जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान इस प्रकार हुई है—
- लोकेंद्र (कुचामन निवासी) – मुख्य आरोपी
- विजयपाल सिंह (कुचामन निवासी)
- लोकश (झुंझुनूं निवासी)
- गोगराज (रींगस निवासी)
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि लोकेंद्र सिंह पहले से वांटेड आरोपी था, जो लंबे समय से इस गिरोह को चला रहा था।
फ्लैट से क्या-क्या मिला?
छापेमारी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में संदिग्ध सामान मिला—
- 50 पासपोर्ट
- 32 फर्जी/संदिग्ध मुहरें
- 3 मोबाइल फोन
- 5 हिसाब-किताब की डायरी
- कई दस्तावेज और रिकॉर्ड
इन सभी चीजों को जब्त कर लिया गया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
कैसे चलता था पूरा फ्रॉड नेटवर्क?
जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह “Diamond Visa Service” के नाम से फर्जी कंपनी चला रहा था।
इस फर्जी फर्म के जरिए लोगों को आकर्षित किया जाता था और दावा किया जाता था कि—
- विदेश में ड्राइवर, माली, मिस्त्री जैसी नौकरियां दिलवाई जाएंगी
- वीजा और जॉब पूरी तरह से प्रोसेस्ड होगी
- भरोसेमंद विदेशी नौकरी का ऑफर है
इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Instagram और Facebook के जरिए लोगों से संपर्क किया जाता था और उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी।
कैसे करते थे ठगी?
गिरोह लोगों को “विदेश में नौकरी” का सपना दिखाकर—
- वीजा प्रोसेसिंग फीस
- नौकरी दिलाने का कमीशन
- डॉक्यूमेंटेशन चार्ज
के नाम पर लाखों रुपये वसूलता था।
लेकिन असल में न कोई नौकरी होती थी और न ही कोई वैध वीजा प्रोसेस।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
पुलिस के अनुसार यह सिर्फ एक छोटा गिरोह नहीं बल्कि एक ऑर्गेनाइज्ड फ्रॉड नेटवर्क है, जो लंबे समय से सक्रिय था।
बरामद किए गए पासपोर्ट और दस्तावेजों से यह भी संकेत मिल रहे हैं कि इनके कई और पीड़ित हो सकते हैं, जिनसे अब संपर्क करने की कोशिश की जा रही है।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि—
- इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है
- कितने लोगों को अब तक ठगा गया है
- पैसों का लेन-देन कहां-कहां हुआ है
साथ ही झोटवाड़ा थाना पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
बड़ा संदेश
यह मामला एक बार फिर चेतावनी देता है कि विदेश में नौकरी के नाम पर चल रहे फर्जी एजेंटों से सावधान रहने की जरूरत है। बिना वेरिफिकेशन किसी भी एजेंसी को पैसे देना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।