दवा लेने गए मरीजों के साथ आखिर क्या हो रहा था? एम्स का आदेश मचा रहा हलचल!

एम्स जोधपुर ने अस्पताल व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है, जिसके बाद अब मरीजों को दवाइयों के लिए बाहर भटकने की जरूरत नहीं होगी। सभी जरूरी दवाएं अब अस्पताल के अंदर ही उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन इस फैसले के पीछे सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि उस पुराने सिस्टम पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसमें मरीजों को अक्सर बाहर की दुकानों की ओर मोड़ दिया जाता था। अब प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी या मरीजों को बाहर भेजने पर कार्रवाई होगी। सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह सिर्फ सुधार है या किसी लंबे समय से चल रहे खेल पर रोक?

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor
April 16, 2026 • 3:05 PM  10
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राजस्थान
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दवा लेने गए मरीजों के साथ आखिर क्या हो रहा था? एम्स का आदेश मचा रहा हलचल!
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16 Apr 2026
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दवा लेने गए मरीजों के साथ आखिर क्या हो रहा था? एम्स का आदेश मचा रहा हलचल!

अस्पताल… जहां इंसान इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचता है, लेकिन कई बार उसे इलाज से ज्यादा दवाइयों की भागदौड़ परेशान कर देती है। लंबी कतारें, डॉक्टर की पर्ची, और फिर सबसे बड़ा सवाल—दवा कहां से मिलेगी? कौन सी दुकान सही है? और क्या वहां से दवा लेना सुरक्षित और सस्ता होगा भी या नहीं?

इन्हीं समस्याओं को खत्म करने की दिशा में अब एक अहम कदम उठाया गया है। यह पहल एम्स जोधपुर (AIIMS Jodhpur) की ओर से की गई है, जिसका उद्देश्य मरीजों को अस्पताल परिसर के भीतर ही पूरी दवा सुविधा उपलब्ध कराना और बाहरी अनावश्यक निर्भरता को खत्म करना है।

मरीजों की सबसे बड़ी परेशानी का समाधान

अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को अक्सर ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता था, जहां डॉक्टर की पर्ची मिलने के बाद उन्हें यह कहा जाता था कि संबंधित दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं है और उसे बाहर से खरीदना होगा।

इस स्थिति में मरीज मजबूरी में अस्पताल के बाहर स्थित दुकानों का रुख करते थे, जहां कई बार न केवल अधिक कीमत चुकानी पड़ती थी, बल्कि दवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल उठते थे।

एम्स जोधपुर का सख्त निर्देश

इन सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एम्स जोधपुर के डायरेक्टर डॉ. जी. डी. पूरी ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि अस्पताल में डॉक्टर द्वारा लिखी जाने वाली सभी आवश्यक दवाइयां अब अस्पताल परिसर के भीतर ही उपलब्ध कराई जाएंगी।

फिलहाल एम्स जोधपुर में दो से तीन प्रमुख दवा काउंटर संचालित हैं, जिनमें “अमृत स्टोर” और “सेंट्रल स्टोर” शामिल हैं। मरीज अपनी पर्ची दिखाकर वहीं से आसानी से दवाइयां प्राप्त कर सकते हैं।

इसके अलावा, भविष्य में OPD गेट नंबर 3 के पास एक नया दवा काउंटर भी शुरू करने की योजना है, जिससे भीड़ कम होगी और मरीजों को और अधिक सुविधा मिलेगी।

बाहर से दवा दिलाने वालों पर कार्रवाई

अस्पताल प्रशासन ने इस व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सख्ती भी बढ़ा दी है। निर्देशों में साफ कहा गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति—चाहे वह अस्पताल का कर्मचारी हो या बाहरी एजेंट—मरीजों को बाहर से दवा खरीदने के लिए मजबूर करता है या किसी विशेष दुकान की ओर भेजता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, कई अस्पतालों के आसपास ऐसे लोग सक्रिय रहते हैं, जिन्हें आम भाषा में “लपके” कहा जाता है। ये मरीजों को भ्रमित कर विशेष दुकानों तक ले जाते हैं, जहां दवाइयां अधिक कीमत पर बेची जाती हैं। इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

हर दिन हजारों मरीजों को राहत

आंकड़ों के अनुसार, एम्स जोधपुर की OPD में प्रतिदिन लगभग 7,000 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के लिए यदि दवाइयों की व्यवस्था सही न हो, तो यह उनके लिए समय, पैसा और मानसिक तनाव—तीनों का कारण बन सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए अब दवाइयों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है। इसमें यह दर्ज किया जाता है कि किस मरीज को कौन सी दवा दी गई, किस डॉक्टर ने लिखी और कब दी गई। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बनती है।

मरीजों के लिए आसान और सुरक्षित व्यवस्था

नई व्यवस्था के तहत अब मरीजों को एक सरल प्रक्रिया से गुजरना होगा—
अस्पताल पहुंचना → डॉक्टर को दिखाना → पर्ची लेना → और सीधे अस्पताल के काउंटर से दवा प्राप्त करना।

इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि बाहर की दुकानों पर निर्भरता भी खत्म होगी। साथ ही मरीजों को यह भरोसा भी मिलेगा कि उन्हें सही और मानक दवा मिल रही है।

जागरूकता भी जरूरी

हालांकि यह व्यवस्था अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन मरीजों और उनके परिजनों की भूमिका भी उतनी ही अहम है। यदि कोई उन्हें बाहर से दवा खरीदने के लिए दबाव डालता है या किसी विशेष दुकान का नाम बताता है, तो उन्हें सतर्क रहना चाहिए और पहले अस्पताल काउंटर से जानकारी लेनी चाहिए।

यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी या दबाव महसूस हो, तो तुरंत इसकी शिकायत भी की जानी चाहिए।

एक सकारात्मक बदलाव की ओर कदम

एम्स जोधपुर की यह पहल केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि अस्पताल और मरीज के बीच भरोसा भी मजबूत होगा।

धीरे-धीरे ऐसी व्यवस्थाएं स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव का संकेत देती हैं, जहां मरीज को भटकना नहीं पड़ता, बल्कि उसे एक ही स्थान पर पूरा इलाज और सुविधा मिलती है।

निष्कर्ष

इलाज सिर्फ डॉक्टर और दवाइयों से नहीं होता, बल्कि उस भरोसे से होता है जो मरीज अस्पताल पर करता है। जब यह भरोसा मजबूत होता है, तो स्वास्थ्य व्यवस्था भी मजबूत बनती है।

एम्स जोधपुर की यह पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो आने वाले समय में मरीजों के लिए राहत और व्यवस्था दोनों लेकर आएगी।

TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor

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