“सीमा के पास छिपा बड़ा खेल… हाई-टेक जासूसी नेटवर्क का खुलासा, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट!”
देश की सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अत्याधुनिक तरीके से संवेदनशील इलाकों की निगरानी की जा रही थी। तकनीक के जरिए चल रहे इस संदिग्ध नेटवर्क ने सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है। जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं और पूरे मामले की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं।
देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसमें सेना और संवेदनशील सैन्य ठिकानों की निगरानी सोलर-पावर्ड सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जा रही थी। यह कैमरे ऐसे स्थानों पर लगाए गए थे जहां से सैन्य गतिविधियों की लाइव जानकारी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI तक पहुंचाई जा रही थी।दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कई राज्यों में दबिश दी है और अब तक 11 जासूसों और संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है।
कैसे चल रहा था जासूसी का पूरा खेल?
जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था।
- सेना और अर्धसैनिक बलों के ठिकानों के आसपास सोलर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए
- इन कैमरों से लाइव फुटेज पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स तक भेजा जा रहा था
- ऑपरेशन के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी नेटवर्क का हाथ बताया जा रहा है
- सूत्रों के अनुसार, इन कैमरों को इस तरह सेट किया गया था कि वे लगातार बिना किसी रुकावट के निगरानी कर सकें।
किन-किन जगहों पर मिला नेटवर्क?
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और अन्य एजेंसियों की जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था।अब तक जिन जगहों से सोलर कैमरे बरामद किए गए हैं, उनमें शामिल हैं:
- अलवर (राजस्थान)
- बीकानेर (राजस्थान)
- कपूरथला
- जालंधर
- पठानकोट
- पटियाला
- मोगा
- अंबाला
- कठुआ
इन सभी स्थानों पर सैन्य या सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील इलाके हैं।
राजस्थान में बड़ी कार्रवाई
राजस्थान के अलवर और बीकानेर में लगे संदिग्ध सोलर कैमरों को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हटवाया है।
- अलवर से एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है
- अन्य संदिग्धों की तलाश में सर्च ऑपरेशन जारी है
- टीम लगातार पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है
बब्बर खालसा से कनेक्शन का शक
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा जासूसी मॉड्यूल केवल ISI तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका लिंक प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से भी जुड़ा पाया गया है।
आरोपियों को यह टास्क दिया गया था कि वे—
- सैन्य ठिकानों की रेकी करें
- फोटो और वीडियो बनाएं
- और संवेदनशील जगहों पर कैमरे इंस्टॉल करें
डिजिटल सबूतों से बड़ा खुलासा
गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस से भारी मात्रा में डेटा बरामद हुआ है, जिसमें शामिल हैं—
- सैन्य ठिकानों की तस्वीरें
- वीडियो रिकॉर्डिंग
- लोकेशन डेटा
- संवेदनशील मूवमेंट की जानकारी
यह डेटा जांच एजेंसियों के लिए इस पूरे नेटवर्क को समझने में अहम साबित हो रहा है।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले दिल्ली और पंजाब में भी इसी तरह के मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है।
- कुल 11 जासूस और आतंकी गिरफ्तार किए गए थे
- कई जगहों से कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुए थे
जांच अभी जारी
फिलहाल दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, खुफिया एजेंसियां और अन्य सुरक्षा इकाइयां मिलकर इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं।एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ एक छोटा मॉड्यूल नहीं, बल्कि एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क हो सकता है।
निष्कर्ष
यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चेतावनी है, जहां तकनीक का इस्तेमाल जासूसी के लिए किया जा रहा था। सोलर कैमरों जैसे साधारण उपकरणों के जरिए सैन्य गतिविधियों की निगरानी एक नए तरह के खतरे की ओर इशारा करती है।जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई हैं, और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं।