बाड़मेर-बालोतरा जिला सीमा फेरबदल: धोरीमन्ना में पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी का अनिश्चितकालीन धरना जारी, ठंड में गुजारी दूसरी रात

राजस्थान सरकार द्वारा 31 दिसंबर को जारी अधिसूचना से बाड़मेर-बालोतरा जिलों की सीमाओं में फेरबदल किया गया, जिसमें धोरीमन्ना और गुड़ामालानी को बालोतरा में शामिल कर बायतु को बाड़मेर में लाया गया। पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी के नेतृत्व में धोरीमन्ना में अनिश्चितकालीन धरना जारी है, जहां ठंड में रातें गुजारकर विरोध जताया जा रहा है। कांग्रेस इसे जनविरोधी और राजनीतिक मकसद वाला बता रही है, जबकि भाजपा समर्थक खुश हैं। यह फैसला प्रशासनिक सुविधाओं और सीमावर्ती क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है।

Jan 6, 2026 - 10:55
बाड़मेर-बालोतरा जिला सीमा फेरबदल: धोरीमन्ना में पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी का अनिश्चितकालीन धरना जारी, ठंड में गुजारी दूसरी रात

राजस्थान के बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में हुए हालिया फेरबदल के खिलाफ धोरीमन्ना में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी के नेतृत्व में चल रहा धरना चौथे दिन भी जारी है। कड़कड़ाती ठंड के बावजूद हेमाराम चौधरी ने लगातार दूसरी रात धरना स्थल पर गुजारी और ऐलान किया कि जब तक उनके शरीर में सांस है, तब तक वे धरने पर डटे रहेंगे।

क्या है विवाद की जड़? राजस्थान सरकार ने 31 दिसंबर 2025 को राजस्व विभाग के माध्यम से एक अधिसूचना जारी की, जो 2 जनवरी 2026 की रात को सार्वजनिक हुई। इस अधिसूचना के तहत:बाड़मेर जिले से धोरीमन्ना और गुड़ामालानी उपखंडों को हटाकर नए जिले बालोतरा में शामिल कर दिया गया।वहीं, बालोतरा से बायतु उपखंड को वापस बाड़मेर जिले में जोड़ा गया।इसके अलावा, गुड़ामालानी और बायतु विधानसभा क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में भी बदलाव किए गए, जैसे बायतु की गिड़ा और पाटोदी तहसील बालोतरा में बनी रहीं, जबकि मुख्य बायतु बाड़मेर में चला गया।

नए परिवर्तन के बाद: बालोतरा जिले में अब 5 उपखंड (बालोतरा, सिणधरी, सिवाना, धोरीमन्ना और गुड़ामालानी) हो गए हैं।बाड़मेर जिले में 7 उपखंड (बाड़मेर, गडरा रोड, चौहटन, रामसर, बायतु, सेडवा और शिव) शामिल हैं।यह बदलाव पाकिस्तान से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों को प्रभावित करता है, जिससे प्रशासनिक सुविधाओं, दूरी और जनसुविधा पर गहरा असर पड़ेगा।

हेमाराम चौधरी का कड़ा विरोध गुड़ामालानी से छह बार विधायक रहे और पूर्व में कैबिनेट मंत्री तथा नेता प्रतिपक्ष रह चुके हेमाराम चौधरी ने इस फैसले को "जनता की सुविधा और भौगोलिक वास्तविकताओं के खिलाफ" बताया। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा:"मेरे शरीर में जब तक सांस है, तब तक मैं यहां धरने पर बैठा रहूंगा। मैं राजनीति करने नहीं आया हूं। मैंने पिछला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा, लोकसभा का टिकट भी ठुकराया था।""ठंड, गर्मी या बरसात से हम नहीं घबराते। हमारे पास दूसरा कोई पावर नहीं है, इसलिए धरने पर बैठे रहेंगे। मियाद ईश्वर के हाथ में है।"धोरीमन्ना कस्बे के नेशनल हाईवे 68 पर बिजली घर के सामने धरना स्थल पर पूर्व मंत्री जनता के साथ डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालकर एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अधिसूचना निरस्त करने का ज्ञापन भी सौंपा है।

राजनीतिक घमासान कांग्रेस का आरोप: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे "तुगलकी फरमान" करार दिया और कहा कि यह प्रशासनिक दृष्टि से तर्कसंगत नहीं है। गुड़ामालानी क्षेत्र की जनता के लिए जिला मुख्यालय की दूरी बढ़ जाएगी, जो अन्याय है। कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी (बायतु से) ने इसे राजनीतिक मकसद से किया गया बदलाव बताया और कहा कि वे जनता के साथ खड़े हैं।भाजपा की खुशी: अधिसूचना जारी होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर खुशी मनाई। वे इसे सही निर्णय बता रहे हैं।प्रभाव: यह बदलाव विधानसभा परिसीमन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। गुड़ामालानी क्षेत्र से भाजपा मंत्री केके विश्नोई हैं, जबकि बायतु से कांग्रेस के हरीश चौधरी।

जनता की चिंता धोरीमन्ना और गुड़ामालानी के लोग इसे जनविरोधी बता रहे हैं। नए बदलाव से राजस्व, विकास और प्रशासनिक कार्यों के लिए लोगों को अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे समय, धन और मेहनत बर्बाद होगी। सोशल मीडिया से सड़क तक विरोध की लहर है, जबकि कुछ क्षेत्रों में समर्थन भी दिख रहा है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.