हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री विरोध: संगरिया में महापंचायत, किसानों का इकट्ठा होना और प्रशासन की सतर्कता

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के संगरिया में राठीखेड़ा गांव की ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री के विरोध में आज (7 जनवरी 2026) बड़ी किसान महापंचायत आयोजित की जा रही है। पंजाब के किसान नेता जोगिंदर सिंह उग्राहां के नेतृत्व में हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर के साथ हरियाणा और पंजाब से हजारों किसान धान मंडी पहुंचे। महापंचायत से पहले किसान स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई और 'लाल सलाम' के नारे लगे। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं, धारा 163 लागू की है और रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है। किसान फैक्ट्री का MoU रद्द करने और दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं।

Jan 7, 2026 - 13:33
हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री विरोध: संगरिया में महापंचायत, किसानों का इकट्ठा होना और प्रशासन की सतर्कता

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में टिब्बी तहसील के राठीखेड़ा गांव में निर्माणाधीन ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड की एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में किसानों का आंदोलन लंबे समय से चल रहा है। आज (7 जनवरी 2026) संगरिया कस्बे की धान मंडी में इस विरोध को लेकर एक बड़ी महापंचायत आयोजित की जा रही है। यह महापंचायत पिछले महीने दिसंबर में हुई घटनाओं के बाद बुलाई गई है, जहां विरोध हिंसक हो गया था और अब किसान फैक्ट्री के MoU को रद्द करने तथा उन पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

महापंचायत की तैयारियां और किसानों का जुटना

किसान नेता जोगिंदर सिंह उग्राहां के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान संगरिया की धान मंडी पहुंच रहे हैं। ये किसान हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब से भी आ रहे हैं। किसानों के हाथों में संघर्ष समिति के झंडे और सिर पर पीली पगड़ियां नजर आ रही हैं। महापंचायत से पहले किसानों ने नगर परिषद कार्यालय में बने किसान स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। यहां शहीद किसानों के सम्मान में 'लाल सलाम' और 'जब तक सूरज-चांद रहेगा, शहीद किसानों का नाम रहेगा' जैसे नारे लगाए गए।यह महापंचायत दिसंबर 2025 में हुई पिछली महापंचायतों की कड़ी में है। दिसंबर में हनुमानगढ़ जंक्शन और टिब्बी में हुई महापंचायतों के बाद किसानों ने 20 दिन का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन मांगें पूरी नहीं होने पर अब संगरिया में यह नई सभा बुलाई गई है। किसान नेता उग्राहां पहले भी इस आंदोलन में शामिल हो चुके हैं और पंजाब के किसान संगठनों का समर्थन दे रहे हैं।

प्रशासन की सख्ती और सुरक्षा व्यवस्था

महापंचायत को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। संगरिया तहसील और उसके 10 किलोमीटर दायरे में मंगलवार शाम 6 बजे से बुधवार रात 12 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। इलाके में भारतीय दंड संहिता की धारा 163 (बीएनएस) लागू कर दी गई है, जो पांच या इससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाती है। संगरिया कस्बे में प्रवेश के प्रमुख चार मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है और बाहर से आने वालों की सघन जांच की जा रही है।पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है। 600 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिनमें श्रीगंगानगर, बीकानेर और चूरू से अतिरिक्त जाब्ता मंगवाया गया है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल मौजूद है ताकि किसी तरह की अनहोनी न हो। प्रशासन दिसंबर में टिब्बी की घटना से सबक लेते हुए हर संभव सावधानी बरत रहा है।

विरोध की वजह: एथेनॉल फैक्ट्री का विवाद

यह विरोध चंडीगढ़ स्थित ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा राठीखेड़ा में लगाई जा रही अनाज आधारित एथेनॉल फैक्ट्री (क्षमता 1320 KLPD और 40 MW पावर प्लांट) के खिलाफ है। यह परियोजना करीब 450 करोड़ रुपये की है और 2022 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय MoU साइन हुआ था। किसानों का आरोप है कि फैक्ट्री से भूजल स्तर गिरेगा, पानी और हवा प्रदूषित होगी, जमीन बंजर हो जाएगी और स्थानीय आजीविका पर संकट आएगा। वे फैक्ट्री को किसी अन्य जगह शिफ्ट करने या पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहे हैं।दिसंबर 2025 में विरोध उग्र हो गया था। 10 दिसंबर को महापंचायत के बाद किसानों ने फैक्ट्री की दीवार तोड़ी, ऑफिस में आग लगाई और कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया। पुलिस के लाठीचार्ज और आंसू गैस में कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया सहित कई लोग घायल हुए। इसके बाद गिरफ्तारियां हुईं और मुकदमे दर्ज किए गए। किसान अब इन मुकदमों की वापसी और MoU रद्द करने पर अड़े हैं।

आगे की स्थिति

महापंचायत में हजारों किसानों के जुटने की उम्मीद है। किसान नेता शांतिपूर्ण प्रदर्शन की बात कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने को तैयार है। यह आंदोलन पर्यावरण, जल संरक्षण और किसान अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है, जिसमें पंजाब और हरियाणा के किसान संगठन भी सक्रिय समर्थन दे रहे हैं। महापंचायत के बाद किसानों की आगे की रणनीति स्पष्ट हो सकती है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.