एक किसान ने मौत के बाद भी तीन लोगों को दी नई जिंदगी: अने सिंह के अंगदान की भावुक कहानी

58 वर्षीय किसान अने सिंह ने खेती-किसानी करते हुए ब्रेन डेड होने के बाद अपने परिवार के नेक फैसले से लिवर और दोनों किडनी दान कीं, जिससे जोधपुर एम्स और जयपुर एसएमएस में तीन गंभीर मरीजों को नई जिंदगी मिली। मौत के बाद भी तीन परिवारों में उम्मीद जगा देने वाली यह भावुक कहानी अंगदान की महत्ता सिखाती है।

Jan 31, 2026 - 15:01
एक किसान ने मौत के बाद भी तीन लोगों को दी नई जिंदगी: अने सिंह के अंगदान की भावुक कहानी

जोधपुर। एक साधारण किसान की असाधारण इंसानियत ने मौत के बाद भी जिंदगी के चिराग जलाए रखे। पाली जिले के जोजावर थाना क्षेत्र के गोलकी खोखरा गांव के रहने वाले 58 वर्षीय अने सिंह, जो जीवन भर खेती-किसानी में लगे रहे, ने अपने ब्रेन डेड होने के बाद अपने अंग दान करके तीन गंभीर मरीजों को नई जिंदगी का तोहफा दिया। जोधपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में यह नेक काम हुआ, जहां परिवार के साहसिक फैसले ने कई परिवारों में उम्मीद की किरण जगा दी।

घटना कैसे शुरू हुई?

19 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 1 बजे अने सिंह अपने घर पर खाना खा रहे थे। अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। परिवार ने उन्हें तुरंत जोजावर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया। वहां से डॉक्टरों ने उन्हें पाली के बांगड़ अस्पताल रेफर कर दिया। सीटी स्कैन के बाद उनकी हालत और गंभीर पाई गई, जिसके चलते उन्हें उसी शाम जोधपुर के एम्स अस्पताल लाया गया।

एम्स में करीब 10-11 दिनों तक उनका इलाज चला, लेकिन ब्रेन डेड हो जाने के कारण 30 जनवरी 2026 की सुबह उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने बताया कि ब्रेन डेड होने पर सांस लेने का फंक्शन रुक जाता है, लेकिन वेंटिलेटर के जरिए आर्टिफिशियल तरीके से ऑक्सीजन शरीर के अंगों तक पहुंचाई जाती है, जिससे अंगों को कुछ समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और उन्हें ट्रांसप्लांट के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

परिवार का नेक फैसला

अने सिंह के बेटे पूरण सिंह ने बताया कि परिवार ने गहन विचार-विमर्श के बाद 30 जनवरी को उनके अंग दान करने की सहमति दी। डॉक्टरों की सलाह और परिवार की सहमति से उनकी दोनों किडनी और लिवर दान किए गए।एक किडनी जोधपुर एम्स में ही भर्ती एक मरीज को सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट कर दी गई।लिवर भी एम्स में भर्ती एक अन्य मरीज को लगाया जाएगा।दूसरी किडनी को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल भेजा गया, जहां इसे एक जरूरतमंद मरीज में प्रत्यारोपित किया जाएगा।इस तरह अकेले अने सिंह के अंगदान से तीन अलग-अलग मरीजों की जिंदगी बच गई।

परिवार की भावनाएं

पूरण सिंह ने भावुक होकर कहा, "पिता भले ही अब हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन उनकी वजह से तीन लोगों को नई जिंदगी मिलेगी। यह हमारे लिए सबसे बड़ी सांत्वना है।" अने सिंह के परिवार में पत्नी पताशी देवी (53 वर्ष), तीन बेटे - रतन सिंह (25), पूरण सिंह (21), प्रवीण सिंह (15) और एक बेटी इंद्रा (29) हैं। पूरा परिवार इस दुखद घड़ी में भी अंगदान के फैसले पर गर्व महसूस कर रहा है।

डॉक्टरों का बयान

एम्स के डॉक्टर सादिक ने बताया कि ब्रेन शरीर के सभी अंगों को नियंत्रित करता है, खासकर सांस लेने की क्रिया को। जब यह फंक्शन रुक जाता है, तो वेंटिलेटर से ऑक्सीजन सप्लाई करके अंगों को सुरक्षित रखा जाता है, ताकि उन्हें ट्रांसप्लांट किया जा सके। अने सिंह का यह मामला अंगदान की महत्ता को दर्शाता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों में।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.