दौसा जिला अस्पताल में दर्द से तड़पते मरीज को स्टाफ ने जमकर पीटा: घसीटते हुए कमरे में बंद कर मारपीट, वीडियो वायरल
दौसा के रामकरण जोशी जिला अस्पताल में पथरी के दर्द से तड़प रहे मरीज नंदलाल मीणा को स्टाफ और गार्ड ने जल्दी इंजेक्शन लगाने की गुहार लगाने पर बुरी तरह पीट दिया। मरीज को घसीटकर एक कमरे में बंद करके मारपीट की गई। घटना का वीडियो वायरल हो गया है। दोनों पक्ष थाने पहुंचे लेकिन किसी ने लिखित शिकायत नहीं की।
दौसा (राजस्थान)। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। दौसा के रामकरण जोशी जिला अस्पताल में गुरुवार सुबह एक पथरी के दर्द से तड़पते मरीज के साथ स्टाफ और गार्ड ने कथित तौर पर मारपीट की। मरीज ने जल्दी इंजेक्शन लगाने की गुहार लगाई तो स्टाफ भड़क गया और उसे घसीटते हुए एक कमरे में बंद कर पीटा गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें मरीज चीखता-चिल्लाता दिख रहा है, लेकिन आसपास मौजूद लोग उसकी मदद नहीं करते नजर आ रहे हैं।
घटना का विवरण
घटना गुरुवार 26 मार्च 2026 की सुबह करीब 8:30 बजे रामकरण जोशी जिला अस्पताल में हुई। दौसा शहर के सोमनाथ मोहल्ले का रहने वाला नंदलाल मीणा पथरी के तेज दर्द से परेशान था। वह इलाज कराने अस्पताल पहुंचा। डॉक्टर ने जांच के बाद उसे दर्द निवारक इंजेक्शन लिखा।नंदलाल मीणा ने आरोप लगाया कि दर्द असहनीय होने के कारण उन्होंने स्टाफ से बार-बार जल्दी इंजेक्शन लगाने की अपील की। इसी बात पर स्टाफ नाराज हो गया। मरीज के अनुसार, गार्ड और अस्पताल स्टाफ ने मिलकर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। वे उसे घसीटते हुए एक कमरे में ले गए, कमरे का दरवाजा बंद किया और अंदर भी बुरी तरह पीटा। मरीज बचाव के लिए चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।
दोनों पक्षों के आरोप
मरीज का पक्ष: नंदलाल मीणा ने कहा कि वह केवल दर्द से राहत चाहता था। बार-बार गुहार लगाने पर स्टाफ ने उसे गाली दी और फिर शारीरिक रूप से हमला कर दिया। उसे घसीटकर अलग कमरे में बंद करके पीटा गया।स्टाफ का पक्ष: अस्पताल स्टाफ ने आरोपों से इनकार किया। उनका कहना है कि मरीज ने पहले ही गाली-गलौज शुरू कर दी थी, जिससे विवाद बढ़ा। स्टाफ ने मारपीट के आरोप को पूरी तरह गलत और बेबुनियाद बताया।
पुलिस की भूमिका
दौसा कोतवाली SHO भगवान सहाय शर्मा ने बताया कि दोनों पक्ष थाने आए थे। मरीज और अस्पताल स्टाफ दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए, लेकिन फिलहाल किसी भी पक्ष ने लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। दोनों पक्ष आपसी बातचीत के बाद थाने से चले गए। पुलिस मामले की निगरानी कर रही है और यदि लिखित शिकायत आई तो कार्रवाई की जाएगी।घटना के वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ बदसलूकी और लापरवाही को लेकर नाराजगी जता रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में बढ़ती घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब दौसा जिले के रामकरण जोशी जिला अस्पताल में विवाद की खबर आई हो। पहले भी यहां लापरवाही, डॉक्टरों के आपसी विवाद और मरीजों से बदतमीजी की शिकायतें आ चुकी हैं। ऐसे मामलों में आमतौर पर मरीज कमजोर पड़ता है क्योंकि स्टाफ और गार्ड की संख्या ज्यादा होती है और साक्ष्य जुटाना मुश्किल होता है।अभी तक न तो कोई स्टाफ सस्पेंड हुआ है और न ही कोई आधिकारिक जांच शुरू हुई है। यदि मरीज लिखित शिकायत दर्ज कराता है तो पुलिस जांच कर सकती है, जिसमें वीडियो महत्वपूर्ण सबूत साबित हो सकता है।