रणथंभौर सफारी अचानक क्यों हो गई महंगी? रणथंभौर टाइगर रिजर्व जाने से पहले जान लें ये बड़ी वजह

राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में सफारी टिकट महंगे हो गए हैं. नई दरों से पर्यटकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है, जिससे पर्यटन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.

Apr 3, 2026 - 12:20
रणथंभौर सफारी अचानक क्यों हो गई महंगी? रणथंभौर टाइगर रिजर्व जाने से पहले जान लें ये बड़ी वजह
रणथंभौर सफारी अचानक क्यों हो गई महंगी? रणथंभौर टाइगर रिजर्व जाने से पहले जान लें ये बड़ी वजह

राजस्थान के प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व में सफारी टिकट की दरों में बढ़ोतरी कर दी गई है, जिसका सीधा असर अब देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों पर पड़ने लगा है। नई दरें लागू होते ही पर्यटकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है और पर्यटन पर इसके प्रभाव की आशंका भी जताई जा रही है।

सुविधाओं और संरक्षण के नाम पर बढ़ाए गए शुल्क

वन विभाग के अनुसार, पार्क के रखरखाव, वन्यजीव संरक्षण और सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सफारी शुल्क बढ़ाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम लंबे समय में पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाएगा, हालांकि पर्यटक इस फैसले से खासे नाराज नजर आ रहे हैं।

नई दरें: अब कितना देना होगा किराया?

बढ़ोतरी के बाद जिप्सी और कैंटर दोनों सफारी महंगी हो गई हैं—

 कैंटर सफारी (20 सीटर)

  • भारतीय पर्यटक: ₹888 → ₹986.63 प्रति व्यक्ति
  • विदेशी पर्यटक: ₹2176.10 → ₹2399.63 प्रति व्यक्ति

 जिप्सी सफारी (6 सीटर)

  • भारतीय पर्यटक: ₹1455.17 → ₹1611.80 प्रति व्यक्ति
  • विदेशी पर्यटक: ₹2743.17 → ₹3024.80 प्रति व्यक्ति

यानी हर टिकट पर करीब ₹100 से ₹300 तक की बढ़ोतरी हुई है, जो परिवार के साथ घूमने आने वालों के लिए बड़ा खर्च बन सकती है।

आम पर्यटकों के लिए बढ़ी मुश्किल

पर्यटकों का कहना है कि पहले ही रणथंभौर सफारी महंगी मानी जाती थी, और अब कीमत बढ़ने से आम लोगों के लिए यहां घूमना और कठिन हो जाएगा। कई लोगों ने विकल्प के तौर पर अन्य सस्ते पर्यटन स्थलों का रुख करने की बात कही है।

स्थानीय कारोबार पर भी असर की चिंता

स्थानीय होटल मालिकों, गाइड्स और ट्रैवल एजेंट्स को भी इस फैसले से चिंता है। उनका मानना है कि टिकट महंगे होने से पर्यटकों की संख्या में गिरावट आ सकती है, जिससे उनके व्यवसाय पर असर पड़ेगा। रणथंभौर का पर्यटन काफी हद तक सफारी पर निर्भर है, इसलिए यह बदलाव पूरे इकोसिस्टम को प्रभावित कर सकता है।

भीड़ नियंत्रण का भी है तर्क

वन विभाग का कहना है कि सीमित संख्या में ही पर्यटकों को एंट्री दी जाती है, ताकि वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचे। ऐसे में शुल्क बढ़ाकर भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, साथ ही इससे मिलने वाली राशि को संरक्षण कार्यों में लगाया जाएगा।

फिलहाल, टिकट दरों में बढ़ोतरी को लेकर पर्यटकों और स्थानीय लोगों में असंतोष बना हुआ है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में यह फैसला पर्यटन पर कितना असर डालता है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground