बाड़मेर में छठा सामूहिक विवाह: 19 युवक-युवतियों ने एक साथ पहनाई वरमाला, MLA ने की सराहना, बोले- ऐसे आयोजन दिखावा और फिजूलखर्ची को रोकेंगे

बाड़मेर में खत्री समाज के छठे सामूहिक विवाह में 19 जोड़ों ने एक साथ वरमाला पहनी; MLA ने दिखावा और फिजूलखर्ची रोकने की सराहना की।

Nov 3, 2025 - 11:24
बाड़मेर में छठा सामूहिक विवाह: 19 युवक-युवतियों ने एक साथ पहनाई वरमाला, MLA ने की सराहना, बोले- ऐसे आयोजन दिखावा और फिजूलखर्ची को रोकेंगे

बाड़मेर, 3 नवंबर 2025: राजस्थान के बाड़मेर जिले में खत्री समाज की ओर से आयोजित छठे सामूहिक विवाह समारोह में एक अनोखा और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। यहां 19 जोड़ों ने एक साथ मंच पर खड़े होकर वरमाला पहनाई, जो सामाजिक समरसता और विवाह की सादगी का प्रतीक बन गया। यह आयोजन समाज में व्याप्त दिखावे और फिजूलखर्ची को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। स्थानीय विधायक (MLA) ने इसकी सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सामूहिक विवाह भविष्य में भी जारी रहेंगे, जो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए वरदान साबित होंगे।

आयोजन का विवरण और पृष्ठभूमि;    खत्री समाज बाड़मेर इकाई द्वारा संचालित यह छठा सामूहिक विवाह समारोह रविवार को जिले के एक प्रमुख सामुदायिक भवन में आयोजित किया गया। इस समारोह में कुल 19 युवक-युवतियां शामिल हुईं, जिनमें से अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से संबंधित थे। सामूहिक विवाह की अवधारणा को अपनाकर समाज ने न केवल विवाह की परंपरागत फिजूलखर्ची को कम किया, बल्कि सामाजिक एकता को भी मजबूत किया। आयोजन की शुरुआत सुबह 8 बजे हुई, जब सभी जोड़े विशेष रूप से सजाए गए मंडप में पहुंचे। पारंपरिक राजस्थानी परिधानों में सजे दुल्हन-दुल्हनें मंच पर एकत्रित हुए। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद दोपहर 12 बजे के करीब सभी 19 जोड़ों ने एक साथ वरमाला आदान-प्रदान किया। यह दृश्य देखने वालों के लिए भावुक और प्रेरक रहा, क्योंकि एक साथ इतने जोड़ों का एकमुश्त विवाह दुर्लभ होता है। समारोह में फूलों की वर्षा, मंगल गीत और पारंपरिक नृत्यों ने वातावरण को उत्सवपूर्ण बना दिया।खत्री समाज के पदाधिकारियों के अनुसार, यह आयोजन पिछले पांच वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा है। पहले समारोह में केवल 5 जोड़े शामिल हुए थे, लेकिन धीरे-धीरे संख्या बढ़ती गई। इस बार 19 जोड़ों के चयन में पारदर्शिता बरती गई, जिसमें समाज के सभी वर्गों से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया। समाज अध्यक्ष ने बताया कि विवाह के लिए सभी खर्चे—जैसे मंडप सज्जा, भोजन, वस्त्र और आभूषण—समाज की ओर से वहन किए गए, जिससे परिवारों पर कोई आर्थिक बोझ न पड़े।

MLA की प्रतिक्रिया: दिखावा रोकने की दिशा में कदम समारोह के मुख्य अतिथि और बाड़मेर विधानसभा क्षेत्र के विधायक (MLA) ने इस आयोजन की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, "ऐसे सामूहिक विवाह आयोजन समाज में व्याप्त दिखावे और फिजूलखर्ची को रोकने का एक प्रभावी माध्यम हैं। आज के दौर में जहां विवाह के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं, वहां यह सादगी भरा समारोह गरीब परिवारों के लिए राहत प्रदान करता है। हम सरकार की ओर से भी ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहन देंगे।" MLA ने आगे जोड़ा कि यह न केवल आर्थिक बचत करता है, बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने समाज से अपील की कि भविष्य में ऐसे आयोजनों को और विस्तार दिया जाए, ताकि अधिक से अधिक जोड़े लाभान्वित हो सकें। उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई, जहां लोगों ने इसे 'सादगी का संदेश' करार दिया।

सामूहिक विवाह का महत्व और प्रभाव सामूहिक विवाह की यह परंपरा खत्री समाज में गहराई से जड़ें जमा चुकी है। समाज के अनुसार, पिछले पांच आयोजनों में कुल 75 से अधिक जोड़े विवाहित हो चुके हैं, जिनमें से कई अब स्वयं समाज सेवा में सक्रिय हैं। इस आयोजन से न केवल आर्थिक बोझ कम होता है, बल्कि दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों पर भी अंकुश लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समारोह ग्रामीण भारत में सामाजिक परिवर्तन का एक मजबूत हथियार साबित हो सकते हैं।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.