बाड़मेर-बालोतरा जिला सीमा परिवर्तन का तीव्र विरोध: धोरीमन्ना में 9वें दिन जारी धरना, 14 जनवरी को जनआक्रोश रैली, सचिन पायलट सहित बड़े नेता होंगे शामिल
राजस्थान सरकार द्वारा 31 दिसंबर 2025 की रात जारी अधिसूचना से बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में बदलाव कर धोरीमन्ना व गुड़ामालानी को बालोतरा में शामिल किया गया, जबकि बायतु को बाड़मेर में वापस लिया गया। इस फैसले का तीव्र विरोध हो रहा है, जिसे कांग्रेस 'तुगलकी फरमान' बता रही है। धोरीमन्ना में पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी कड़ाके की ठंड में 9वें दिन भी धरने पर डटे हैं। 14 जनवरी को जनआक्रोश रैली प्रस्तावित है, जिसमें सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा समेत कई बड़े कांग्रेस नेता शामिल होंगे। यह बदलाव 2027 की जनगणना से पहले सीमाएं फ्रीज होने के ठीक पहले किया गया, जिससे लाखों लोगों को प्रभावित होने की आशंका है।
राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में अचानक किए गए बदलाव ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। भजनलाल शर्मा सरकार द्वारा 31 दिसंबर 2025 की रात को जारी अधिसूचना के तहत दोनों जिलों के बीच क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया, जिसके बाद से स्थानीय लोगों और कांग्रेस पार्टी में भारी आक्रोश है। यह बदलाव 1 जनवरी 2026 से पहले अंतिम समय सीमा (2027 की जनगणना से पहले प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज करने की डेडलाइन) के ठीक पहले किया गया, जिसे कांग्रेस ने "तुगलकी फरमान" और राजनीतिक साजिश करार दिया है।
बदलाव का विवरण
राजस्व विभाग की अधिसूचना के अनुसार:धोरीमन्ना और गुड़ामालानी उपखंडों को बाड़मेर से हटाकर बालोतरा जिले में शामिल कर दिया गया।बायतु उपखंड को बालोतरा से वापस बाड़मेर में शामिल किया गया।इससे बालोतरा जिले में अब 5 उपखंड (बालोतरा, सिणधरी, सिवाना, धोरीमन्ना, गुड़ामालानी) और 9 तहसीलें हो गई हैं, जबकि बाड़मेर में 7 उपखंड और 11 तहसीलें रह गई हैं।
इस पुनर्गठन से लगभग 2.5 लाख मतदाताओं पर असर पड़ा है और कई गांवों के लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने में अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे प्रशासनिक सुविधाएं प्रभावित होंगी।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह फैसला भौगोलिक वास्तविकताओं, बुनियादी ढांचे और जनता की सुविधा के खिलाफ है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे "रातोंरात लिया गया तुगलकी आदेश" बताया, जो जनहित के विपरीत है।
धरने और विरोध प्रदर्शन
बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना कस्बे में धोरीमन्ना बिजली घर के सामने 2 जनवरी से अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ, जो अब 9वें दिन (11 जनवरी 2026 तक) भी जारी है।पूर्व मंत्री और गुड़ामालानी के छह बार के विधायक हेमाराम चौधरी कड़ाके की ठंड में धरना स्थल पर डटे हुए हैं। वे रातें भी वहीं गुजार रहे हैं और भावुक होकर कहते हैं कि जब तक सरकार धोरीमन्ना और गुड़ामालानी को वापस बाड़मेर में नहीं लौटाती, धरना नहीं उठेगा।धरने में स्थानीय लोग, बुजुर्ग और कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हैं।रविवार को धरना स्थल से एसडीएम ऑफिस तक रैली निकाली गई और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।बाड़मेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल समेत कई कांग्रेस नेता धरने में पहुंचे और सरकार की आलोचना की।हेमाराम चौधरी ने कहा है कि यह फैसला जनभावनाओं के खिलाफ है और इससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
14 जनवरी को जनआक्रोश रैली
विरोध को और तेज करने के लिए 14 जनवरी 2026 को धोरीमन्ना में बड़ी जनआक्रोश रैली प्रस्तावित है (पहले यह 13 जनवरी को रखी गई थी, लेकिन अब तारीख बदली गई है)।इस रैली में कांग्रेस के कई बड़े नेता शामिल होने वाले हैं, जिनमें शामिल हैं:पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट,नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली,प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा।अन्य प्रमुख नेता जैसे अभिमन्यु विश्नोई, विनोद जाखड़, मुकेश भाखर, राम निवास गावड़िया, हरीश चौधरी, सुखराम विश्नोई, साले मोहम्मद, पदमाराम मेघवाल, रूपाराम धनदे, रतन देवासी, समजजित सिंह आदि।यह रैली धरने को राज्यव्यापी आंदोलन का रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
भाजपा कार्यकर्ता इस बदलाव से खुश हैं और इसे विकास के लिए सकारात्मक बता रहे हैं।कांग्रेस इसे राजनीतिक लाभ के लिए किया गया फैसला मान रही है, जो जनता की भावनाओं को नजरअंदाज करता है।
बाड़मेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने इसे "लोकतंत्र विरोधी" करार दिया।