बादल गरज रहे हैं, बाढ़ का खतरा मंडरा रहा! दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में अगले 3-4 दिनों तक भारी से अति भारी बारिश का 'रेड अलर्ट', किसानों के लिए विशेष सलाह जारी.
दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान में 27-30 अक्टूबर 2025 तक भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी। कोटा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ जैसे जिलों में बाढ़ का खतरा, किसानों को फसल और जल निकासी की सलाह। पिछले 24 घंटों में खातोली (कोटा) में 69 मिमी वर्षा, बाड़मेर में 36 डिग्री तापमान। पश्चिमी राजस्थान शुष्क, पूर्वी हिस्सों में मेघगर्जन के साथ बौछारें।
जयपुर, 27 अक्टूबर : राजस्थान के दक्षिणी और पूर्वी इलाकों में मानसून का 'फिर से स्वागत' हो चुका है। बंगाल की खाड़ी में विकसित हुए गहरे अवदाब (डीप डिप्रेशन) और एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रभाव से राज्य के कोटा, उदयपुर, अजमेर, जोधपुर, जयपुर और भरतपुर संभागों में अगले तीन-चार दिनों तक मेघगर्जन के साथ भारी से अति भारी वर्षा का दौर जारी रहने की चेतावनी जारी की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वर्षा का दौर 27 से 30 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें 27 और 28 अक्टूबर को सबसे अधिक तीव्रता देखने को मिल सकती है। इससे नदियों में जलस्तर बढ़ने, शहरी क्षेत्रों में जलभराव और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, जबकि अगले 48 घंटों में दक्षिणी-पूर्वी जिलों में अचानक बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
पिछले 24 घंटों का मौसम रिव्यू: पूर्वी राजस्थान में 'रिफ्रेशिंग' बारिश, पश्चिम शुष्क
पिछले 24 घंटों (26 अक्टूबर सुबह 8:30 बजे से 27 अक्टूबर सुबह 5:30 बजे तक) के दौरान पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। खासतौर पर कोटा संभाग के खातोली में भारी बारिश हुई, जहां 69.0 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। उदयपुर (डाबोक) एयरपोर्ट पर भी 2 सेंटीमीटर (20 मिमी) वर्षा हुई, जबकि अन्य जगहों पर छिटपुट बौछारें देखी गईं। इसके विपरीत, पश्चिमी राजस्थान (जैसे बाड़मेर, जैसलमेर) में मौसम पूरी तरह शुष्क रहा, जहां धूप खिली रही। तापमान की बात करें तो राज्य में अधिकतम तापमान बाड़मेर में 36.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से थोड़ा ऊपर है। वहीं, न्यूनतम तापमान पिलानी में 14.3 डिग्री सेल्सियस रहा, जो ठंड की शुरुआत का संकेत दे रहा है। जयपुर में आज सुबह न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 25 डिग्री के आसपास रहने की उम्मीद है। रविवार को उदयपुर, कोटा और अजमेर संभागों में हल्की वर्षा के कारण हवा में ठंडक घुल आई, लेकिन पश्चिमी हिस्सों में गर्मी का असर कायम है।
अगले 48 घंटों का पूर्वानुमान: भारी से अति भारी वर्षा, बंगाल की खाड़ी का 'अप्रत्यक्ष असर'
मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर के अनुसार, अगले 48 घंटों (27-29 अक्टूबर) में दक्षिणी और पूर्वी राजस्थान के जिलों—जैसे उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, कोटा, बारां, झालावाड़, भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक, बूंदी और करौली—में हल्की से मध्यम वर्षा के साथ कहीं-कहीं भारी से अति भारी बौछारें पड़ सकती हैं। बंगाल की खाड़ी में बना अवदाब अब गहरे अवदाब में बदल चुका है, जो 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट पर साइक्लोनिक स्टॉर्म के रूप में लैंडफॉल करेगा। हालांकि, इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों पर पड़ रहा है, जिससे मेघगर्जन, बिजली चमकना और 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाएं चल सकती हैं। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से जयपुर और जोधपुर संभागों में भी मध्यम वर्षा संभव है, लेकिन पश्चिमी राजस्थान (बीकानेर, जैसलमेर) में मौसम शुष्क रहेगा। 27 अक्टूबर को सुबह 8:30 बजे जारी बुलेटिन के मुताबिक, उदयपुर और कोटा संभागों में आज और कल सबसे अधिक वर्षा की संभावना है, जहां 24 घंटे में 64.5 मिमी से अधिक (भारी) या 115 मिमी से ऊपर (अति भारी) बारिश हो सकती है।
अगले 3-4 दिनों का विस्तृत पूर्वानुमान: ठंड बढ़ेगी, वर्षा का सिलसिला 30 अक्टूबर तक
27-28 अक्टूबर: दक्षिणी-पूर्वी जिलों में भारी से अति भारी वर्षा के साथ गरज-चमक। उदयपुर, कोटा और अजमेर में रेड अलर्ट जैसी स्थिति। अधिकतम तापमान 25-28 डिग्री, न्यूनतम 18-22 डिग्री।
29-30 अक्टूबर: वर्षा की तीव्रता कम होगी, लेकिन पूर्वी राजस्थान में हल्की-मध्यम बौछारें जारी। पश्चिमी हिमालयी प्रभाव से उत्तर-पश्चिमी जिलों में छिटपुट वर्षा। तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री नीचे।
31 अक्टूबर से: मौसम धीरे-धीरे साफ, लेकिन दक्षिणी भारत में साइक्लोन के प्रभाव से पूरे देश में वर्षा का असर रहेगा।
विशेष कृषि मौसम सलाह: किसान सतर्क, फसलें बचाएं!
मौसम विभाग ने किसानों के लिए अगले 48 घंटों की विशेष सलाह जारी की है, क्योंकि भारी वर्षा से खरीफ फसलों (मूंगफली, सोयाबीन, मक्का) को नुकसान हो सकता है, जबकि रबी की तैयारी प्रभावित हो सकती है। मुख्य सलाहें इस प्रकार हैं:
भारी वर्षा प्रभावित क्षेत्रों में: खेतों से जल निकासी की तत्काल व्यवस्था करें। नदियों-नालों के किनारे खड़ी फसलों को तुरंत कटाई कर लें।
कृषि कार्य: उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव टालें, क्योंकि नमी से बीमारियां फैल सकती हैं। धान, बाजरा जैसी फसलों में जलमग्नता से बचाव के लिए ड्रेनेज चैनल साफ रखें।
पशुपालन: पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखें, चारा भंडारण को वर्षा से बचाएं।
सामान्य टिप: मौसम ऐप या हेल्पलाइन (मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर: 0141-2711620) से अपडेट लें। यदि बाढ़ की स्थिति बने, तो स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
यह वर्षा किसानों के लिए दोहरी तलवार साबित हो सकती है—एक ओर सूखे की राहत, दूसरी ओर अतिवृष्टि का खतरा। विभाग ने जिलाधिकारियों को अलर्ट कर दिया है, ताकि राहत कार्य समय पर शुरू हो सकें। राजस्थान में मौसम का यह अप्रत्याशित मोड़ पर्यटकों के लिए भी चुनौतीपूर्ण है।