अमायरा सुसाइड केस: नीरजा मोदी स्कूल पर भारी आरोप, CBSE ने जांच में पाया दोषी – बुलिंग की शिकायतें अनसुनी, सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका

जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में चौथी कक्षा की छात्रा अमायरा ने 9 नवंबर को बुलिंग से तंग आकर स्कूल बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या कर ली। CBSE की जांच में स्कूल दोषी पाया गया – 18 महीने से बुलिंग की शिकायतें अनसुनी की गईं और घटना के बाद सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताई गई। 20 नवंबर को स्कूल को नोटिस जारी किया गया।

Nov 22, 2025 - 16:38
अमायरा सुसाइड केस: नीरजा मोदी स्कूल पर भारी आरोप, CBSE ने जांच में पाया दोषी – बुलिंग की शिकायतें अनसुनी, सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका

जयपुर, 22 नवंबर 2025: राजस्थान के जयपुर स्थित प्रतिष्ठित नीरजा मोदी स्कूल पर एक चौंकाने वाले मामले ने सबको स्तब्ध कर दिया है। चौथी कक्षा की मासूम छात्रा अमायरा की आत्महत्या के मामले में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने स्कूल प्रबंधन को दोषी ठहराते हुए 20 नवंबर को नोटिस जारी किया है। CBSE की दो सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अमायरा पिछले 18 महीनों से लगातार बुलिंग (छात्रों पर अत्याचार) की शिकायतें कर रही थी, लेकिन स्कूल के शिक्षकों और प्रबंधन ने इन्हें पूरी तरह अनसुना कर दिया। इसके अलावा, घटना के बाद घटनास्थल पर सबूतों से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। यह मामला न केवल स्कूल की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में बुलिंग जैसी समस्या की गहराई को भी रेखांकित करता है।

अमायरा की दर्द भरी कहानी: 18 महीनों का संघर्ष अमायरा एक होनहार और संवेदनशील बच्ची थी, जो जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ रही थी। स्कूल, जो शहर की एक प्रमुख अंग्रेजी माध्यम संस्था है, अमायरा के लिए एक सुरक्षित जगह बननी चाहिए थी, लेकिन यहीं पर उसके जीवन का अंतिम अध्याय लिखा गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 18 महीनों से अमायरा को अपने सहपाठियों द्वारा लगातार बुलिंग का शिकार होना पड़ रहा था। यह बुलिंग शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर थी – सहपाठी उसे ताने मारते, अपमानित करते और कभी-कभी धक्का-मुक्की भी करते। अमायरा ने कई बार अपनी मासूम आवाज में शिक्षकों को इसकी शिकायत की। कभी क्लास टीचर को, तो कभी प्रिंसिपल को। लेकिन हर बार जवाब वही मिला – "ये बच्चे का झगड़ा है, खुद सुलझा लो" या "इतना तूल मत दो"। CBSE समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि स्कूल प्रबंधन ने इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। एक रिपोर्ट में कहा गया है, "छात्रा ने 18 महीनों में कम से कम आठ बार लिखित या मौखिक शिकायतें दर्ज कीं, लेकिन कोई आधिकारिक जांच या काउंसलिंग सेशन आयोजित नहीं किया गया।" यह लापरवाही अमायरा के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ी, जिसने उसे इतना तोड़ दिया कि वह अंततः आत्महत्या का कदम उठाने को मजबूर हो गई।

9 नवंबर का काला दिन: स्कूल बिल्डिंग से कूदकर खत्म की जिंदगी 9 नवंबर 2025 को दोपहर के समय, स्कूल के परिसर में एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। अमायरा ने स्कूल की तीसरी मंजिल की बिल्डिंग से कूदकर अपनी जान दे दी। घटना के समय स्कूल में क्लास चल रही थी, और अमायरा की मां उसे लेने आई हुई थीं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अमायरा का शव स्कूल के आंगन में पड़ा मिला, जिसकी खबर फैलते ही परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। परिजनों ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज की, जिसमें स्कूल पर बुलिंग को आत्महत्या का मुख्य कारण बताते हुए हत्या का केस दर्ज करने की मांग की। लेकिन शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे "आत्महत्या" का मामला मान लिया, और स्कूल पर कोई तत्काल कार्रवाई नहीं हुई। अमायरा के पिता ने बताया, "मेरी बेटी डरी हुई रहती थी। वह स्कूल जाने से कतराती थी, लेकिन हमने सोचा कि बच्चे का डर है। आज पछतावा हो रहा है कि हमने स्कूल की लापरवाही को पहले पहचान लिया होता।"

CBSE जांच: लापरवाही और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप घटना के बाद अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के दबाव में CBSE ने तुरंत एक दो सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की। समिति में एक शैक्षिक विशेषज्ञ और एक मनोवैज्ञानिक शामिल थे, जिन्होंने स्कूल के रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अभिभावकों से बातचीत के आधार पर जांच की। 20 नवंबर को जारी रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

बुलिंग की अनदेखी: समिति ने पाया कि अमायरा की शिकायतें स्कूल के डायरी रजिस्टर में दर्ज हैं, लेकिन कोई फॉलो-अप एक्शन नहीं लिया गया। रिपोर्ट में कहा गया, "स्कूल ने CBSE के एंटी-बुलिंग गाइडलाइंस का पालन नहीं किया, जो हर शिकायत पर तत्काल जांच का प्रावधान करती हैं।" 

सबूतों से छेड़छाड़: सबसे गंभीर आरोप घटना के बाद घटनास्थल पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ का है। फॉरेंसिक टीम ने पाया कि अमायरा के कूदने के बाद स्कूल स्टाफ ने बिल्डिंग के फर्श को पानी से धो दिया था, जिससे खून के निशान और अन्य सबूत नष्ट हो गए। CCTV फुटेज में भी कुछ घंटों का गैप पाया गया, जो संदिग्ध लगता है। समिति ने इसे "साक्ष्य संरक्षण में जानबूझकर लापरवाही" करार दिया।

प्रबंधन की उदासीनता: जांच में स्कूल के प्रिंसिपल और सीनियर टीचर्स के बयान लिए गए, जहां उन्होंने शिकायतों को "सामान्य बच्चों का व्यवहार" बताया। लेकिन समिति ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि यह स्कूल की संस्कृति का हिस्सा था, जहां बुलिंग को हल्के में लिया जाता था।

CBSE ने रिपोर्ट के आधार पर स्कूल को शो-कॉज नोटिस जारी किया है, जिसमें 15 दिनों के अंदर जवाब मांगा गया है। नोटिस में स्कूल पर जुर्माना, प्रबंधन बदलाव और सख्त एंटी-बुलिंग पॉलिसी लागू करने की चेतावनी दी गई है। यदि जवाब संतोषजनक न मिला, तो CBSE स्कूल की मान्यता रद्द करने तक का कदम उठा सकता है।

यह मामला जयपुर ही नहीं, पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। अभिभावक संगठनों ने स्कूलों में बुलिंग के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग की है। अमायरा के परिजनों ने हाईकोर्ट में PIL दायर की है, जिसमें स्कूल पर IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मुकदमा चलाने की मांग की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस अन्य स्कूलों के लिए चेतावनी बनेगा।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.