अलवर में वोटर लिस्ट पुनरीक्षण में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, एक ही नाम से सैकड़ों आवेदन मिलने पर मचा हड़कंप.
अलवर के मिनी सचिवालय में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। अलवर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में वोटर लिस्ट से नाम हटाने के 20–25 हजार संदिग्ध फॉर्म मिले, जिनमें एक ही व्यक्ति के नाम से सैकड़ों आवेदन और कई फॉर्म बिना मोबाइल नंबर के पाए गए। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतंत्र से छेड़छाड़ बताते हुए विरोध जताया और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। प्रशासन ने फॉर्म की गहन जांच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
अलवर:- अलवर जिले के मिनी सचिवालय में चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अलवर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से जुड़े रिटर्निंग ऑफिसर (आईएएस) की टेबल पर अचानक 20 से 25 हजार ऐसे फॉर्म पाए गए, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाने की मांग की गई थी। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक हलकों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मच गई।
बताया जा रहा है कि इन आवेदनों की प्रारंभिक जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। बड़ी संख्या में फॉर्म एक ही व्यक्ति के नाम से भरे हुए हैं, जबकि कई आवेदनों में मोबाइल नंबर तक दर्ज नहीं हैं। कुछ फॉर्म में पते अधूरे हैं तो कई में हस्ताक्षर तक संदिग्ध बताए जा रहे हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने की कोशिश की गई है।
सूचना मिलने पर गुरुवार सुबह कांग्रेस नेताओं का प्रतिनिधिमंडल मिनी सचिवालय पहुंचा। नेताओं ने इन आवेदनों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर समय रहते इस मामले का खुलासा नहीं होता, तो हजारों वैध मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते थे, जिससे आगामी चुनावों पर सीधा असर पड़ता।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सुनियोजित तरीके से एक ही नाम से सैकड़ों फॉर्म भरकर वोटर लिस्ट में हेरफेर करने की कोशिश की गई। उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध फॉर्म आखिर कैसे स्वीकार किए गए और अब तक इनकी जांच क्यों नहीं हुई। नेताओं ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
वहीं प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों का कहना है कि मामला गंभीर है और सभी आवेदनों की गहन जांच कराई जा रही है। जिन फॉर्म में नियमों का उल्लंघन या फर्जीवाड़ा पाया जाएगा, उन्हें तत्काल निरस्त किया जाएगा। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि इतने बड़े पैमाने पर आवेदन किसके इशारे पर और किस उद्देश्य से जमा कराए गए।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने अलवर की राजनीति को गरमा दिया है। विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है, जबकि प्रशासन पारदर्शिता के साथ जांच का भरोसा दिला रहा है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि यह लापरवाही थी या फिर सुनियोजित साजिश।